मध्य प्रदेश

सैनिक छावनी की भूमि अतिक्रमण मामले में हाईकोर्ट का फैसला याचिका 10 हजार रुपये की लागत के साथ खारिज

स्लीमनाबाद की भूमि को लेकर चला था विवाद, ग्राम पंचायत के आमजन भी हुए थे लामबंद
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान ।  स्लीमनाबाद स्थित सैनिक छावनी की भूमि को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए रिट याचिका को 10 हजार रुपये की लागत के साथ खारिज कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एक ही मामले में सिविल न्यायालय और उच्च न्यायालय के समक्ष एक साथ दो कानूनी उपाय अपनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
मामले में पूर्व में तहसीलदार स्लीमनाबाद द्वारा भूमि से अतिक्रमण हटाने एवं बेदखली संबंधी कार्रवाई की गई थी। इसके बाद संबंधित पक्ष द्वारा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की गई थी।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर की माननीय कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश श्री विवेक रूसिया एवं माननीय न्यायमूर्ति श्री प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने 17 अगस्त 2026 को रिट याचिका क्रमांक 49345/2025, निसार बेग एवं अन्य बनाम मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य में सुनवाई करते हुए याचिका खारिज करने का आदेश पारित किया।
*कब्रिस्तान के लिए उपयोग की जा रही थी सैनिक छावनी की भूमि*
याचिकाकर्ताओं ने स्लीमनाबाद स्थित खसरा नंबर 53, रकबा 0.400 हेक्टेयर में दर्ज कब्रिस्तान एवं दफन भूमि के संरक्षण के लिए याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि कब्रिस्तान में पर्याप्त स्थान नहीं होने के कारण समीपवर्ती खसरा नंबर 54, रकबा 2.72 हेक्टेयर भूमि का भी शव दफनाने के लिए उपयोग किया जा रहा है।
हालांकि खसरा नंबर 54 अभिलेखों में मध्यप्रदेश शासन के नाम पर सैनिक छावनी के रूप में दर्ज है। इस भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए तहसीलदार स्लीमनाबाद द्वारा पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया था और बेदखली एवं भूमि खाली करने संबंधी नोटिस भी जारी किया गया था।
*सिविल न्यायालय में भी चल रहा था मामला*
मामले में याचिकाकर्ता पहले ही सिविल न्यायालय में वाद प्रस्तुत कर चुके थे तथा आदेश 39 नियम 1 एवं 2 सीपीसी के तहत अंतरिम राहत के लिए आवेदन भी दिया गया था। प्रारंभिक रूप से यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन बाद में सिविल न्यायालय ने अंतरिम राहत संबंधी आवेदन को उसके गुण-दोष के आधार पर खारिज कर दिया था।
उच्च न्यायालय ने इस तथ्य को गंभीरता से लेते हुए कहा कि जब सिविल न्यायालय में मामला लंबित है और संबंधित राहत के संबंध में आदेश प्रभावी है, तब उसी विषय को लेकर उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर करना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
*10 हजार रुपये की लागत के साथ खारिज हुई याचिका*
खंडपीठ ने रिट याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं पर 10 हजार रुपये की लागत लगाई है। न्यायालय ने उक्त राशि मध्यप्रदेश शासन के खाते में फाइन्स एंड फॉरफीचर्स (विविध शुल्क) मद के अंतर्गत जमा कराने के निर्देश दिए हैं।
*विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं में उत्साह*
सैनिक छावनी के रूप में दर्ज भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर पूर्व में ग्राम पंचायत स्लीमनाबाद के आमजन भी लामबंद हुए थे। उच्च न्यायालय द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद विश्व हिंदू परिषद एवं बजरंग दल के कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकारी अभिलेखों में सैनिक छावनी के रूप में दर्ज भूमि के संबंध में न्यायालय का फैसला महत्वपूर्ण है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब स्लीमनाबाद क्षेत्र में सैनिक छावनी की भूमि को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं।चाहें तो मैं इसे नई दुनिया की समाचार शैली में और अधिक प्रभावशाली हेडिंग व इंट्रो के साथ भी तैयार कर सकता हूँ।

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