मध्य प्रदेश

लाखों के गबन मामले में जिपं सीईओ ने लिया संज्ञानग्राम पंचायत परसेल का मामला

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत परसेल में हुये लाखों रूपये के घोटाले मामले में अब जिला पंचायत सीईओ ने संज्ञान लिया जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। साथ ही जिला पंचायत सीईओ के द्वारा इस संबंध में जनपद सीईओ ढीमरखेड़ा से रिकार्ड भी तलब किया गया।
स्मरण रहे कि ग्राम पंचायत परसेल सरपंच राजेन्द्र खरे और सचिव कमलेश हल्दकार के द्वारा लाखों रूपये का गबन किया गया। इस मामले की शिकायत ग्रामीणों द्वारा विभिन्न अधिकारियों को की गई इसके बाद भी ग्रामीणों की शिकायत पर किसी तरह की कोई कार्यवाही नही की गई थी। लिहाजा पिछले दिनों इस संबंध में मृगांचल एक्स्प्रेस ने प्रमुखता के साथ उक्त लाखों रूपये के घोटाले मामले को उठाया जिसमें जिला पंचायत सीईओ शिशिर गेमावत के द्वारा उक्त मामले में जांच के निर्देश जारी किये है ।
इस मामले में ग्रामीणों ने बताया था कि जब से सरपंच राजेन्द्र खरे सरपंच बने है गांव के हाल-बेहाल है और शासन की योजनाओं से भी ग्रामीण वंचित हो रहे है। साथ ही वर्ष 2020-21 में पूर्व सरपंच के समय स्वीकृत बड़ी माई सामुदायिक भवन राशि 13 लाख मनरेगा कन्वरजेंशन की प्राथमिक राशि 5 लाख रूपये स्वीकृत किये गये थे । एक वर्ष पहले प्राथमिक निर्माण कार्य किया गया लेकिन कार्य पूर्ण हुये बिना की संपूर्ण राशि आहरित कर ली गई जबकि मौके पर आज भी उक्त काम अधूरा पड़ा है।
जिपं सदस्य के द्वारा दी गई राशि भी गटक गये
ग्राम पंचायत परसेल के कारनामा यही तक नहीं है बल्कि जिला पंचायत सदस्य के द्वारा ग्राम विकास के लिये पंचायत को 16 लाख रूपये की राशि दी गई थी जिसमें सरपंच और सचिव के द्वारा 16 लाख रूपये की राशि का भी बंदरबांट कर लिया गया है।
भेजा गया नोटिस
पिछले दिनों मृगांचल एक्स्प्रेस के द्वारा सरपंच राजेन्द्र खरे के द्वारा किये गये लाखों रूपये के भ्रष्टाचार के संबंध में प्रमुखता के साथ समाचार प्रकाशित किया गया था जिससे परेशान होकर राजेन्द्र खरे के द्वारा खुद को पत्रकार बताकर सुदर्शन टुडे अखबार में खुद के नाम से तथ्यहीन एवं अशोभनीय शब्दों का उपयोग कर एवं स्थानीय पत्रकार पर गंभीर आरोप लगाकर झूठे समाचार का प्रकाशन किया गया । लिहाजा इस मामले में एक विधिक नोटिस अंतर्गत धारा-499/500 भारतीय दंड विधान का सुदर्शन टुडे के संपादक रवि साहू भोपाल एवं तथाकथित पत्रकार राजेन्द्र खरे को प्रेषित किया गया है। यहां पर यह भी उल्लेखनीय है कि राजेन्द्र खरे जो ग्राम पंचायत परसेल का सरपंच है और खुद को पत्रकार भी बताता है जब कि म.प्र.ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 में वर्णित विधि के अनुसार कोई भी प्रतिनिधि निर्वाचित होने के उपरांत ऐसे कार्य नहीं कर सकता है और प्रावधानों के अनुक्रम में यह वर्जित है। बावजूद इसके खुद को पत्रकार बताने के संबंध में जिला जनसंपर्क अधिकारी कटनी से भी जानकारी भी मांगी गई है।
फर्जी पत्रकार की भरमार
हाथ में किसी यूटयूब चैनल का माईक, गाड़ी में लिखा प्रेस, बात करने का ज्ञान नहीं, डिग्री का पता नहीं और साहब बन गये पत्रकार……… इसके बाद चालू होता है ब्लेक मेलिंग का काम। ऐसे तथाकथित पत्रकार की भरमार इन दिनों ढीमरखेड़ा तहसील में देखने को मिल रही है। ये ऐसे पत्रकार है जिनका न तो जनसंपर्क कार्यालय कटनी में नाम है और न ही किसी अखबार से संबंध रखते है बावजूद इसके अपने आप पत्रकार का तामगा देकर पत्रकारिता की धौंस दिखाते है। जिस तरह की कार्यवाही विगत वर्ष जबलपुर में पुलिस द्वारा की गई थी ऐसी ही कार्यवाही की जरूरत अब कटनी जिले में अत्यंत आवश्यक हो गई है। चूंकि फर्जी पत्रकारों का पत्रकारिता जैसे निष्पक्ष पेशे से कोई तालुक नहीं है यह मात्र ब्लेक मेलिंग का जरिया है।
जनपद अध्यक्ष ने सौंपा ज्ञापन
सरपंच राजेन्द्र खरे के द्वारा की गई व्यापक पैमाने पर अनियमित्ता को लेकर जनपद अध्यक्ष ढीमरखेड़ा सुनीता संतोष दुबे के द्वारा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है साथ ही विगत दिवस नवभारत पत्रकार पर जो मनगढ़त आरोप लगाये गये है उसे भी नकारा गया है। उन्होंने अपने पत्र में बताया कि मैं निरंतर रूप से क्षेत्र का भ्रमण करती हूं लेकिन कभी भी मेरे समक्ष इस तरह की बात सामने नहीं आई है जिस तरह के आरोप लगाये गये है वह अशोभनीय और निराधार है।

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