Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 25 अगस्त 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 25 अगस्त 2025
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352 प्रारम्भ
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – भाद्रपद मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – सोमवार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि 12:35 PM तक उपरांत तृतीया
✏️ तिथि स्वामी – द्वितीया तिथि के देवता हैं ब्रह्मा। इस तिथि में ब्रह्मा की पूजा करने से मनुष्य विद्याओं में पारंगत होता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 03:49 AM तक उपरांत हस्त
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। उत्तराफाल्गुनी के देवता अर्यमा होते हैं।आर्यमन (आदिति के 12 पुत्रों में से एक है।
⚜️ योग – सिद्ध योग 12:06 PM तक, उसके बाद साध्य योग
⚡ प्रथम करण : कौलव – 12:34 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : तैतिल – 01:10 ए एम, अगस्त 26 तक गर
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:38:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:22:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:27 ए एम से 05:11 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:49 ए एम से 05:56 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:57 ए एम से 12:49 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:32 पी एम से 03:24 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:50 पी एम से 07:12 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:50 पी एम से 07:57 पी एम
💧 अमृत काल : 08:06 पी एम से 09:49 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:01 ए एम, अगस्त 26 से 12:45 ए एम, अगस्त 26
❄️ रवि योग : 03:50 ए एम, अगस्त 26 से 05:56 ए एम, अगस्त 26
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-गणेश मंदिर में सफेद तिल के मोदक अर्पित करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/वराह जयंती/ मुस्लिम रवि – चल – अव्वल मासारंभ/ राष्ट्रीय केला विभाजन दिवस, राष्ट्रीय चुंबन, श्रृंगार दिवस, अभिनेता राजीव राज कपूर जन्म दिवस, महान संत श्रीमंत शंकरदेव पुण्य तिथि, भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट जन्म दिवस, विवेक कुमार अग्निहोत्री – आई.ए.एस. जन्म दिवस, राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा, उरुग्वे स्वतंत्रता दिवस, राष्ट्रसेवी हरिभाऊ उपाध्याय स्मृति दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी को बताया गया है। यह द्वितीया तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।।
🪴 Vastu tips_ 🎋
मनी प्लांट को घर में रखने के वास्तु नियम
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार मनी प्लांट को उत्तर दिशा में रखना शुभ होता है। अगर मुख्य द्वार इस दिशा में हो तो वहीं आपको मनी प्लांट लगाना चाहिए। अगर इस दिशा में मुख्य द्वार न हो तो घर की उत्तर दिशा वाली खिड़की या दरवाजे के पास भी आप मनी प्लांट रख सकते हैं।
मनी प्लांट को घर में लगाते समय इस बात का ख्याल रखें की उसकी बेल ऊपर की ओर जाए। इसके लिए उचित व्यवस्था आपको मनी प्लांट के पास करनी चाहिए।
गलती से भी मनी प्लांट के मुरझाने के बाद इसको घर में न रखें ऐसा करने से धन की बर्बादी हो सकती है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
दिमाग रहेगा हेल्दी इसके लिए रोजाना कुछ देर एक्सरसाइज जरूर करें। खाने में बैलेंस डाइट लें और तनाव से दूर रहें। म्यूजिक सुनें और अच्छी नींद लें। खाने में अखरोट, बादाम, काजू, अलसी और कद्दू के बीज शामिल करें। रोजाना एलोवेरा, गिलोय और अश्वगंधा का जूस पीएं।अंकुरित अन्न खाएं, हरी सब्जियां खाएं और लौकी खाना फायदेमंद होगा। बादाम रोगन दूध में डालकर पीएं, बादाम रोगन नाक में डालें, बादाम-अखरोट पीसकर खाएं।
अच्छी नींद कैसे आए इसके लिए हल्का खाना खाएं। ताजा खाना ही खाएं और तले-भुने खाने से परहेज करें। नींद के लिए रोजाना 5-6 लीटर पानी पीएं और कुछ वर्क आउट जरूर करें। रोजाना जीरा, धनिया, मेथी, अजवाइन एक-एक चम्मच लें। इसे एक गिलास पानी में डाल दें। रात में पानी में भिगो दें और सुबह खाली पेट पीएं। लगातार 11 दिन तक इस पानी को पीएं।
