ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग शनिवार, 04 मार्च 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि ••• ✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 04 मार्च 2023

शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
🌸 04 मार्च 2023 दिन शनिवार को रंगभरी एकादशी व्रत के पारण का मुहूर्त आज ही है। क्योंकि फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की रंगभरी एकादशी तारीख 02 मार्च 2023 को प्रातः 07:50 AM बजे से शुरू होकर 03 मार्च 2023 को सुबह 09:44 AM बजे तक थी। इसलिए आज 04 मार्च 2023 को पारण सुबह 06:18 AM से 08:37 AM तक किया जा सकता है। आज शनिवार का शनिप्रदोष व्रत भी है। यह शनिप्रदोष सन्तान प्राप्ति हेतु प्रशस्त बताया गया है। आज पुष्य नक्षत्र से युक्त गोविन्द द्वादशी का पावन व्रत भी है। इस द्वादशी को नृसिंह द्वादशी भी कहा जाता है। आप सभी सनातनियों को शनिप्रदोष, गोविन्द द्वादशी एवं नृसिंह द्वादशी के पावन व्रत की हार्दिक शुभकामनायें।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है।
पुराणों में वर्णित है कि पिप्पलाद ऋषि ने अपने बचपन में माता पिता के वियोग का कारण शनि देव को जानकर उनपर ब्रह्म दंड से प्रहार कर दिया, जिससे शनि देव घायल हो गए। देवताओं की प्रार्थना पर पिप्पलाद ऋषि ने शनि देव को इस बात पर क्षमा किया कि शनि जन्म से लेकर 16 साल तक की आयु तक एवं उनके भक्तो को किसी को भी कष्ट नहीं देंगे। तभी से पिप्पलाद का स्मरण करने से ही शनि देव के प्रकोप से मुक्ति मिल जाती है।
शिवपुराण के अनुसार शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि की पीड़ा शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन उत्तरायण
🌦️ ऋतु – सौर बसन्त ऋतु
🌤️ मास – फाल्गुन मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – द्वादशी 11:49 AM बजे तक उपरान्त त्रयोदशी तिथि है।
✏️ तिथि स्वामी : द्वादशी तिथि के देवता हैं विष्णु। इस तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य सदा विजयी होकर समस्त लोक में पूज्य हो जाता है।
💫 नक्षत्र – पुष्य 18:53 PM तक उपरान्त आश्लेषा नक्षत्र है।
🪐 नक्षत्र स्वामी : नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है। नक्षत्र के देवता देव गुरु बृ्हस्पति को पुष्य नक्षत्र का अधिष्ठाता देवता माना गया है।
📣 योग – शोभन 19:59 PM तक उपरान्त अतिगंड योग है।
प्रथम करण : बालव – 11:43 ए एम तक
द्वितीय करण : कौलव – 12:56 ए एम, मार्च 05 तक
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो अदरख एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🔥 गुलिक काल : शनिवार का (अशुभ) काल 06:44 ए एम से 08:11 ए एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सुबह 09:00 बजे से 10:30 बजे तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:13:38
🌅 सूर्यास्त – सायं 17:47:32
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:05 ए एम से 05:54 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:29 ए एम से 06:44 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:10 पी एम से 12:56 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:16 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:20 पी एम से 06:45 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:23 पी एम से 07:37 पी एम
💧 अमृत काल : 11:30 ए एम से 01:18 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:08 ए एम, मार्च 05 से 12:57 ए एम, मार्च 05
❄️ रवि योग : 06:41 पी एम से 06:37 ए एम, मार्च 05
☀️ शोभन योग- आज शाम 7 बजकर 37 मिनट तक
🌸 पुष्य नक्षत्र- आज शाम 6 बजकर 41 मिनट तक
🚕 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏻 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शिवजी का दुग्धाभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – शनि प्रदोष/ पुष्य नक्षत्र से युक्त गोविन्द द्वादशी/ नृसिंह द्वादशी, स्वतंत्रता सेनानी बलुसु संबमूर्ति जन्म दिवस, साहित्यकार ठाकुर जगमोहन सिंह स्मृति दिवस, भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी गायत्री गोपीचंद जन्म दिवस, क्रांतिकारी लाला हरदयाल शहीद दिवस, साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु जन्म दिवस, राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस (औद्योगिक संस्थानों की सुरक्षा), राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस, मूल प्रारंभ
