दो थानों का सीमा विवाद : गौरझामर एवं रहली पुलिस थानों के बीच एक किलोमीटर भूमि में गैर दावेदारी, अपराधियों के मजे

रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । देशभक्ति देशसेवा करने वाली पुलिस यहां अपने अपने थाना सीमा क्षेत्रों को लेकर पशोपेश में है सागर जिले के दो पुलिस थाना क्षेत्रों की सीमा विवाद को लेकर अभी तक कोई सारगर्भित समाधान नही निकलने से करीब एक किलोमीटर वाले क्षेत्र का तो भगवान ही मालिक हैं इस सम्बेदनशील विवादित क्षेत्र मेआये दिन संबंधित क्राइम की सूचनाएं मिलती रहती हैं लेकिन गौरझामर व रहली की पुलिस एक दूसरे पर ठीकरा फोड़कर अपराधियों को खुले आम साड़ की तरह छोड़ रही हैं दोनों थानों के बीच के भु-भाग की इस अभय स्थली में वन विभाग भी अब दो पाटों के बीच आकर फंस गया है गौरझामर कस्बे से लगा हुआ शालावारा खैराना का हरा भरा सागौन का वन अभ्यारण भी आता है जहाँ से बड़ी मात्रा में वन माफिया चोरी की लकडी का परिवाहन गुप्त मार्गो से करते हैं गौरझामर पुलिस थाना अपनी आरक्षित सीमा आदिवासी बाहुल्य ग्राम शालावारा तक केंद्रित कर मानती हैं जबकि रहली पुलिस ने अपनी सीमा खैराना गांव के पास मुख्य मार्ग स्थित 33/11उपकेन्द्र विधुत विभाग खैराना के पास लगे प्रवेश गेट को अपनी हद घोषित कर रखी है दोनों थानों की अपनी अपनी दावेदारी सही है फिर दोनों थानों की सीमाओं के बीच बची करीब एक किलोमीटर लंबी जगह किस थाना क्षेत्र की है इसका निर्धारण जिला पुलिस अधीक्षक जरूर स्पस्ट करके बतायेगे यदि समय रहते इस अनारक्षित क्षेत्र का थाना निर्धारण नही होता तो अपराधियों का आतंक इस क्षेत्र में ओर भी बढ़ जाएगा।
“रहली थाने का दर्जा शायद घट रहा था इसलिए गौरझामर थाने के ग्रामो को जोड़ा गया था”
पूर्व में थाना गौरझामर अंतर्गत आने वाले सीरी पटना रामपुर पाटई सकरी परासई आदि को महज इसलिए रहली थाने में जोड़ दिया था कि वो भी राजनेताओ के दबाव में रहली थाना ओर बढ़ जाये शायद रहली थाने के लिए गावो की कमी पड़ रही होंगी तब से लेकर आज तक इन ग्रामो के लोग थाना गौरझामर से पुनः जुड़ने की मांग लगातार करते आ रहे है परंतु स्थानीय जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता के कारण उनकी यह इक्च्छा पूर्ती नही हो पा रही है ज्ञात हो कि अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इन ग्रामो के ग्रामीणों को प्रतिदिन ही गौरझामर आना जाना पड़ता है और पूर्णतः गौरझामर पर ही इनकी निर्भरता भी हैं जनप्रतिनिधियों के कथित स्वार्थ के कारण तथा शासन प्रशासन के ढर्रे के चलते इन कथित कई ग्रामो की जनता देवरी और रहली दो तहसीलो से सम्बद्ध रहकर दोबारा समय श्रम एवं धन खर्च करने के लिए मजबूर है किसी भी दृष्टि से देवरी तहसील के ग्रामो की थाना रहली से सम्बद्धता उचित ओर न्यायपूर्ण नही है इन ग्रामो की जनता की मांग पर इस आशय का प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजा हैं परंतु पता नही इसकी फाइल फिर कहा उलझ गई हैं लोगो के मन मे आशा उपजी की प्रदेश सरकार के माध्यम से अब इस तरह के जटिल काम आसान हो जायेगे पर अब जनता की यह आशा टूट रही हैं और प्रदेश सरकार मात्र दिखावा सावित ही हो रही हैं ग्रामवासियों ने जिला कप्तान एवं प्रदेश की सरकार को पुनः ध्यान इस ओर आकृष्ट कर शीघ्र ही इन थाना क्षेत्रों का पुनः सीमांकन करने की मांग की है।
“बढ़ती गई आबादी पर नही बढ़ सका गौरझामर थाने में पुलिस बल”,पुलिस महकमें में नई नई तकनीकों अपग्रेडिंग व्यवस्था होने के बाद भी गौरझामर थाने की स्थिति जस की तस हैं जहाँ दस हजार की आबादी के लिये वर्षो पूर्व स्वीकृत किया गया पुलिस अमला तो नही बढ़ा उसमें कमी जरूर हो गई और इस काफी कम अमले की जबाबदारिया दिनों दिन बढ़ती ही जा रही हैं दस हजार की आबादी के लिए तैनात बहुत कम अमले को एक लाख की आबादी वाला क्षेत्र देखना पड़ रहा है गौरझामर नगर के इस थाने में वावा आदम के जमाने से पुलिस बल की कमी चली आ रही हैं जो आज भी बरकरार हैं शासन को चाहिए कि गौरझामर थाने में पुलिस बल की कमी को पूरा करे ताकि पुलिस कर्मी अपने कर्तव्यों का निर्वाह सही ढंग से कर सके और आम जनता की अपेक्षाओं की पूर्ति हो सके क्योकि पुलिस विभाग आम जनता की सुरक्षा एवं नगर की शान्ति व्यवस्था का प्रमुख अंग हैं जो पुलिस बल की कमी के कारण ही पुलिस विभाग को नीचा देखना पड़ता हैं सुचारू रूप से अपराधों पर नियंत्रण कानून व्यवस्था की स्थिति तभी सुधर सकती हैं जब पुलिस बल की कमी को पूर्ण किया जाय और पुलिस विभाग साधन संपन्न किया जाये।



