मध्य प्रदेश

14 सितंबर से गणेशोत्सव: नगर में तैयारियां तेज, महंगाई के बीच बढ़ी गणेश प्रतिमाओं की कीमतें

बाल स्वरूप की प्रतिमाओं की मांग सबसे अधिक, एक दर्जन से अधिक कारीगर दिन-रात जुटे
सिलवानी। आगामी 14 सितंबर से प्रारंभ होने वाले 12 दिवसीय गणेशोत्सव को लेकर नगर में तैयारियां तेज हो गई हैं। गणेश प्रतिमाओं के निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं। इस वर्ष महंगाई का असर प्रतिमाओं की कीमतों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। मूर्तिकारों के अनुसार कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण प्रतिमाओं की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे इस बार भगवान गणेश की स्थापना श्रद्धालुओं की जेब पर पहले की अपेक्षा अधिक भारी पड़ेगी।
मूर्तिकारों ने बताया कि पिछले वर्ष 3 से 4 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा जहां लगभग 3,500 रुपये में उपलब्ध हो जाती थी, वहीं इस वर्ष इसकी कीमत बढ़कर करीब 5,000 रुपये हो गई है। इसी प्रकार 8 से 10 फीट की प्रतिमा की कीमत 7,000 रुपये से बढ़कर करीब 10,000 रुपये तक पहुंच गई है।
प्रतिमा निर्माण में उपयोग होने वाले बांस, मिट्टी, घास, सुतली, रंग एवं अन्य सामग्री के दाम बढ़ने से लागत में भारी इजाफा हुआ है। बाहर से आने वाला बांस, जो पिछले वर्ष लगभग 70 रुपये प्रति नग मिलता था, अब 100 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं 25 किलो सुतली का बंडल पहले 3,000 रुपये में मिलता था, जिसकी कीमत अब करीब 6,000 रुपये हो गई है। इसके अलावा घास की एक ट्रॉली, जो पहले लगभग 12 हजार रुपये में मिलती थी, अब 16 हजार रुपये के आसपास पहुंच गई है। प्रतिमाओं में उपयोग होने वाले रंगों के दाम भी करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।
बाल स्वरूप की प्रतिमाओं की मांग अधिक
मूर्तिकारों के अनुसार इस वर्ष भगवान गणेश के बाल स्वरूप वाली प्रतिमाओं के साथ छोटे आकार की प्रतिमाओं की मांग सबसे अधिक है। श्रद्धालुओं की पसंद को देखते हुए कारीगर इन प्रतिमाओं के निर्माण को प्राथमिकता दे रहे हैं।
एक दर्जन से अधिक कारीगर दिन-रात जुटे
नगर के भोपाल रोड, उदयपुरा रोड तथा कॉलेज रोड स्थित वार्ड क्रमांक-12 में गणेश प्रतिमाओं का निर्माण तेजी से चल रहा है। यहां एक दर्जन से अधिक कारीगर 24 घंटे मेहनत कर प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं, ताकि समय पर सभी ऑर्डर पूरे किए जा सकें।
हर वर्ष बनती हैं सैकड़ों प्रतिमाएं
सिलवानी एवं आसपास के क्षेत्रों में प्रतिवर्ष सैकड़ों मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं। इनकी ऊंचाई सामान्यतः 3 फीट से लेकर 12 फीट तक होती है। स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाली इन प्रतिमाओं की मांग नगर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी रहती है।
लागत और ग्राहकों के बजट के बीच संतुलन की चुनौती
मूर्तिकार जय कुमार साहू सहित अन्य कारीगरों का कहना है कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से प्रतिमाओं की लागत काफी बढ़ गई है। ऐसे में उनके सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर समय पर ऑर्डर पूरा करना और दूसरी ओर प्रतिमाओं की ऐसी कीमत तय करना, जिससे ग्राहकों का बजट भी न बिगड़े और कारीगरों की लागत भी निकल सके। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच लागत और ग्राहकों की क्षमता के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

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