आज का पंचांग आज का पंचांग मंगलवार, 30 जनवरी 2024
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 30 जनवरी 2024
30 जनवरी 2024 दिन माघ मास मंगलवार को पञ्चमी तिथि है। आज कंबल, रत्न, कपड़े, कुर्ता, चादर, रुमाल, कमीज एवं टोपी आदि दान करने का बहुत ही महत्व होता है। आप सभी देशवासियों को “भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी” के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि – कोटि नमन।।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
⛈️ मास – माघ मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार माघ माह के कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि 08:54 AM तक उपरांत पंचमी
📝 तिथि स्वामी – पंचमी तिथि के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 10:06 PM तक उपरांत हस्त
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र का स्वामी सूर्य है।उत्तराफाल्गुनी के देवता अर्यमा होते हैं।
📣 योग – अतिगण्ड योग 10:42 AM तक, उसके बाद सुकर्मा योग
⚡ प्रथम करण : बालव – 08:54 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : कौलव – 10:16 पी एम तक तैतिल
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:13 बजे से 16:35 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:36:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:24:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:25 ए एम से 06:18 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:51 ए एम से 07:11 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:13 पी एम से 12:56 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:22 पी एम से 03:06 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:56 पी एम से 06:22 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:58 पी एम से 07:17 पी एम
💧 अमृत काल : 01:57 पी एम से 03:46 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:08 ए एम, जनवरी 31 से 01:01 ए एम, जनवरी 31
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-हनुमान मंदिर में लाल ध्वजा चढ़ाकर पंचमुखा दीपक प्रज्वलित करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सूतिका स्नान, भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पुण्यतिथि, बलिदान दिवस, विश्व कुष्ठ रोग दिवस, हरित क्रांति के पिता” सी. सुब्रह्मण्यम जयन्ती, शहीद दिवस, सर्वोदय दिवस, नशामुक्ति संकल्प और शपथ दिवस, शोक दिवस, तीसरा विश्व उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग दिवस।
✍🏼 विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
खिड़की ना रखें खुली अगर आपके प्रोफेशनल काम बनते-बनते बिगड़ रहे हैं तो हो सकता है कि आपके जीवन में भूमि तत्व की कमी हो। ऐसा आमतौर पर तब होता है, जब व्यक्ति ऐसी किसी जगह पर बैठकर काम करता है, जहां उसके पीछे खिड़की खुली होती है। इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि आप अपनी चेयर के पीछे की खिड़की(घर की खिड़कियों से जुड़े वास्तु टिप्स) को बंद रखें। अगर संभव हो तो वहां पर भारी परदों का इस्तेमाल करें। आप चाहें तो वहां पर अपनी भारी बुकशेल्फ आदि भी बनवा सकती हैं।
पोस्टर व पेंटिंग को करें चेक कई बार ऐसा भी होता है कि आप जहां बैठी होती है, आपके ठीक सामने कोई भारी शोपीस होता है। इसके अलावा, पूर्व या उत्तर की दीवार पर किसी भारी चीज जैसे ऊंचे- ऊंचे चट्टान के पोस्टर या पेंटिंग टंगी होती है। इससे भी काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं। इसलिए आज भी आप इसे चेक करें। अगर ऐसा है तो इसे तुरंत वहां से हटा दें।
▶️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
तुलसी – जिस घर में रोज़ तुलसी के पौधे की पूजा होती है, देवी लक्ष्मी उस घर को छोड़कर कहीं नहीं जाती। वहां हमेशा सुख-समृधि बनी रहती है।
पीपल – हिन्दू धर्म में पीपल को पूजनीय वृक्ष माना गया है। इसकी पूजा करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है, साथ ही भगवान विष्णु की कृपा भी प्राप्त होती है।
नीम – इसकी पूजा करने से कुंडली के सभी दोष दूर होते हैं व रोगों से छुटकारा भी मिलता है। परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
