भड़रिया नवमी शुक्रवार को मनाई जाएगी : ज्योतिष अचार्य पंडित अरुण शास्त्री

रिपोर्टर : सतीश मैथिल
सांचेत । भड़रिया नवमी को भड़ली नवमी, भड़ल्या नवमी, या भद्रिका नवमी भी कहा जाता है। यह आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन को अबूझ मुहूर्त माना जाता है, जिसका अर्थ है कि इस दिन बिना मुहूर्त देखे भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं, खासकर विवाह जैसे मांगलिक कार्य। इस वर्ष भड़रिया नवमी 4 जुलाई को है। ज्योतिष अचार्य पंडित अरुण शास्त्री ने बताया कि भड़रिया नवमी पर, भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं, जिसके बाद अगले 4 महीनों तक कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। इसलिए, भड़रिया नवमी को विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है, क्योंकि इसके बाद देवशयनी एकादशी आ जाती है भड़रिया नवमी पर, सिद्ध और साध्य योग जैसे शुभ योग भी बनते हैं, जो इस दिन को और भी शुभ बनाते हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की भी पूजा की जाती है।
भड़रिया नवमी के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण बातें
अबूझ मुहूर्त:
भड़रिया नवमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है, जिसका अर्थ है कि इस दिन बिना मुहूर्त देखे भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
मांगलिक कार्यों के लिए शुभ:
भड़रिया नवमी विवाह, सगाई, गृह प्रवेश आदि जैसे मांगलिक कार्यों के लिए एक शुभ दिन माना जाता है।
भगवान विष्णु की पूजा:
इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है।
शुभ योग:
भड़रिया नवमी पर सिद्ध और साध्य योग जैसे शुभ योग भी बनते हैं।
चतुर्मास:
भड़रिया नवमी के बाद चतुर्मास शुरू हो जाता है, जिसके दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है।

