धार्मिकमध्य प्रदेश

जिसके पास चरित्र है, वही सर्वश्रेष्ठ है : जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज

डॉ रामाधार उपाध्याय ने शास्त्रीय जीवन जिया है : जगतगुरु रामभद्राचार्य जी
रिपोर्टर : राजकुमार रघुवंशी
सिलवानी । नगर के रघुकुल फार्म हाउस में शिववरण सिंह रघुवंशी एवं प्रशांत रघुवंशी के द्वारा पूज्य गुरुजी शिवलोक वासी डॉ रामाधार शर्मा जी की पुण्य स्मृति में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा आयोजन का शुभारंभ रविवार हो गया, जिसमें व्यासपीठ पर विराजमान परम पूज्य रामभद्राचार्य जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में चरित्र महत्वपूर्ण है और चरित्रवान व्यक्ति ही सबसे बड़ा ज्ञानी है, वही सबसे बड़ा पंडित है, जो दूसरे की पत्नी को अपनी माता के समान मानता है, वहीं सर्वश्रेष्ठ है। महाराज श्री ने कहा कि चरित्रवान व्यक्ति ही सभी व्यक्तियों में श्रेष्ठ होता है, जोकि दूसरे की पत्नी को अपनी माता के समान मानता है, और दूसरे के धन को मिट्टी के समान समझता है। वही बड़ा पवित्र व्यक्ति है। आगे पूज्य महाराज श्री ने कहा कि इस संसार में व्यक्ति अपने स्वार्थ में पढ़कर परमात्मा को भूला हुआ है। जबकि जीवन काल का सबसे बड़ा उद्देश्य, परमात्मा प्राप्ति है । उन परमात्मा की प्राप्ति में, अपने जीवन को लगाना और पूर्ण मर्यादा के साथ, अनुशासन में रहकर देव दुर्लभ मानव जीवन का सदुपयोग करना ही, सच्ची नैतिकता है। महाराज श्री ने कहा कि हम लोग बहुत सौभाग्यशाली हैं, कि हमारा जन्म सनातन संस्कृति में हुआ है और इसके बाद यह पुण्य भूमि भारत में हमें जीवन यापन करने का अवसर प्राप्त हुआ है । भारत हमारी जन्मभूमि है यही अपने आप में परमात्मा की बहुत बड़ी कृपा है।
महाराज श्री ने कहा कि व्यक्ति को चाहिए कि, मानव मात्र के प्रति दया और करुणा का भाव अपने मन में जागृत रखें, मानव सेवा से बड़ा कार्य नहीं है । इस बात को वह ध्यान में रखते हुए मानव सेवा करके प्रभु का चिंतन करता रहे। प्रभु के भजन से परमात्मा की उसे प्राप्ति हो जाएगी । कथा के उपरांत आयोजक शिव वरण सिंह रघुवंशी ने धर्म प्रेमी सज्जनों से प्रतिदिन कथा में सम्मिलित होने आग्रह किया है। कथा प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से सायं 6 बजे होगी।
डॉ रामाधार उपाध्याय ने शास्त्रीय जीवन जिया है : जगतगुरु रामभद्राचार्य जी
साकेतवासी डॉक्टर रामाधार शर्मा जी की पुण्य स्मृति में बोलते हुए भावुक हुए जगत गुरु। बोले मृत्यु तो एक दिन आनी सब को है। बस कर्म धर्म करते जावे भजन करते जावे।
डाक्टर रामाधार उपाध्याय जी सूक्षम शरीर से हमारे साथ है। आचार्य जी की स्मृति में भावकु हुए जगतगुरु राम भद्राचार्य जी और सभी कथा पंडाल में बैठे धर्म प्रेमी बंधुओ की आंखे नम हो गई जगतगुरु ने कहा की श्री आचार्य जी ने हमेशा शास्त्र जीवन जिया धर्म पूर्व जीवन निर्वाह किया कभी धर्म से नही हटे। जगतगुरु रामभद्राचार्य जी ने कहा की हम रामाधार उपाध्याय जी को तो नही ला सकते पर वचन देते है हम रामकृपालु जी पर सदेव आशीर्वाद रहेगा। गुरु जी ने कहा की गृहस्थ जीवन का बड़े ही धर्म और सरलता पूर्वक आचार्य जीवन जिया है। डॉक्टर रामाधार जी आज श्रवनीय है।

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