
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 24 फरवरी 2026
24 फरवरी 2026 दिन मंगलवार को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष कि सप्तमी उपरांत अष्टमी तिथि है। आज की सप्तमी को कामदा सप्तमी का व्रत होता है। आज से होलाष्टाक प्रारम्भ हो जाएगा। आप से जैन लोगों का अष्टाह्निका व्रत आरम्भ हो जाता है। आज स्थायीजययोग, त्रिपुष्कर योग, एवं सर्वार्थ सिद्धि योग भी है। आप सभी सनातनियों को “होलाष्टाक लगने” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
*मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
*मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है। 🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352_
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
⛈️ मास – फाल्गुन मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – मंगलवार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि 07:02 AM तक उपरांत अष्टमी तिथि 04:51 AM तक उपरांत नवमी
✏️ तिथि स्वामी – सप्तमी के देवता हैं चित्रभानु। सप्तमी तिथि को चित्रभानु नाम वाले भगवान सूर्यनारायण का पूजन करने से सभी प्रकार से रक्षा होती है। यह मित्रवत, मित्रा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र कृत्तिका 03:07 PM तक उपरांत रोहिणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – कृतिका नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। और इसके देवता अग्नि हैं। कृत्तिका नक्षत्र का नाम भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय से जुड़ा हुआ है।
⚜️ योग – इन्द्र योग 07:23 AM तक, उसके बाद वैधृति योग 04:26 AM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग
⚡ प्रथम करण : वणिज 07:02 AM तक, बाद विष्टि 05:57 PM तक
✨ द्वितीय करण : बाद बव 04:52 AM तक, बाद बालव
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:35:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:56:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:11 से 06:01 तक
🌆 प्रातः सन्ध्या : शाम को 29:36 मिनट से सुबह 06:51 तक
🌟 अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:12 से 12:57 तक (सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त)
💧 अमृत काल: रात 02:46 से 04:31 तक (25 फरवरी की सुबह)
🌃 प्रातः सन्ध्या : शाम को 29:36 मिनट से सुबह 06:51 तक
🌌 सायाह्न सन्ध्या : शाम को 18:18 से रात्रि 19:33 बजे तक
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम को 18:15 से शाम 18:40 तक
✡️ विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 से 03:15 तक
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : सुबह 05:45 PM से अगले दिन सुबह तक
🌸 त्रिपुष्कर योग : सुबह 06:51 मिनट से 07:01 ए एम तक
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-देवी मन्दिर में सवाकिलो अनार चढ़ाएं।
🌴 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – होलाष्टाक प्रारम्भ/ अष्टाह्निकां व्रतारम्भ/ स्थायीजययोग/ त्रिपुष्कर योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ मासिक दुर्गाष्टमी/ भद्रा/ आडल योग/ ज्वालामुखी योग/ केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस, संत रविदास जी जयन्ती, वेलेंटाइन डे, साहीम मलिक वाल्डेरी जन्म दिवस, नमक अधिनियम 1944 स्थापना दिवस, नेशनल टॉर्टिला चिप डे , नेशनल ट्रेडिंग कार्ड डे, वर्ल्ड स्पाय डे, ट्विन पीक्स डे, वर्ल्ड बारटेंडर डे, प्रथम मुग़ल शासक बाबर जन्म दिवस, तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता जन्म दिवस, ख्यातिप्राप्त अभिनेत्रि श्रीदेवी स्मृति दिवस, प्रसिद्ध अभिनेत्री ललिता पवार पुण्य तिथि, पार्श्व गायक तलत महमूद जयन्ती, विश्व मुद्रण दिवस, विश्व बारटेंडर दिवस (World Bartender Day)
✍🏼 तिथि विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
घर की तिजोरी, कैश बॉक्स या पैसे रखने वाली अलमारी पर कलावा बांधना बेहद शुभ माना जाता है। इसे देवी लक्ष्मी का स्थान माना जाता है। यहां कलावा बांधने से धन की स्थिरता, बरकत और आर्थिक वृद्धि होती है।
पूजा के कलश या जल स्थान पर बांधें आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार कलश देवी-देवताओं और पवित्र नदियों का प्रतीक है। पूजा में रखे कलश के मुख पर कलावा बांधने से घर में शांति, पवित्रता और मानसिक शीतलता बनी रहती है।
