सीता हरण का मंचन देख भावुक हुए दर्शक, राम-सुग्रीव मित्रता और बाली वध ने मोहा मन

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान। शारदेय नवरात्र के पावन अवसर पर तहसील क्षेत्र के ग्राम कौड़िया में भक्ति और आस्था का माहौल बना हुआ है। यहां आदर्श नव युवक रामलीला मंडल कौड़िया के तत्वावधान में प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार रामलीला का मंचन किया जा रहा है। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। मंचन देखने के लिए ग्रामीणों सहित आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। रामायण के प्रसंगों के जरिए कलाकार लोगों को धर्म, मर्यादा, कर्तव्य, मित्रता और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दे रहे हैं।
विगत दिवस शनिवार को रामलीला में सीता हरण, राम-सुग्रीव मित्रता और बाली वध सहित अनेक महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय से इन प्रसंगों को सजीव रूप देने का प्रयास किया। विशेष रूप से माता सीता के हरण के बाद भगवान श्रीराम के विरह और विलाप का दृश्य देखकर दर्शक भावुक हो उठे। पूरा रामलीला परिसर श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में डूबा नजर आया।
*शूर्पणखा के प्रसंग से शुरू हुई घटनाक्रम की कड़ी*
रामलीला के मंचन में दिखाया गया कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण पंचवटी में निवास कर रहे थे। इसी दौरान लंकापति रावण की बहन शूर्पणखा वहां पहुंचती है और भगवान श्रीराम के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखती है। भगवान श्रीराम द्वारा प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए जाने पर वह लक्ष्मण के पास जाती है। घटनाक्रम आगे बढ़ने पर शूर्पणखा आक्रामक हो जाती है, जिसके बाद लक्ष्मण उसकी नाक और कान काट देते हैं।
अपमानित शूर्पणखा रोती-बिलखती अपने भाइयों खर और दूषण के पास पहुंचती है और उन्हें पूरी घटना बताती है। इसके बाद खर-दूषण अपनी सेना के साथ भगवान श्रीराम से युद्ध करने पहुंचते हैं। भगवान श्रीराम युद्ध में खर-दूषण सहित उनकी विशाल सेना का संहार कर देते हैं। रामलीला में इन दृश्यों का प्रभावशाली मंचन किया गया, जिसे देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
*रावण ने मारीच की सहायता से किया माता सीता का हरण*
खर-दूषण के वध की जानकारी मिलने के बाद शूर्पणखा लंका पहुंचकर रावण को पूरी घटना सुनाती है। इसके बाद रावण माता सीता का हरण करने की योजना बनाता है और मारीच की सहायता लेता है। मारीच स्वर्ण मृग का रूप धारण कर पंचवटी पहुंचता है। स्वर्ण मृग को देखकर माता सीता भगवान श्रीराम से उसे लाने का आग्रह करती हैं। भगवान श्रीराम मृग के पीछे जाते हैं और घटनाक्रम के चलते लक्ष्मण भी कुटिया से दूर चले जाते हैं।
इसी अवसर का लाभ उठाकर रावण साधु का वेश धारण कर कुटिया पहुंचता है और छलपूर्वक माता सीता का हरण कर लेता है। इसके बाद वह उन्हें लंका ले जाकर अशोक वाटिका में रख देता है। माता सीता के हरण के बाद भगवान श्रीराम के व्याकुल होकर उन्हें खोजने और विलाप करने के दृश्य ने उपस्थित दर्शकों को भावुक कर दिया। कलाकारों की प्रस्तुति के माध्यम से रामायण के इस मार्मिक प्रसंग को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया।
*राम-सुग्रीव मित्रता और बाली वध ने दिया अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का संदेश*
रामलीला के अगले प्रसंग में भगवान श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता का मंचन किया गया। माता सीता की खोज के दौरान भगवान श्रीराम की सुग्रीव से भेंट होती है। दोनों एक-दूसरे की सहायता करने का संकल्प लेते हैं। सुग्रीव माता सीता की खोज में सहयोग करने का वचन देते हैं, वहीं भगवान श्रीराम सुग्रीव को उनके अधिकार वापस दिलाने का आश्वासन देते हैं।
इसके बाद बाली वध का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। मंचन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि अन्याय और अधर्म का अंत निश्चित है तथा धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष करना आवश्यक है। राम-सुग्रीव मित्रता के प्रसंग ने जहां सच्ची मित्रता और विश्वास की सीख दी, वहीं बाली वध के मंचन ने दर्शकों को धर्म और न्याय के महत्व से परिचित कराया।
*नवरात्र पर रामलीला से भक्तिमय हुआ माहौल*
शारदेय नवरात्र के अवसर पर आयोजित रामलीला ग्राम कौड़िया में धार्मिक उत्साह का केंद्र बनी हुई है। प्रतिदिन भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों का मंचन किया जा रहा है। रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
आयोजन के दौरान श्रद्धालु रामायण के प्रसंगों को ध्यानपूर्वक देखते हुए उनसे प्रेरणा ले रहे हैं। भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, माता सीता की मर्यादा, लक्ष्मण की सेवा भावना और धर्म के प्रति समर्पण जैसे प्रसंग लोगों को जीवन में सत्य एवं सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
*आज होगा सेतु बंध, रामेश्वर पूजा और अंगद-रावण संवाद का मंचन*
आदर्श नव युवक रामलीला मंडल कौड़िया द्वारा रविवार को रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। इसमें सेतु बंध, रामेश्वर पूजा, विभीषण शरणागति और अंगद-रावण संवाद सहित अन्य प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। इन प्रसंगों में भगवान श्रीराम की लंका विजय की तैयारी, भगवान शिव के प्रति उनकी श्रद्धा, विभीषण द्वारा धर्म का मार्ग चुनने तथा रावण की सभा में अंगद के संवाद को दर्शाया जाएगा।
आयोजक मंडल ने क्षेत्र के समस्त धर्मप्रेमी नागरिकों, श्रद्धालुओं और ग्रामीणों से अधिक से अधिक संख्या में रामलीला स्थल पर पहुंचने की अपील की है। साथ ही भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का श्रवण कर उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का आग्रह किया है।