🍷 आरोग्य संजीवनी 🍶
घुटनों का दर्द और अस्थि भंग : बबूल के बीजों को पीसकर तीन दिन तक शहद के साथ लेने से घुटनों के दर्द और अस्थि भंग दूर हो जाता है और हडि्डयां वज्र के समान मजबूत हो जाती हैं। घुटनों में चिकनाई आजाती है जिन्हें डॉक्टर ने घुटनों के रिप्लेसमेंट की बोल दिया उनको भी यह ठीक करने का सामर्थ्य रखते है।
टूटी हड्डी जल्द जोड़ने के लिए : बबूल की फलियों का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप से सेवन करने से टूटी हड्डी जल्द ही जुड़ जाती है। यह उपाय बहुत की प्रभावी और कारगर है।
दांत का दर्द : बबूल की फली के छिलके और बादाम के छिलके की राख में नमक मिलाकर मंजन करने से दांत का दर्द दूर हो जाता है।
पेशाब का अधिक मात्रा में आना : बबूल की कच्ची फली को छाया में सुखाकर उसे घी में तलकर पाउडर बना लें। इस पाउडर की 3-3 ग्राम मात्रा रोजाना सेवन करने से पेशाब का ज्यादा आना बंद होता है।
शारीरिक शक्ति और कमज़ोरी मिटाएँ : बबूल की फलियों को छाया में सुखा लें और इसमें बराबर की मात्रा मे मिश्री मिलाकर पीस लेते हैं। इसे एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप से पानी के साथ सेवन से करने से शारीरिक शक्ति में इज़ाफ़ा होता है और सभी कमज़ोरी वाले रोग दूर हो जाते हैं।
📖 गुरु भक्ति योग_ 🕯️
एक गुरू जी के दो चेले थे। साथ ही रहते, साथ ही खाते। चेले क्या थे बवाल ही थे। “काम के ना काज के। दुश्मन अनाज के॥”
एक बार सर्दियों की आधी रात को गजब की वर्षा आई। बाहर ही बंधी गाय भीगी तो रंभाने लगी। गुरू जी की नींद टूट गई, चेलों से कहा- चेला! जाओ गाय खोल कर भीतर ले आओ। दोनों एक स्वर में बोले- गुरू जी! जो खुद बंधा हो, वह दूसरे को मुक्त कैसे करे? बंधन खोलना तो आप जैसे मुक्त महापुरुषों का काम है।
गुरू जी स्वयं ही उठे। गाय का बंधन खोल भीतर ले आए। शरीर सुखा कर, गुरू जी लेटे और विचार करने लगे कि कैसे इन्हें बदला जाए। अगली सुबह, गुरू जी रोज की ही तरह पूजा करने के लिए अपने तख्त पर बैठ गए। पूजा शुरू की तो बोले- ओह! तुलसी के पत्ते लाना तो मैं भूल ही गया। चेला! जाओ बाहर से तुलसी के दो पत्ते ले आओ।
अब सुबह का वक्त था, हलकी बूंदाबाँदी अभी भी हो रही थी और ठंड कड़ाके की थी। तुलसी का पौधा लगा था बगीचे के अंतिम छोर पर। दोनों चेले पहले ही कंबल औढ़े दाँत किटकिटा रहे थे, तुलसी के पत्ते कौन लाता? और दोनों एक से बढ़कर एक चालाक और कामचोर।
पहला बोला- गुरू जी! तुलसी का पौधा कैसा होता है मैं नहीं जानता। आप पहचान बता दें तो मैं ले आऊँ। गुरू जी ने कहा- अच्छा तो तुम तुलसी का पौधा नहीं जानते।
दूसरा समझ गया कि अब मुझे ही कहा जाएगा। वह तुरंत पहले वाले से बोला- अरे मूर्ख! तूं तुलसी का पौधा नहीं पहचानता? तूने कभी तुलसी के पत्ते नहीं देखे? तुलसी का पौधा नहीं लगा हुआ वहाँ बीच बगीचे में? फिर दोनों बाहें फैला कर बोला- वही तो है तुलसी जिसके इतने लम्बे लम्बे पत्ते हैं।
गुरू जी बोले- अच्छा तो तुम भी तुलसी नहीं जानते। देखो मैं तो तख्त पर बैठ गया हूँ। और मेरा नियम है कि एक बार मैं पूजा के लिए बैठ जाऊँ तो बिना पूजा पूरी किए उठ नहीं सकता। चलो कोई बात नहीं, तुम तुलसी नहीं जानते, तख्त उठाना तो जानते हो? चलो मुझे ही बाहर ले चलो, फिर तुलसी के पत्ते तो मैं खुद ही ले आऊँगा।
अब तो दोनों चेलों का खून सूख गया। आखिर पुराना तख्त था, वह तो भारी भरकम था ही, गुरू जी भी भगवान की कृपा से कोई तख्त से कम भारी न थे। पर अब क्या किया जा सकता था? जैसे तैसे दोनों ने गुरू जी सहित तख्त उठाया और चले।
पहुँचे तुलसी के पौधे के पास। गुरू जी ने तुलसी के दो पत्ते लिए और कहा- प्यारे चेलों! अब वापिस भी ले चलो।
बात ऐसी है कि कुछ चेले सीधे सीधे नहीं सीखते। उन्हें सिखाने के लिए गुरू को भी उन्हीं के स्वभाव के अनुरूप योजना बनानी पड़ती है। वे चेले अब और कुछ भूलें न भूलें, पर तुलसी तो कभी नहीं भूलेंगे।
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⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।।

