सभी विभागों में तीन सौ दिवस अर्जित अवकाश, शिक्षकों को छोड़ा
शिक्षक बोले दीवाली – दशहरा ग्रीष्म अवकाश पर
भोपाल। अर्जित अवकाशों से संबंधित आदेशों में शिक्षकों को छोड़ने से विभाग की व्यवस्था को सवालों के घेरे में लाया गया है। शिक्षकों का कहना है कि अन्य विभागों में तीन सौ दिन के लिए यह छुट्टियां निर्धारित कर दी गई हैं, लेकिन शिक्षा विभाग ने टीचरों के लिए यह सुविधा नहीं बनाई है।
मप्र समग्र शिक्षक संघ के प्रान्तीय महामन्त्री नरेन्द्र दुबे का कहना है कि प्रदेश के सभी विभागों में 300 दिवस के अर्जित अवकाश के नगदीकरण प्रावधान के आदेश प्रदेश शासन ने जारी किए है। पर शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को इससे अलग कर दिया गया है। जबकि सभी विभागों में द्वितीय और तृतीय शनिवार अवकाश रहता है। स्कूलों में कोई अवकाश नही होता है। कभी शिक्षा विभाग में 24 दिन दशहरा दीपावली अवकाश, 7 दिन शीत कालीन अवकाश और 61 दिन ग्रीष्मावकाश हुआ करता था। अब दशहरा दीपावली, शीतकालीन अवकाश अन्य विभागों के समान हो चुके हैं। ग्रीष्मावकाश 30-35 दिन कर दिया है। इस तरह अन्य विभाग के कर्मचारियों और शिक्षकों के अवकाश में कोई अंतर नहीं हैं। लगभग सबको समान अवकाश ही मिल रहे है।
वर्ष 1992 से शुरू हुआ था का क्रम :- संगठन के संरक्षक मुरारीलाल सोनी कहते हैं कि 1992 में इस अवकाश कटौती पर 10 दिन अर्जित अवकाश की पात्रता प्रदान की गई थी। उसे भी वर्ष 2000 में निरस्त कर दिया गया। साथ ही 2008 से शिक्षक वर्ग को मुख्यालय छोड़ने की अनुमति ही नहीं दी गई हैं। जब व्यक्ति मुख्यालय पर है तो 15 दिन प्रति वर्ष के अवकाश की पात्रता स्वमेव बन जाती है। इस तरह हर एक शिक्षक के सेवा अभिलेख में 300 दिन अवकाश संधारित हो सकते है। यदि नही किये हैं तो यह विभाग की गलती है। क्योंकि सेवा अभिलेख विभाग के आहरण संवितरण अधिकारी के पास होते है। यदि कलेक्टर या विभाग प्रमुख से सत्यापन कराना है, तो वह भी सम्बंधित अधिकारी का दायित्व है। शिक्षक का कार्य सिर्फ अपने कर्तव्यों के पालन की जिम्मेदारी है। जो उन्होंने हर समय पूर्ण कर्तव्य निष्ठा से की है, पर अवकाश नहीं दिए।
वर्ष 2009 से ज्यादा बिगड़ती गई बात संगठन के सचिव संजय तिवारी कहते हैं कि वर्ष 2009 से राज्य शिक्षा केन्द्र ने सबसे ज्यादा सुविधाएं छीनी। उन्होंने बताया कि कोई अवकाश दिवस हो या रविवार राज्य शिक्षा केंद्र के अधीन अमला कभी भी कोई भी जानकारी के लिए शिक्षक को तलब कर लिया करता है। जबकि शिक्षकों के भी अपने परिवार हैं। सामाजिक सरोकार हैं, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
आपस में लड़कर फजीहत करवा रहे संघ
गुरुजी अध्यापक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष राकेश पटेल कहते हैं कि शिक्षकों के संगठन आपस में लड़ रहे हैं। जिससे एक ओर फजीहत हो रही है दूसरी तरफ विभाग भी इसका फायदा उठा रहा है। पटेल का कहना है कि संगठन प्रदेश के शिक्षकों के लिए कम, जबकि स्वयं के स्वार्थों के लिए ज्यादा मेहनत कर रहे हैं। संगठनों की आड़ में ज्यादातर संघ अपने निजी काम करवा रहे हैं। जिसका नुकसान हजारों शिक्षकों को उठाना पड़ रहा है।



