साईंखेड़ा स्कूल की प्राचार्य दोषी, कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन आयुक्त को भेजा

साईंखेड़ा पुराने हायर सेकेंडरी स्कूल मामला भवन तोड़ने में प्राचार्य दोषी अब खातों की जांच की मांग तेज, जिला शिक्षा अधिकारी ने कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन लोक शिक्षण संचालनालय आयुक्त के पास भोपाल भेजा
ग्रामीण बोले स्कूल के पूरे वित्तीय रिकॉर्ड की हो जांच हो
सिलवानी। साईंखेड़ा स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में बिना सक्षम अनुमति पुराने शासकीय भवन को तुड़वाकर उसकी निर्माण सामग्री नए निर्माण कार्यों में उपयोग करने के मामले में मीडिया द्वारा खबर को प्रमुखता से दिखाए जाने के बाद शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल के मामले मे जांच कराई गई थी प्रशासनिक जांच के बाद प्राचार्य हेमलता दास को दोषी पाया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी रायसेन ने जांच प्रतिवेदन 17 जुलाई 2026 को विभागीय कार्रवाई के लिए लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल के आयुक्त कार्यालय भेज दिया है। इस बीच मामले ने नया मोड़ ले लिया है। ग्रामीणों ने अब स्कूल के समस्त वित्तीय लेन-देन, विभिन्न योजनाओं से प्राप्त शासकीय राशि और उसके उपयोग की भी उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है।
ग्रामीणों की शिकायत के बाद सामने आए इस मामले में आरोप था कि स्कूल के पुराने शासकीय भवन को बिना सक्षम अनुमति के तुड़वा दिया गया और उसकी ईंटों सहित अन्य निर्माण सामग्री का उपयोग नए स्कूल परिसर की बाउंड्रीवाल व अन्य निर्माण कार्यों में कर लिया गया। मामले को लेकर ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी और एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर जांच की मांग की थी।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी डीडी रजक ने प्राचार्य से नोटिस देकर जवाब तलब किया। इसके बाद जिला परियोजना समन्वयक डीपीसी द्वारा कराई गई जांच में अनियमितता की पुष्टि हुई और प्राचार्य हेमलता दास को जिम्मेदार माना गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्रवाई के लिए पूरा प्रतिवेदन भोपाल भेज दिया गया है।
अब वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग
भवन तोड़ने के मामले में प्राचार्य के दोषी पाए जाने के बाद ग्रामीणों ने जांच का दायरा बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि स्कूल में मरम्मत कार्य, स्टेशनरी क्रय, भवन संधारण, विकास मद तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं के तहत वर्षों से राशि आहरित की जाती रही है। ऐसे में यह जांच होना आवश्यक है कि किस योजना से कितनी राशि प्राप्त हुई कितनी राशि निकाली गई और उसका उपयोग किन कार्यों में किया गया।
ग्रामीणों ने स्कूल के आय-व्यय खातों, निर्माण कार्यों के भुगतान, सामग्री खरीदी, मरम्मत कार्यों तथा अन्य सभी शासकीय आहरणों का विशेष ऑडिट कराने की मांग की है। साथ ही स्कूल में पदस्थ अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच करने की मांग उठाई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्णय प्रक्रिया और निर्माण कार्यों में किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सहभागिता रही।
खबरों के बाद हरकत में आया प्रशासन
साईंखेड़ा स्कूल भवन तोड़े जाने के मामले को मीडिया द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आया था। लगातार शिकायतों और खबरों के बाद कराई गई जांच में प्राचार्य को दोषी माना गया और मामला विभागीय कार्रवाई के लिए भोपाल भेजा गया। इससे शिकायतकर्ताओं के आरोपों को बल मिला है।
कार्रवाई पर टिकी निगाहें
जांच में दोष सिद्ध होने के बाद अब पूरे मामले में लोक शिक्षण संचालनालय की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि भवन तोड़ने के मामले के साथ-साथ वित्तीय लेन-देन की भी निष्पक्ष जांच होती है तो स्कूल में हुए शासकीय खर्चों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और भविष्य में सरकारी संपत्तियों एवं शासकीय राशि के दुरुपयोग पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
इस संबंध में डीडी रजक, जिला शिक्षा अधिकारी, रायसेन का कहना है कि साईंखेड़ा हायर सेकेंडरी स्कूल मामले की जांच में प्राचार्य दोषी पाई गई हैं। जांच प्रतिवेदन 17 जुलाई 2026 को लोक शिक्षण संचालनालय आयुक्त कार्यालय भेज दिया गया है, जहां से आगे की विभागीय कार्रवाई की जाऐगी।



