मां शक्ति के स्वरूप विराजमान पर्वतों से लेकर जंगलों में, मां शारदा कहो, कहो मां कंकाली

भक्तों के कष्ट निवारण करने वाली मां घट घट विराजमान
ब्यूरो चीफ : मनीष श्रीवास
जबलपुर। चैत्र नवरात्रि पर्व में दुर्गा मंदिरों सहित देवी दीवारों में जहां भक्ति की शक्ति में सभी ली है वही महा अष्टमी पूजा पर्व को लेकर शनिवार रविवार को मनाई जाएगी देखा जाए तो महाष्टमी पाव तिथि एवं माता के आठवें स्वरूप मां महागौरी की भक्ति भावना के साथ पूजा अर्चना के साथ-साथ माता रानी को आठवाई का प्रसाद सभी भक्तों के द्वारा माता को भेंट किया जाता है। ऐसा मानना है कि मां शारदा भवानी, मां कंकाली माई, मां दुर्गा मैया, मां खड़रा वाली माई , मां ज्वाला देवी, मां बूढ़ी खेर माई , मां पर्वत वासिनी, मां सिंग़ वाहिनी , मां ज्वाला देवी के अनेकों स्वरूपों में पूजा अर्चना की जा रही है।
नवरात्र पर्व के आठवें दिन का विशेष महत्व होता है। इस दिन को महा अष्टमी या दुर्गा अष्टमी भी कहा जाता है। 5 एवं 6 अप्रैल 2025, दिन शनिवार, रविवार को मां दुर्गा के आठवें स्वरूप की पूजा की जाएंगी। नवरात्रि की अष्टमी तिथि को मां दुर्गा के मां महागौरी स्वरूप की उपासना की जाती है। मां महागौरी का रंग पूर्णता गोरा होने के कारण ही इन्हें महागौरी या श्वेताम्बरधरा माता भी कहा जाता है। नवरात्रि की अष्टमी तिथि का विशेष महत्व होता है। इस दिन सभी घरों में दुर्गा पाठ, हवन, सहित कन्या पूजन भी करते हैं। मां महागौरी का रंग अंत्यत गोरा है। इनकी चार भुजाएं हैं और मां बैल की सवारी करती हैं। मां का स्वभाव शांत है। शास्त्रों के अनुसार, मां महागौरी की पूजा करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है।
महाष्टमी की विशेष पूजा – मां महागौरी की पूजा में नारियल, पान सुपारी, लौंग, लाइची, नींबू के साथ फल, पुष्प, मिष्ठान का भोग लगाकर माता की आरती करनी चाहिए। चैत्र नवरात्रि के नौ दिन बाद माता के हरे हरे ज्वारों का विसर्जन श्रद्धाभाव के साथ किया जायेगा।