*कलावा बांधते समय इन बातों का ध्यान रखें कलावा किसी शुभ दिन ही बांधना चाहिए। पुराना हो जाने पर इसे उतारकर जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, आप चाहें तो हर शुक्रवार नया कलावा भी बांध सकते हैं, इससे घर में उर्जा संतुलित रहती है। ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ आयुर्वेद में “4 मगज” ये होते हैं: *पहला, तरबूज का मगज। यह शरीर को ठंडक देता है, कमजोरी कम करता है और पेशाब से जुड़ी जलन या गर्मी में लाभकारी माना जाता है।
*दूसरा, खरबूजे का मगज। यह पाचन को हल्का रखता है और शरीर में नमी बनाए रखने में मदद करता है। तीसरा, कद्दू का मगज। इसे ताकत बढ़ाने वाला माना जाता है और इसमें अच्छे फैट और मिनरल्स होते हैं जो शरीर को ऊर्जा देते हैं।
चौथा, खीरे का मगज। यह शरीर की गर्मी कम करने और दिमाग को शांत रखने में सहायक माना जाता है।
*इन चारों को मिलाकर पाउडर बनाया जाता है या दूध, लड्डू या ठंडाई में डालकर लिया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर की कमजोरी, थकान, दिमागी तनाव और गर्मी से होने वाली समस्याओं में सहायक होता है।
लेकिन एक बात ध्यान रखने वाली है, अगर किसी को पाचन की समस्या, ज्यादा कफ या वजन बढ़ने की परेशानी हो तो इसकी मात्रा सीमित रखनी चाहिए। सही मात्रा में लिया जाए तो चार मगज शरीर को धीरे-धीरे मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
🫐 *आरोग्य संजीवनी* 🍓
इम्यूनिटी बूस्टर – इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटीबैक्टीरियल गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। सर्दी-खांसी, बुखार और अन्य संक्रमणों से बचाने के लिए छोटी हरड़ का उपयोग बेहद लाभकारी होता है।
डायबिटीज कंट्रोल – छोटी हरड़ शरीर में ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में सहायक होती है। यह इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाती है और डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद मानी जाती है।
वजन घटाने में मददगार – अगर आप मोटापे से परेशान हैं, तो छोटी हरड़ आपके लिए रामबाण हो सकती है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करती है, जिससे अतिरिक्त चर्बी जल्दी कम होती है।
बालों और त्वचा के लिए वरदान – हरड़ के सेवन से बाल झड़ने की समस्या कम होती है और स्कैल्प हेल्दी रहता है। साथ ही, यह त्वचा को ग्लोइंग बनाने में मदद करती है और फाइन लाइंस व झुर्रियों को कम करने का काम करती है।
🌷 गुरु भक्ति योग 🌹
माता (1) कौशल्या (2) सुमित्रा और (3) कैकई किन की पुत्रीयां थी?
पवित्र ग्रंथों और रामायण के विभिन्न संस्करणों के अनुसार, राजा दशरथ की तीनों रानियों के पिता और उनके मूल राज्यों का विवरण इस प्रकार है:* 1 माता कौशल्या (सबसे बड़ी)*
पिता: राजा भानुमंत* राज्य: दक्षिण कोशल (छत्तीसगढ़ और ओडिशा का क्षेत्र)।*
विवरण: राजा भानुमंत की पुत्री होने के कारण ही इनका नाम ‘कौशल्या’ पड़ा।* 2 माता कैकई (मझली)*
पिता: राजा अश्वपति
राज्य: केक्य (वर्तमान में यह क्षेत्र पाकिस्तान के पंजाब प्रांत और अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में आता है)।* विवरण: राजा अश्वपति की पुत्री होने के कारण इनका नाम ‘कैकई’ पड़ा। इनके भाई का नाम युधाजित था, जिनका रामायण में महत्वपूर्ण उल्लेख मिलता है।*
3 माता सुमित्रा (सबसे छोटी)* पिता: राजा सुबाहु (कुछ ग्रंथों के अनुसार ये मगध नरेश की पुत्री थीं)।*
राज्य: काशी या मगध (विभिन्न रामायणों में इसके अलग-अलग उल्लेख मिलते हैं, परंतु अधिकतर विद्वान इन्हें मगध की राजकुमारी मानते हैं)।* विवरण: सुमित्रा का अर्थ है ‘अच्छी मित्र’। वे स्वभाव से अत्यंत शांत और विदुषी थीं।*
एक नजर में संक्षिप्त विवरण:
| रानी का नाम | पिता का नाम | मूल राज्य |
|—|—|—| कौशल्या | राजा भानुमंत | दक्षिण कोशल | कैकई | राजा अश्वपति | केक्य देश || सुमित्रा | राजा सुबाहु | मगध / काशी |
रोचक जानकारी: क्या आप जानते हैं कि माता कैकई के पिता राजा अश्वपति को पक्षियों और पशुओं की भाषा समझने का वरदान प्राप्त था? इसी विशेषता के कारण उनके जीवन से जुड़ी कई दिलचस्प कथाएं प्रचलित हैं।
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⚜️ सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।।



