मध्य प्रदेश

बेगमगंज में बच्चों को तनाव से उबारने और आत्महत्या रोकने के लिए कार्यशाला

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । माध्यमिक स्कूल के विद्यार्थियों में बढ़ते मानसिक तनाव, पढ़ाई के दबाव और भावनात्मक समस्याओं को समझने तथा आत्महत्या जैसी गंभीर घटनाओं की रोकथाम के उद्देश्य से शा.माध्यमिक विद्यालय नवीन शाहपुर में जागरूकता कार्यशाला एसडीओपी सोनाली गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित की गई। कार्यशाला में विद्यार्थियों को तनाव की पहचान, भावनाओं को साझा करने और कठिन परिस्थितियों में मदद लेने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यशाला में एसडीओपी सोनाली गुप्ता ने कहाकि बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, लगातार उदासी, पढ़ाई से दूरी, अकेले रहने की प्रवृत्ति या निराशा जैसी बातों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे समय में अभिभावक और शिक्षक बच्चों से डांट-फटकार के बजाय संवेदनशीलता के साथ बातचीत करें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लें।
उन्होंने बच्चों से आत्महत्या शब्द की परिभाषा एवं मोबाइल के संबंध में , मोबाइल रखने , चलाने और रील बनाने की जानकारी लेते हुए बिना मम्मी -पापा को बताए मोबाइल का उपयोग नही करने, किसी अनजान से नम्बर या फोटो लेने या देने के साथ रील बनाकर ऑनलाइन अपलोड करने के लिए मना करते हुए कहाकि उसका कोई भी दुरुपयोग कर सकता है, जिससे आत्महत्या जैसे घातक कदम उठाने को लड़कियां मजबूर हो जाती है। विद्यार्थी अनावश्यक खर्चो से बचें , पढ़ाई का मानसिक तनाव नही ले और विषम परिस्थितियों में परिवार या टीचर्स अथवा पुलिस को खुलकर अपनी समस्या बताएं।
राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य मिशन के डॉ. बबलू साहू ने कहाकि आत्महत्या की रोकथाम केवल एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार, विद्यालय और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बच्चों को यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि परेशानी कितनी भी बड़ी हो, उसका समाधान निकाला जा सकता है और मदद मांगना कमजोरी नहीं है।
आरकेएसके एफपीएआई कार्यक्रम के परामर्शदाता अमित शर्मा ने उमंग हेल्पलाइन न.14425 , टेली मानस हेल्पलाइन न.14416 एवं डायल 112 नम्बर सभी को नोट कराते हुए शिक्षकों से आग्रह किया कि वे बच्चों के साथ नियमित संवाद बनाए रखें तथा जरूरतमंद विद्यार्थियों को समय रहते उचित सहायता उपलब्ध कराएं।
कार्यशाला में प्रधानाचार्य अमिता श्रीवास्तव, शिक्षक सुदीप श्रीवास्तव, निर्मला सिंह तोमर, केके रिणवा एवं गौरव सिंह आरक्षक सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की मौजूदगी जिन्होंने अपनी जिज्ञासाएं ओर समस्याएं साझा कीं।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने, अपने मित्रों की भावनाओं को समझने और किसी भी गंभीर परेशानी की स्थिति में तुरंत माता-पिता, शिक्षक या विश्वसनीय व्यक्ति से बात करने का संदेश दिया गया।

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