मध्य प्रदेश

शराब दुकान का मैनेजर एवं अन्य तस्कर चढ़े पुलिस के हत्थे

14 पेटी देशी, 1 पेटी अंग्रेजी शराब एवं 4 पेटी बियर सहित ईको कार जप्त
रिपोर्टर : राजेन्द्र सिंह
पाटन। मीडिया जब गलत कामों, भ्रष्टाचार आदि के मामले उजागर करता है ऐसे मैं सरकारी तंत्र उस मामले में सुधार एवं निष्पक्ष कार्यवाही करता है। तब ऐसे ही सार्थक परिणाम आते है। मीडिया के द्वारा विगत दिनों पाटन नगर एवं ग्रामीण इलाकों में चल रही अवैध शराब बिक्री एवं आईपीएल सट्टा एवं सट्टा पट्टी लिखने की लगातार खबरे प्रकाशित की थी जिस पर पुलिस कप्तान के द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों को सक्त कार्यवाही हेतु निर्देशित किया था। गुरुवार की सुबह पुलिस को मुखबिर ने सूचना दी कि ईको कार क्रमांक एमपी 20 सीजे 3754 में पाटन शराब दुकान से शराब लोड करके कटंगी सड़क के गांवों में सप्लाई करने ले जाने वाले है तत्काल कटंगी रोड पर स्थित साईं ट्रेडर्स के पास घेराबंदी की गयी, जहां उक्त नंबर की कार को रोका गया कार सवार तीनों लोगों से नाम पता पूछने पर चालक ने अपना नाम गनेश ठाकुर उम्र 32 वर्ष निवासी ग्राम हरदुआ एवं अर्जुन सिंह उम्र 32 वर्ष निवासी ग्राम बभंडा जिला औरंगाबाद बिहार तथा गजेंद्र सिंह उम्र 40 वर्ष निवासी ग्राम उड़ना बताया, कार को चैेक करने पर 14 पेटी देशी, 01 पेटी अंग्रेजी मैकडॉवेल शराब एवं 4 पेटी बियर जिसकी कीमती लगभग 76 हजार रुपए की शराब रखी मिली जिसे कार सहित जप्त करके शराब दुकान के मैनेजर अर्जुन सिंह एवं चालक गणेश ठाकुर तथा गजेन्द्र सिंह के विरूद्ध 34 (2) आबकारी एक्ट के तहत कार्यवाही की गयी।
अवैध शराब तस्करों की मुरीद पाटन पुलिस..
मान न्यायालय के निर्देश पर तीनों शराब तस्करों को पाटन पुलिस की कस्टडी में आरोपियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराके मन्नी जेल भेजना था लेकिन पाटन पुलिस के उपनिरीक्षक रविशंकर उपाध्याय एवं उनकी टीम अवैध काम करने वालों की मुरीद है जिसकी वजह से शराब तस्करों को पाटन पुलिस न्यायालय में बिना हथकड़ी के घुमाते दिखी ये सारी घटना न्यायालय परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। यदि आरोपी फरार हो जाय या फिर पुलिस कस्टडी में आरोपियों के साथ कोई घटना घटित हो जाय तब किसकी जवाबदारी होगी क्या पुलिस कप्तान इन लापरवाह पुलिस अधिकारी, कर्मचारियों पर कार्यवाही करेगे या इनको बक्स देगे।
कानून के जानकारों ने बताया कि… 302, 302, 326, 354, 376, 379, 380, 45, 25 आर्म्स एक्ट, 34 (2) आबकारी एक्ट की धाराओं में न्यायालय लाय गए आरोपियों को हथकड़ी में लाया जाता है। एवं न्यायालय कक्ष में आरोपियों की हथकड़ी खोली जाती है एवं कक्ष से बाहर निकल कर आरोपियों को पुन: हथकड़ी लगाकर स्वास्थ्य परीक्षण हेतु सरकारी अस्पताल ले जाया जाता है इसके बाद जेल भिजवा दिया जाता है। न्यायालय परिसर में पाटन पुलिस की लापरवाही बेहद निंदनीय है। पुलिस कप्तान को इन सभी ज़िम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों को सस्पेंड करना चाहिए। जिससे फिर कभी इस तरह की घटनाओं की पुनरावृति न हो।

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