संतान सप्तमी पर महिलाओं ने की पूजा-अर्चना

संतान की दीर्घायु, कुशलता और उज्जवल भविष्य के लिए रखा व्रत
सिलवानी। संतान की सलामती, दीर्घायु और सुखद भविष्य की कामना को लेकर संतान सप्तमी के अवसर पर महिलाओं ने व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में माताओं ने अपनी संतान के लिए दिनभर उपवास रखकर भगवान से उनके उज्जवल भविष्य की प्रार्थना की।
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को संतान सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन माताएं पुत्र एवं पुत्री की दीर्घायु, कुशलता और सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं तथा पूजा-अर्चना कर संतान के मंगलमय जीवन की प्रार्थना करती हैं।
पंडित अभिषेक शास्त्री ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार द्वापर युग में देवकी ने भगवान श्रीकृष्ण और बलदाऊ की रक्षा एवं मंगलकामना के लिए संतान सप्तमी का व्रत किया था। तभी से इस व्रत की परंपरा चली आ रही है। मान्यता है कि संतान की कामना रखने वाली महिलाएं भी श्रद्धा और विश्वास के साथ यह व्रत करती हैं।
संतान सप्तमी के अवसर पर महिलाओं ने पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और अपनी संतान के स्वस्थ एवं उज्जवल भविष्य की कामना की।



