मध्य प्रदेश

जिम्मेदार विभाग नहीं कर रहा जांच, लोग हो रहे बीमारियों का शिकार

बेखौफ जारी है मिलावट, किराना दुकानों का पंजीयन तक नहीं
अधिकारियों के आते ही बंद हो जाते हैं शटर

किराना व्यापारियों का सूचना तंत्र इतना मजबूत है कि, अधिकारियों के आने के पहले ही इन दुकानदारों को भनक लग जाती है और दुकानें बंद कर भाग जाते हैं। बीते लगभग 6 महीनों में जिला खाद्य अधिकारी कल्पना आर्य एवं उनकी टीम के द्वारा सिलवानी क्षेत्र का दौरा किया। लेकिन एक साथ आधा दर्जन दुकानों पर भी कार्रवाई नहीं की जा सकी।
सिलवानी । मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए सरकार ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम लागू कर भले ही ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाई हो, लेकिन आज भी सिलवानी क्षेत्र में तमाम किराना दुकानें ऐसी है। जहां पर मिलावटी खाद्य सामग्री धड़ल्ले से बेची जा रही है। खास बात यह है खाद्य पदार्थों के विक्रय के लिए खोली किराना दुकानों पर विभाग द्वारा जारी लाइसेंस होना चाहिए। लेकिन दर्जनों किराना दुकानों के लायसेंस तो दूर पंजीयन भी नहीं हैं। यही कारण है कि जैसे ही कोई अधिकारी इन किराना और खाद्य पदार्थ की दुकानों को जांच करने पहुंचते हैं तो दुकानदार शटर गिराकर भाग जाते हैं। इसके बाद जैसे ही अधिकारियों की वापसी होती है। किराना दुकानदार अपनी दुकानों को खोल लेते हैं।
सिलवानी क्षेत्र में सैकड़ों छोटी बड़ी किराना दुकानें हैं। इनमें दर्जनों दुकानें तो ऐसी हैं, जहां हर महीने 5 से 10 लाख रुपए तक की विभिन्न किराना सामग्री ग्राहकों और छोटे दुकानदारों को बेची जाती है। जानकारों की मानें तो ऐसी दुकानों पर नियमानुसार जीएसटी नंबर होना चाहिए। लेकिन बहुत कम दुकानों पर जीएसटी नंबर हैं। खाद्य विभाग के अधिकारियों की माने तो खाद्य सामग्री बेचे जाने के लिए नियमानुसार लाइसेंस और उद्योग विभाग का पंजीयन जरूरी है। लेकिन कई दुकानों पर लाइसेंस तो दूर पंजीयन तक नहीं है।
मिलावटी खाद्य सामग्री और खुला तेल बेचने पर पूरी तरह से रोक है। बावजूद इसके कई दुकानदार अमानक खाद्य सामग्री बेखौफ बेच रहे हैं। बीते दिनों खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने ईसागढ़ में एक दुकान से खुले तेल को जब्त भी किया था। लेकिन अभी भी कई किराना दुकानदार खुले तेल का चोरी छिपे विक्रय कर रहे हैं। इसके अलावा आटा, दाल, चावल सहित विभिन्न अमानक मसाले भी कई किराना दुकानों पर धड़ल्ले से बिक रहे हैं।
इस संबंध में कल्पना आर्य, खाद्य निरीक्षक का कहना हैं कि एक दुकान पर जैसे ही सैंपलिंग की कार्रवाई शुरू होती है। अन्य दुकानदारों को जानकारी लग जाती है और वह दुकानें बंद कर देते हैं। कलेक्टर के निर्देशन में मिलावट से मुक्ति अभियान समूचे जिले में चल रहा है।

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