पर्यावरणमध्य प्रदेश

हर साल गिर रहा जलस्तर, रैन वॉटर हार्वेस्टिंग पर नहीं हो रहा पर्याप्त काम

नगर परिषद अफसर नहीं दिखा रहे वॉटर रिचार्जिंग के काम में रुचि
सिलवानी। बारिश के सीजन में जिले में जल भराव जैसे हालात निर्मित होते हैं, लेकिन जानकर ताज्जुब होगा कि बारिश के कुछ माह बाद से ही नगर सहित ग्रामीण क्षेत्र के लोग बूंद-बूंद के लिए तरसने लगते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले तीन माह से पेयजल के लिए गंभीर समस्या निर्मित हो गई है। नगर में अनमोल वर्षा जल का संचय न होने से अरबों लीटर व्यर्थ बह जा रहा है। प्रकृति के खजाने को बर्बाद होने से कोई नहीं रोक रहा। वर्षा जल के संग्रहण याने की रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से ही कुएं, बावड़ी, तालाब, नादिया आदि जलमय रहेंगे। इसके बाद भी अमृत को लेकर ऐसी बेपरवाही हो रही है।
तेजी से गिर रहा है जलस्तर:
बारिश केे पानी को न सहेजने से नगर की स्थिति बिगड़ती जा रही है। 10 साल पहले जमीन में 100 फीट पर पर्याप्त पानी मिल जाता था। अब यह 200 से 300 फीट पर भी नहीं मिल रहा। पीएचइ के राजेश शर्मा का कहना है कि बारिश का पानी नीचे न जाने से जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है।
यह जमा हो रही राशि: नियम के अनुसार भवन अनुज्ञा लेने के पहले रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए 140 से 200 वर्गमीटर निर्माण के लिए 7 हजार, 200 से 300 वर्गमीटर के लिए 10 हजार, 300 से 400 वर्गमीटर के लिए 12 हजार, 400 वर्गमीटर से अधिक निर्माण पर 15 हजार रुपये की सुरक्षा निधि नगर परिषद में जमा हो रही है। यह राशि सिस्टम बनाने के बाद वापसी का प्रावधान है, लेकिन एक के द्वारा भी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा।
ये मानक हैं जरूरी
बारिश के पानी को सुरक्षित करने और इस्तेमाल करने के लिए सरकार की ओर से भवन और घरों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग बनाने के लिए तमाम आदेश पारित किए गए हैं। इसके अलावा नए भवन व मकानों के नक्शे में वॉटर हार्वेस्टिंग निर्माण के लिए अनुमति अनिवार्य कर दी गई है, लेकिन इसका पालन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी केवल कागजों में ही कर रहें हैं। बेपरवाही और भीषण गर्मी के चलते तेजी से नीचे जा रहें वॉटर लेबल अब डेंजर जोन के नजदीक पहुंच चुका है। भवन निर्माण की परमिशन देते वक्त रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की शर्त रखी जाती है। इसके लिए नगर परिषद में 15 हजार तक अमानत राशि जमा करवाई गई है, निर्माणकर्ता वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाता है तो वेरिफिकेशन बाद अमानत राशि वापस होती है, लेकिन यहां नगर में 98 प्रतिशत निजी भवनों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा।
खास-खासः
मप्र भूमि विकास नियम 1984 की धारा 78 के तहत 26 दिसंबर 2009 से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य।
नगर पालिक निगम में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का पालन न करने पर कठोर कानून न होने से नहीं हो पा रहो नियम का पालन।
नगर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए लोगों को होना होगा आगे, आसपास के लोगों को भी करना होगा जागरुक।
नगर परिषद के यंत्रियों को करनी है रेन वाटर हावेस्टिंग सिस्टम की मॉनीटरिंग, फिर भी जारी है बेपरवाही।

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