मध्य प्रदेश

सैकड़ों वर्ष प्राचीन है सांचेत में मां खेड़ापति माता मड़

रिपोर्टर : सतीश मैथिल
सांचेत । कस्बा सांचेत में स्थित मां खेड़ापति माता मंदिर सैकड़ों वर्ष प्राचीन है मां खेड़ापति की महिमा निराली है शारदीय नवरात्रि मैं भक्तों का सुबह 4 बजे से ही जल चढ़ाना प्रारंभ हो जाता है मां खेड़ापति माता मंदिर मैं नवरात्रों में ओर यह सिलसिला दोपहर तक लगातार चलता है गांव के बुर्जुग 100 वर्षीय देवी सिंह चौहान बाबू जी बताते हैं 400 वर्ष प्राचीन है माता खेड़ापति का स्थान,नवरात्र में सुबह से लगता है तांता कस्बा सांचेत के सबसे प्राचीन मंदिरों में खेड़ापति माता का स्थान भी शामिल है
इस मंदिर की अनेक विशेषताओं में एक विशेषता यह भी है कि यहां पर माता खेड़ापति की मूर्ति के साथ वीर भैया हनुमान जी माता गौरी, गणेश, शंकर और मातारानी स्थापित हैं। दोनों नवरात्र के दौरान पूरे नो दिनों तक यहां पर विशेष पूजन अर्चन और जल चढ़ाने वालों का तांता लगा रहता है।
अष्टमी और नवमी पर माता का विशेष श्रंगार होता है। मंदिर को फूलों से सजाते हैं। माता को शीतलता पहुंचाने के लिए दही,चावल का लेप लगाया जाता है। चना और अन्ना का भोग बनाकर चढ़ाया जाता है। चुनरी अर्पित की जाती है।
दूल्हा दुल्हिन लेते हैं आशीर्वाद
विवाह मुहुर्त के दौरान विवाह से पूर्व और विवाह के तुरंत बाद कस्बा सांचेत के दूल्हा दुल्हिन पूजन करने और आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं। गाजे बाजे के साथ नव दंपत्ति यहां पर आर्शीवाद लेना नहीं भूलते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है।

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