कृषिमध्य प्रदेश

खाद के लिए मशक्कत : दो बोरी खाद के लिए किसान को दो दिन तक सुबह से शाम तक लगना पड़ता है लंबी कतार में

कई जगह 7 दिन का इंतजार
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन ।
दो दिन पहले यूरिया खाद की लिए 6 घंटे तक लाइन में लगे सीहोर जिले में 65 साल के किसान शिवनारायण की मौत ने सीहोर जिला प्रशासन के पर्याप्त खाद के दावों की पोल खोल दी है। रायसेन में भी जिला प्रशासन के अधिकारी भले ही चाहे चिल्ला-चिल्लाकर खाद के पर्याप्त स्टॉक की बात कह रहे हो। लेकिन हकीकत है कि किसानों को दो बोरी खाद के लिए दिन भर लंबी लंबी लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। तब कहीं जाकर खाद के लिए पर्ची उन्हें मिल पाती है। इसका प्रमाण इसी बात से लगाया जा सकता है कि रायसेन जिले की अधिकांश सोसायटियों से यूरिया पुलिस की निगरानी में बांटा जा रहा है।
जिले की 113 सोसाइटियों में खाद के काट रहे चक्कर……
रायसेन जिले की 113 सोसाइटियों में ही डीएपी यूरिया खाद के लिए किसान चक्कर काट ने के लिए विवश हैं।जिले की अधिकांश सोसायटी पर किसान खाद के लिए चक्कर लगाते नजर आते हैं। दूसरे दिन जाकर जिला प्रशासन ने सीहोर जिले में हुई किसान की मौत के मामले की सुध ली और सबक लेते हुए खाद वितरण की व्यवस्था में कुछ बदलाव किया है।
खाता धारक और डिफाल्टर किसान के लिए सोसायटी में यह प्रक्रिया है खाद लेने की….
खाता-धारक किसान सोसायटी पर पहुंचता है।यहां पर किसान की जरूरत और पूर्ति के अनुसार खाद के लिए परमिट काटा जाता है। जिसे किसान सामान्य भाषा में पर्ची बोलता है। इसके लिए बायोमेट्रिक मशीन पर किसान के हाथ का अंगूठा लगाया जाता है।
परमिट कटने के बाद किसान गोदाम से जाकर सीधे खाद ले लेता है। उसे नकद रुपए नहीं देना होते हैं।
डिफाल्टर किसान नकद में खाद खरीदने के लिए नकद खरीदी केंद्रों पर जाते हैं। यहां केंद्रों पर यदि खाद उपलब्ध है तो यहां जमीन संबंधी दस्तावेज दिखाकर बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा लगाएगा।
इसके बाद यहां उसकी जमीन के अनुपात में खाद उपलब्ध कराई जाती है। इस खाद का किसान को पूरा भुगतान करना होता है।

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