सांचेत में मां खेड़ापति माता मड़ में है प्राचीन मूर्ति श्री गणेश की

रिपोर्टर : सतीश मैथिल
सांचेत । कस्बा सांचेत में प्राचीन मां खेड़ापति माता मड़ अपने आप में इतिहास की कई कहानियों को समेटे हुए है। बड़ी बात तो यह है इतिहास की खूबसूरती में चार चांद लगाने में श्रीजी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिनका आशीर्वाद हर कोई ले रहा है। 100 साल के क़स्बा सांचेत निवासी देवी सिंह चौहान बाबू जी का कहना है सांचेत के मां खेड़ापति माता मड़ की भगवान गणेश की मूर्ति अपने आप में विशेष हैं।
ये मूर्तियां अलग-अलग जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों साल पहले जीर्णशीर्ण स्थिति में मिली थीं। कुछ तो विनाशकारियों द्वारा खंडित की गईं मूर्तियां हैं। मान्यता है श्री गणेश सुख समृद्धि के दाता हैं। यही कारण है किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले या फिर दुकान- मकान में प्रवेश करने से पहले श्री गणेश की मूर्ति को स्थापित किया जाता है। खेड़ापति माता मढ़ के पुजारी पंडित भीष्म महाराज का कहना है मां खेड़ापति माता मड़ में एक हजार साल पुरानी मूर्तियां हैं। जितनी भी मूर्तियां परिसर में नजर आती हैं, वे या तो खुदाई में मिली हैं या फिर जिले अथवा ग्रामीण क्षेत्रों में जीर्णशीर्ण स्थिति में मिलीं। कुछ मूर्तियों को गूजरी महल खंडित अवस्था में लाया गया। जब भी परिसर में बाहर से लोग आते हैं तो भगवान गणेश की कथाओं को सुनने में दिलचस्पी दिखाते हुए नजर आते हैं। इससे स्पष्ट होता है, दूर-दूर से आते हैं लोग और भारतीय संस्कृति और पंरपराओं के बारे में जानना चाहते हैं। यही हर हिंदुस्तानी की सबसे बड़ी कमाई है।
मंदिरों में विराजित श्रीजी का सालों पुराना इतिहासः ऐतिहासिक धरोहर के अलावा शहर में स्थित मंदिरों में विराजित श्रीजी का इतिहास भी सालों पुराना है। इनमें राजस्थान मेवाड़ से पांच सौ साल पहले लाई गई गणेश जी की मूर्ति, हर मन्नत पूरी करने वाले अर्जी वाले गणेश जी लगभग दो से तीन सौ साल पुराने गणेश जी शामिल है। बुधवार के साथ गणेश उत्सव के दौरान सांचेत ही नहीं, दूर-दराज के भक्त यहां पहुंचते हैं । इतिहासकारों ने गणेश उत्सव मनाने को लेकर बताया कि इसे लेकर कई कहानियां पढ़ने को मिलती हैं



