मध्य प्रदेश

आशा ऊषा पर्यवेक्षक न्यायपूर्ण वेतन को लेकर बैठी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । प्रदेश की अधिकांश आशा कार्यकर्ताएं केवल 2000 रुपये मासिक का बेहद अल्प वेतन में काम कर रही हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका नियमित काम एवं अनिवार्य सेवा होने के चलते अन्य राज्य सरकारे वर्षों से आशा ऊषा एवं पर्यवेक्षको को अपनी ओर से अतिरिक्त वेतन दे रही हैं। आंध्रप्रदेश में राज्य सरकार 8000 रुपये अपनी ओर से मिलाकर आशाओं को 10000 रुपये मासिक वेतन दे रहे हैं। इसी तरह अन्य राज्य सरकारें भी वर्षों से आशाओं को अतिरिक्त वेतन दे रही हैं। लेकिन मध्य प्रदेश सरकार पिछले 16 वर्षों से आशाओं को कुछ नहीं दिया। प्रदेश सरकार ने जिन 7 कामों की राशि को दोगुना करने का आदेश जारी किया है इसका भुगतान नहीं किया गया है। अधिकांश आशाओं को इसका लाभ भी नहीं मिला है। अन्य राज्यों की तरह प्रदेश की आशाओं की भी मांग निश्चित वेतन में न्याय पूर्ण वृद्धि किए जाने की है। लेकिन इस न्याय पूर्ण मांग का निराकरण हेतु सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। जो कि बेहद अन्यायपूर्ण है। वर्तमान में देश के सभी केंद्रीय श्रमिक संगठनों के द्वारा अकुशल श्रमिक के लिए 26000 रुपये न्यूनतम वेतन किए जाने की मांग की जा रही है। जबकि प्रदेश की आशाएं अभी भी केवल 2000 रुपये की बेहद अल्प वेतन में काम करने के लिए विवश है। लगातार बढ़ती महंगाई के बावजूद प्रदेश की आशा एवं पर्यवेक्षकों को न्याय पूर्ण वेतन मानदेय दिए जाने की मांग के प्रति सरकार की अन्याय पूर्ण रवैया अभी भी जारी है इस परिस्थिति में आशा ऊषा आशा सहयोगी संयुक्त मोर्चा मध्य प्रदेश द्वारा न्यायपूर्ण वेतन वृद्धि की मांग को लेकर इस विधानसभा के अंतिम बजट सत्र के दौरान 15 मार्च 2023 अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। अतः आशा ऊषा आशा सहयोगी संयुक्त मोर्चा मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री से मांग करती है कि 24 जून 2021 को आंदोलन के दौरान मिशन संचालक, एनएचएम मध्य प्रदेश द्वारा दिए गए निर्णय को लागू कर आशाओं को 10000 रुपये एवं पर्यवेक्षको को 15000 रुपये वेतन मानदेय निश्चित वेतन देते हुए आशा एवं पर्यवेक्षकों के साथ न्याय किया जाए।

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