✍🏼 विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण हैं। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ एवं जप से धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
🏞️ Vastu tips 🏞️
वास्तु टिप्स: घर में कभी भी टूटा या टूटा हुआ दर्पण नहीं रखना चाहिए। घर के बड़े-बुजुर्ग अक्सर हमें घर से टूटे हुए शीशे और टूटी हुई मूर्तियों को हटाने के लिए कहते हैं। इसके पीछे एक महत्वपूर्ण कारण है जिसका उल्लेख वास्तु शास्त्र में किया गया है। आचार्य श्री गोपी राम ने घर में टूटा या विकृत दर्पण नहीं रखने की बात करते हैं। वैसे तो घर में शीशा लगाना शुभ होता है, लेकिन टूटा हुआ या टूटा हुआ दर्पण अशुभ फल देता है।
ऐसा दर्पण घर में रखने से सकारात्मक कंपन कम होता है और नकारात्मक कंपन बढ़ता है क्योंकि टूटे हुए दर्पण पर पड़ने वाली रोशनी नकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है जो सीधे घर के सदस्यों को प्रभावित करती है।
शीशा टूटा हो तो उसे घर से बाहर फेंक देना चाहिए। जब कोई शीशा अचानक टूट जाए तो इसका मतलब है कि इस शीशे पर घर में कोई बड़ी मुसीबत टल गई है, इसलिए उसे बाहर फेंक देना चाहिए।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ❇️
रात में पंखा चलाना क्यों है खतरनाक रातभर पंखा चलाकर सोने से अगले दिन आपको बॉडी में दर्द की समस्या हो सकती है. ठंडी हवा के कारण मसल्स में खिंचाव आता है और आपको ज्यादा दर्द झेलना पड़ सकता है. इसके अलावा, रात में वैसे भी अभी तापमान कम रहता है, ऐसे में रातभर पंखा चलाकर सोने से आपको कोल्ड हो सकता है. अस्थमा के मरीजों को तो इस वक्त रात में पंखे का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए. इसकी वजह से आपको दिन में ज्यादा छींक आ सकती है, आंखों से पानी निकल सकता है और सांस लेने में तकलीफ भी हो सकती है।
इन चीजों को भी करने से बचें बदलते मौसम में दही का सेवन करने से बचना चाहिए. आर्युवेद के अनुसार दही की तासीर ठंडी होती है. ऐसे में यह आपको जुकाम व नजले की समस्या हो सकती है. कोशिश करें कि रात के वक्त दही का सेवन बिल्कुल भी ना करें. रात में चावल का सेवन करने से बचना चाहिए. बदलते मौसम में रात में चावल खाने से कफ, जलन और सूजन की समस्या पैदा हो सकती है. इस वजह से एक्सपर्ट्स इस मौसम में चावल ना खाने की सलाह देते हैं. आप दिन के वक्त चावलों का सेवन कर सकते हैं।
🫁 आरोग्य संजीवनी 🫀
किडनी के अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए हेल्दी आहार आवश्यक है. पोटेशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ, जैसे केला, संतरा, पालक और एवोकाडो, आपकी किडनी को हेल्दी रखने में मदद कर सकते हैं. दूसरी ओर, उच्च नमक, चीनी और अनहेल्दी फैटी फूड किडनी की बीमारी के रिस्क को बढ़ा सकते हैं.
नियमित रूप से व्यायाम करें नियमित व्यायाम न केवल ओवर ऑल हेल्थ के लिए अच्छा होता है बल्कि किडनी को हेल्दी रखने में भी मदद कर सकता है. व्यायाम ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करता है, जो किडनी की बीमारी के लिए एक महत्वपूर्ण रिस्क फैक्टर है।
धूम्रपान छोड़ें किडनी की बीमारी के लिए धूम्रपान एक बड़ा रिस्क फैक्टर है. यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो किडनी की बीमारी के डेवलपमेंट के रिस्क को कम करने के लिए जितनी जल्दी हो सके छोड़ दें.
ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करें हाई ब्लड प्रेशर और हाई ब्लड शुगर लेवल किडनी की बीमारी के प्रमुख रिस्क फैक्टर में से एक हैं. रक्तचाप और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रण में रखने के लिए नियमित जांच कराते रहें और जरूरी दवाएं लें.
नैचुरल डाइट का प्रयोग करें कुछ नैचुरल, डाइट जैसे सिंहपर्णी चाय, मूत्र उत्पादन को बढ़ाकर किडनी के कार्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं.
ओवर-द-काउंटर दर्द की दवाओं से बचें ओवर-द-काउंटर दर्द दवाएं, जैसे कि इबुप्रोफेन और एस्पिरिन, बड़ी मात्रा में या लंबे समय तक लेने पर किडनी की क्षति हो सकती है. इन दवाओं से बचने की कोशिश करें या अपने उपयोग को सीमित करें.
