मध्य प्रदेश

16 साल बाद भी लोगों के दिलों में जिंदा है रफीक खान : सलीम खान

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । सियासी रहनुमा स्वर्गीय मो. रफ़ीक ख़ान घड़ी साज जो कि वार्ड नंबर 9 से पार्षद चुने गए थे 7 जून 2007 को इस फानी दुनिया को अलविदा कह गए। आप सिरोंज के रहने वाले थे लेकिन बेगमगंज में सियासत के क्षेत्र में अपना एक अलग मुकाम रखते थे। मसाजिद कमेटी भोपाल के जरिए आपको जिले का सदस्य भी बनाया गया था। इस्लाहे मिलत कमेटी के आप सरपरस्त भी थे। शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के सभी वर्गों के लोगों में आपकी खासी पहचान थी आपको लोग नेता जी के नाम से जानते थे। कई विषम परिस्थितियों में आप ने साहस का परिचय देकर नगर की गंगा जमुनी तहजीब को बरकरार रखने में अहम किरदार अदा किया। आपको हम सब से बिछड़े हुए 16 साल हो गए लेकिन ऐसा लगता है जैसे अभी कल ही की बात है आज भी आप लोगों के दिलों में जिंदा है।
पूर्व पार्षद स्वर्गीय रफीक खान की 16वीं बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में रिटायर्ड शिक्षक एवं पत्रकार मो. सलीम खान ने उक्त बात कहते हुए उनके द्वारा किए गए कार्यों का बखान किया ।
वरिष्ठ पत्रकार सईद नादां एडवोकेट, एवं प्रसिद्ध शायर सैयद आबिद हुसैन तालिब ने स्वर्गीय रफीक खान के राजनैतिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जब नगर में जलावर्धन योजना से पहले पेयजल संकट गर्मियों के मौसम में गहराता था तो नगरपालिका टैंकरों से पानी सप्लाई करती थी तब रात को जाग कर पर्ची के हिसाब से हर एक घर पानी पहुंचाने का कार्य आपके द्वारा सफलतापूर्वक किया जाना एक सराहनीय कदम था। जरूरतमंदो की मदद करना, और विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में आपकी भागीदारी महत्वपूर्ण किरदार अदा करती थी, स्वर्गीय रफीक खान की सूझबूझ और तुरंत निर्णय लेने की क्षमता उनके व्यक्तित्व को और अधिक निखारती थी।
इस अवसर पर रफीक नवाब प्रिंस, शारिक शाह खान, रफीक मंसूरी, मो. बाबर खां, हाफिज मो. इलयास, मुन्ना अली दाना, डॉ नसीम अली, नोमान साबिरी, सईद अली टेलर, नसीम नवाब, हनीफ मुंशी, शेख फाजिल, हाजी नफीस नवाब, हाजी फिरोज खां, हाजी टेलर, हाजी मियां, अब्दुस सलाम खान, अनवार खां राईन, लतीफ कुरेशी, हाजी इरफान खान, एहफाज सौदागर,
नईम खान, छोटे मुन्ना अली दाना, हाजी मुस्ताक खान, शब्बीर अहमद पत्रकार सहित उपस्थित वक्ताओं, सामाजिक संस्था इस्लाहे मिल्लत कमेटी, अल खैर ह्यूमन वेलफेयर सोसाइटी, नगर मंसूरी समाज संगठन, कैफ बज्में अदब, आदि ने शिद्दत के साथ याद करते हुए खिराजे अकीदत पेश की।

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