मासूम के हाथों में अस्थियां, सवालों के घेरे में व्यवस्था, दमोह की पीड़ा

ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह। जिले से सामने आई एक मार्मिक तस्वीर ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। एक मासूम बच्चा अपने नन्हे हाथों में अपने पिता की अस्थियां थामे खड़ा है। उसे शायद यह भी नहीं पता कि वह क्या पकड़े हुए है, लेकिन उसके आसपास का माहौल, मां की नम आंखें और ग्रामीणों का आक्रोश बहुत कुछ बयान कर रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक महेंद्र ने कथित रूप से पुलिस के दबाव में आकर आत्महत्या कर ली। हालांकि, इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। परिजन और ग्रामीण इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि किसी प्रकार का दबाव बनाया गया था, तो इसकी उच्चस्तरीय और पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने मृतक की अस्थियां लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाने का प्रयास किया। रास्ते में पुलिस द्वारा रोकने की कोशिश किए जाने की खबर भी सामने आई है, जिससे लोगों में नाराजगी देखी गई। हालांकि प्रशासनिक पक्ष से इस संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
यह घटना केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि व्यवस्था पर उठते सवालों का प्रतीक बन गई है। क्या आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस करता है? क्या ऐसे मामलों में त्वरित और निष्पक्ष जांच की प्रक्रिया पर्याप्त और प्रभावी है?
प्रशासन के लिए यह समय संवेदनशीलता और पारदर्शिता दिखाने का है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, और यदि आरोप निराधार हैं तो निष्पक्ष जांच के माध्यम से सच्चाई सामने लाना आवश्यक है।
सबसे बड़ा प्रश्न उस मासूम के भविष्य का है, जो अनजाने में ही न्याय की मांग का प्रतीक बन गया है।
दमोह की यह घटना अब न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी बन चुकी है। लोगों की मांग है कि मामले की उच्चस्तरीय, समयबद्ध और निष्पक्ष जांच हो, ताकि सच्चाई सामने आए और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।