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
रोने में औरतों से पीछे क्यों हैं मर्द, इन आंसुओं के पीछे क्या वाकई केमिकल लोचा है?
लड़के रोते हुए अच्छे नहीं लगते, सोसाइटी का भावनाओं को लेकर ये पैरामीटर कितना सही है, इसके अलावा मर्द कम क्यों रोते हैं, क्यों वो औरतों की तुलना में आंसू कम बहाते हैं, इसके पीछे क्या केमिकल लोचा है.
‘मर्द को कभी दर्द नहीं होता’, ‘समझदार लड़के रोते नहीं है’. ऐसे डायलॉग्स आपने बचपन में अपने घर में और फिल्मों में भी खूब सुने होंगे. अजीब लगता है लेकिन सच है कि औरतों की तुलना में मर्द रोते नहीं है, या कभी कभार ही रोते हैं. क्यों किसी पुरुष को रोते हुए देखकर आपको अजीब लगता है? ये केवल साहस और मर्दानगी की बात नही है, इज्जत की बात तो बिलकुल ही नहीं है, इसके पीछे की वजह क्या है जो मर्दों को सरेआम रोने और इमोशनल होने से रोकती है. क्या इसके पीछे वाकई केमिकल लोचा है.
चलिए जानते हैं कि रोकर भावनाएं जाहिर करने में मर्द जीरो क्यों हैं? आखिर क्यों मर्द बहुत कम रोते हैं. आपको बता दें कि 2011 की मर्दों के इसी व्यवहार के ऊपर एक दिलचस्प स्टडी की गई थी जिसकी रिपोर्ट कहती है कि एक औरत यानी महिला पूरे साल में 30 से 64 बार या इससे भी ज्यादा बार रोती है, वो भी सरेआम. वहीं मर्दों की बात करें तो ये पूरे साल में पांच से सात बार से ज्याद आंसू नहीं बहाते हैं.
एक नहीं दो दो हॉर्मोन हैं जिम्मेदार इसके पीछे पुरुषों भीतर पाया जाने वाला वो हॉर्मोंन जिम्मेदार है, जो उन्हें महिलाओं के मुकाबले ज्यादा शक्तिशाली और मजबूत बनाता है. जी हां इस हॉर्मोन का नाम है टेस्टोस्टेरोन. ये वही हॉर्मोन है जो मर्दानगी की मिसाल माना जाता है और किसी पुरुष में इसका ज्यादा या कम बनना उस पुरुष की यौन गतिविधि को संचालित करता है. यही हॉर्मोन पुरुषों को रोने और भावुक होने से रोकता है, ये इमोशनल इंटेलीजेंस को कम करता है और आंसुओं को बहने से रोकता है.
क्या कहते हैं रिसर्च हाल ही में हुई एक रिसर्च में हॉलैंड की एक प्रोफेसर ने शोध के बाद पुरुषों के कम आंसुओं के पीछे की वजह प्रोलेक्टन हॉर्मोन को माना है. प्रोलेक्टन हॉर्मोन मनुष्य को भावुक बनाता है और एक्सप्रेशन व्यक्त करने के लिए उत्साहित करता है. अब काम की बात जानिए, प्रोलेक्टन हॉर्मोन पुरुषों में ना के बराबर होता है और औरतों में इसकी मात्रा ज्यादा होती है. इसलिए अपने अंदर कूट कूट कर भरे हॉर्मोन के चलते ही औरतें ज्यादा रोती और भावुक होती है. वहीं पुरुषों की मर्दानगी वाला हॉर्मोन उन्हें रोने से रोक लेता है.
यह वाकई साइंस है यानी अगली बार अगर आप किसी मर्द को गलती से रोता हुए देख लें तो उस पर लानत भेजने की बजाय ये सोचिएगा कि इसकी बॉडी में प्रोलेक्टन हॉर्मोन जरा ज्यादा एक्टिव हो गया है. बस इतनी सी बात है औऱ सदियों से आंसुओं को औरतों का हथियार बना दिया गया है, और मर्द सामाजिक इज्जत की आड़ में आंसुओं के समुंदर से महरूम रह जाते हैं, जबकि इसके पीछे की शुद्ध वजह साइंटिफिक है
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⚜️ द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
द्वादशी तिथि में जन्म लेनेवाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है। इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है। इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है। इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है। ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते हैं।

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