बरगद – इसे बड़ व वट वृक्ष भी कहते है। इसकी पूजा से महिलाओं का सौभाग्य अखंड रहता हैं व संतान संबंधी समस्याएं भी दूर होती है। ये बहुत ही पवित्र पेड़ है।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
सर्दी-जुकाम का घरेलू उपचार तो चलिए आज हम इसी विषय पर बात करते हैं, और आपको बताते हैं कुछ ऐसे घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपचार, जिन्हें आप कभी भी, किसी भी मौसम में इस्तेमाल कर सकते हैं, और सर्दी जुकाम से छुटकारा पा सकते हैं।
गुड़ और हल्दी सर्दी खांसी के लिए सर्दी, खांसी, होने पर गुड़ और हल्दी को अच्छी तरह से मिलाकर गोली बना लें, (25 ग्राम गुड़ में 5 ग्राम हल्दी) अब रात में सोने से पहले उस गोली को खाएं, लेकिन उसे खाने के बाद पानी नहीं पीना है। दांतों को साफ करने के लिए पानी का इस्तेमाल कर सकते हैं। गुड़ और हल्दी का ये मिश्रण सर्दी खांसी के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
सर्दी खांसी के लिए अदरक और शहद ये बात तो आप जानते हैं कि, अदरक की तासीर बहुत गर्म होती है, लेकिन यह कम लोग ही जानते होंगे कि अदरक वायरल इन्फेक्शन से लड़ने में बहुत मददगार होता है, इसका इस्तेमाल करने के लिए पहले अदरक के एक छोटे पीस को बारीक कर लें, अब उसे आधा गिलास पानी में डालकर उबालें, जब पानी एक कप की मात्रा में बचे, तब उसे एक कप में छान लें, अब उसे थोड़ा ठंडा होने दें, इस कुनकुने पानी में एक चम्मच शहद डालकर अच्छी तरह से मिलाएं, अब इसे चाय की तरह से दिन में दो से तीन बार पीने से सर्दी खांसी में आराम मिलता है।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
अंतःकरण को बाहरी सूचनाएँ पाँच ज्ञान इंद्रियों के माध्यम से प्राप्त होती हैं।
पाँच ज्ञान इंद्रियाँ, उनके संलग्न अंग (करण) तथा उनके मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:-
घ्राण — नाक (सूंघना), रसना — जिह्वा (स्वाद लेना), चक्षु — नेत्र (देखना), त्वक् — त्वचा (स्पर्श अनुभूति)’ श्रोत्र — कान (सुनना)
हमारे अंतःकरण के चारों विभागों की आंतरिक क्रियाएँ बाहर से नज़र नहीं आतीं। बाहर से तो शरीर के अंग ही कार्य करते नज़र आते हैं।
सर्वप्रथम हमारी बाह्य ज्ञान इंद्रियाँ अंतःकरण के मन विभाग को बाह्य जानकरियाँ (ज्ञान) अनुभूत कराती हैं।
मन विभाग ज्ञान इंद्रियों से प्राप्त सूचनाओं के साथ अपनी प्रवृत्ति (इच्छा) जोड़कर उन्हें बुद्धि विभाग को भेजता है।
चित्त विभाग में कम्प्यूटर की मेमरी के अनुरूप पिछली क्रियाओं, अनुभवों और जन्म जन्मांतरों के संस्कारों के आधार पर कुछ जानकरियाँ और ज्ञान पहले से ही दर्ज होता है।
मन विभाग से प्राप्त ताज़ा जानकरियों और चित्त विभाग में पहले से ही दर्ज जानकारियों, ज्ञान और अनुभवों की सहायता से बुद्धि विभाग विवेक क्रिया द्वारा निर्णय करता है कि मन की इच्छा परिस्थितियों के अनुसार कैसे और किस हद तक पूरी करनी है।
बुद्धि द्वारा लिए गए निर्णय को अहंकार विभाग पाँच कर्मेंद्रियों में से किसी एक या अधिक कर्मेंद्रियों द्वारा उनकी क्षमता के अनुसार कार्यान्वित करवाता है।
पांच कर्मेंद्रियां हैं — हाथ, पैर, मुंह, गुदा और जननेंद्रिय।
आप ने जान ही लिया होगा कि सामान्य मान्यता से हट कर यहाँ अहंकार का अर्थ घमंड न होकर, अंतःकरण का कार्यकारी विभाग है। और यह भी कि अंतःकरण हृदय का नहीं बल्कि मस्तिष्क का घटक है, जो हमारे सिर के ऊपरी हिस्से में स्थित है। मस्तिष्क द्वारा किसी भी संवेदन शील जानकारी के प्राप्त होने पर हृदय के स्पंदन पर शिराओं के माध्यम से तत्काल पड़ने वाले प्रभाव के कारण हम अक्सर अंतःकरण को हृदय का हिस्सा मानते हैं।
𖡼•┄•𖣥𖣔𖣥•┄•𖡼 🙏🏻𖡼•┄•𖣥𖣔𖣥•┄•𖡼
⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।
पञ्चमी तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति गुणवान होता है। इस तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह माता पिता की सेवा को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म समझता है। इनके व्यवहार में उत्तम श्रेणी का एक सामाजिक व्यक्ति दिखाई देता है। इनके स्वभाव में उदारता और दानशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। ये हर प्रकार के सांसारिक भोग का आनन्द लेते हैं और धन धान्य से परिपूर्ण जीवन का आनंद उठाते हैं।

