प्रतिबंध के बाद भी पॉलीथिन की खपत, आदत से मजबूर : थैला लेकर ग्राहक जाते नहीं, पॉलीथिन न मिले तो रास्ता बदल देते हैं
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन। सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंध के बाद भी शहर में प्लास्टिक की खपत कम नहीं हुई है। गली-गली से लेकर छोटी दुकानों तक में सामान लेने पर तत्काल पॉलीथिन में मिल जा रहा है। पॉलीथिन का उपयोग रोकने के लिए प्रशासन और नगर पालिका परिषद रायसेन ने छापेमारी की। जिला प्रशासन ने अमानक पॉलीथिन का उपयोग पर रासुका जैसी कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी। इसके बाद भी ग्राहकों से लेकर दुकानदारों की आदतों में बदलाव नहीं आ रहा।
शहर के दुकानदार बोले-कारोबार होता है प्रभावित, ग्राहक थैला लेकर आएं तो सब ठीक हो जाए….
दुकानदार से पन्नी में सब्जी लेकर जाता ग्राहक….
पशुओं की मौत का बड़ा कारण
सिंगल यूज पॉलीथिन के हजारों नुकसान हैं। चिंताजनक बात यह है कि पॉलीथिन में कचरा फेंका जाता है। कचरे के ढेर पर मवेशी भी पहुंचते हैं।रायसेन शहर में कई बार यह बात सामने आई कि मवेशियों के पेट में पॉलीथिन जमा होने से वह बीमार हो गए। कई की मौत भी हो जाती है। जानकारों का कहना है कि पॉलीथिन पर प्रतिबंध तभी सम्भव है, जब इसके थोक व्यापारी इच्छाशक्ति दिखाएं। उन पर कार्रवाई इसलिए भी नहीं हो पाती।क्योंकि कोई भी वर्ग जागरुकता नहीं दिखा रहा। ऐसे में थोक व्यापारियों के बारे में सूचना नहीं मिलती।जिला प्रशासन पर भी मिलीभगत और अनदेखी करने का आरोप लगता है।
गौरीशंकर राय किराना व्यापारी
लोगों को थैला लेकर चलने में और कपडे के थैले से छोटे दुकानदारों को परहेज है। प्रशासन प्रतिबंध के बाद अमानक पॉलीथिन के शहर में आने का सोर्स पता नहीं कर पा रहा है।
पॉलीथिन प्रतिबंध की घोषणा के बाद दो तीन दिन इसका असर दिखा। इसके बाद प्रशासन की सुस्ती हुई, तो जांच भी ठप हो गई। फुटकर सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि पॉलीथिन में सब्जी नहीं देने पर ग्राहक उनके यहां आते ही नहीं। पॉलीथिन नहीं देने पर उनकी ग्राहकी कम हो रही है, तो नियम-कानून भूल गए। दुकानदारों का यह भी कहना था कि ग्राहक थैला लेकर आएगा, तो उसे जबरन पॉलीथिन नहीं देंगे। कुछ दुकानदारों ने सवाल किया कि प्रतिबंध लगा है, तो शहर में इतनी पॉलीथिन मिल कहां से रही है? किसी भी दुकान पर पॉलीथिन नहीं मिलेगी। तब ग्राहक मजबूरी में थैला लेकर ही आएगा।



