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उमा भारती का लक्ष्य शंकर के बहाने शिवराज मुक्ति का…

दिव्य चिंतन : लेखक : हरीश मिश्र ( वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार)
रायसेन । प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सावन के अंतिम सोमवार को सोमेश्वर धाम मंदिर मुक्ति के लिए पुनः जल अर्पित करने रायसेन दुर्ग पहुंची । मंदिर के कपाट बंद होने के कारण मंदिर के बाहर जल अर्पित किया। उमा जी को आज जन समर्थन हासिल नहीं हुआ।
मार्च 2022 में सरस्वती के वरद् पुत्र पंडित प्रदीप मिश्र के श्रीमुख से श्री त्रिपुंड शिवमहापुराण कथा सुनने हज़ारों भक्त दशहरा मैदान, रायसेन पहुंच  रहे थे ।
    शिवपुराण कथा में पंडित मिश्र ने कहा ” तुम्हारे घर का बाप जेल में पड़ा है और तुम दीपावली पर गुजिया पापड़ खाते हो धिक्कार है ” ।
    पंडित जी ने तपते हुए तवे पर आस्था की दो बूंद गिरा दी थी। दो बूंद गिरते ही राजनैतिक, धार्मिक क्षेत्र में तनाव का वातावरण उत्पन्न हो गया था।
   स्कंधपुराण में वर्णित रायसेन दुर्ग स्थित सोमेश्वर धाम शिव मंदिर में साल भर ताला लगा रहता है। शिवरात्रि के दिन पुरातत्व विभाग द्वारा ही पूजा अर्चना के लिए मंदिर के कपाट खोले जाते हैं।
    पंडित प्रदीप मिश्र के धिक्कार उवाच के बाद चैत्र की भीषण गर्मी में शिवराज के माथे पर पसीना आ गया था । तनाव पंडित जी की वाणी से और पसीना उमा भारती की इस घोषणा के कारण कि वह सोमेश्वर धाम मंदिर में जल अभिषेक कर शिव को मुक्त कराएंगी ।
     श्री त्रिपुंड शिवमहापुराण कथा के लिए शिवराज सरकार के निर्देश पर रायसेन प्रशासन ने लाल कालीन बिछा कर सबसे बेहतर व्यवस्था पंडित जी के लिए की थी । लेकिन किसे पता था पंडित जी के आंसू के बाद उनकी वाणी सोमेश्वर धाम को दूसरा अयोध्या बना देगी और शिवराज को कटघरे में खड़ा कर देगी।
    पंडित प्रदीप मिश्र के प्रवचन के बाद फेसबुक, व्हाट्सएप, टि्वटर, इंस्टाग्राम पर पंडित जी की वाणी को टैग कर  शिवभक्तों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए लिखा *” शिवराज के राज में अगर शंकर कैद में है तो फिर यह राज किसी काम का नहीं…” ।
    तब शंकर को कैद से मुक्त कराने उमा भारती मैदान में उतरीं थीं । उमा भारती का लक्ष्य शंकर के बहाने शिवराज मुक्ति का था ।
   2004 में हरि की इच्छा से शिवराज को सत्ता और भाजपा की जन-जन से जुड़ी साध्वी उमा भारती को महामाया चौक, रायसेन का मैदान मिला था। राम मंदिर आंदोलन से जुड़कर भाजपा को 2 सीटों से 182 के शिखर पर पहुंचाने वाली उमा सत्ता की दौड़ से बाहर हो गई थी । सत्ता से ही नहीं भाजपा से भी उमा जी को निकाल कर बाहर का रास्ता दिखाया गया था। तब से ही उमा भारती शिवराज को घेरने के लिए किसी मुद्दे की तलाश में थीं।
सोशल मीडिया पर शिव भक्त, शिव सरकार को ताने देने लगे, कोसने  लगे थे ।  पंडित जी की ललकार पर उमा भारती ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उमा जी ने घोषणा कर दी कि वह 11 अप्रैल 22 को गंगोत्री से जो जल लाई हैं।  उससे सोमेश्वर धाम मंदिर में जल अभिषेक करेंगी और ताला खोलने के लिए आंदोलन करेंगी। उमा जी दुर्ग स्थित सोमेश्वर धाम मंदिर का ताला खोलने पहुंची थीं। उन्होंने कठोर संकल्प लिया था कि जब तक मंदिर के ताले नहीं खुलेंगे अन्न का दाना ग्रहण नहीं करेंगी।‌ ये संकल्प उनके गले की फांस बन गया। लेकिन संकल्प बीच में ही छोड़ अन्न ग्रहण करने लगीं।
   उमा जी की घोषणा से शिवराज के ललाट पर पसीने की बूंदे टपकने लगी थीं । शिवराज जानते थे कि उमा जी ने सोमेश्वर धाम मंदिर का ताला तोड़ दिया तो  उनका  राजसिंहासन हिल जाएगा।  इसलिए सहज, सरल, मृदभाषी शिवराज ने मतभेदों को कलह का रूप नहीं दिया। बहन उमा जी से संवाद किया । वे जानते थे उमा जी को नज़र अंदाज करना महंगा पड़ेगा। संवाद नहीं किया तो 2023 से पहले ही परिणाम अमंगलकारी, अनर्थकारी हो सकते हैं ।
   इसलिए बहन उमा के सामने शिवराज नतमस्तक हुए थे। राजा राम जी की पवित्र नगरी ओरछा में शिव-उमा भेंट हुई थी । शिवराज ने उमा जी के मस्तिष्क पर राजनैतिक मंत्र से सिद्ध जल से अभिषेक कर उनके उग्र स्वभाव को शांत किया था । परिणाम राजा राम की नगरी ओरछा से सोमेश्वर धाम मंदिर की मुक्ति आंदोलन और ताला तोड़ने की हुंकार भरने वाली उमा जी रायसेन आते-आते अपने भाई शिवराज की जय जयकार करने लगीं थी। उमा जी ने सोमेश्वर धाम पर जलाभिषेक तो किया किन्तु उनके तेवर कमजोर पड़ गए थे । यह शिवराज की कूटनीतिक सफलता थी। उन्होंने पहले बहन से सत्ता और बाद में रोटी छीन ली थी ।
      उमा जी के भाग्य में कुछ और लिखा था । शिवराज आज तक नेतृत्व कर रहे हैं और उमा भारती सत्ता की रोटी के लिए संघर्षरत हैं। वीर बाना उमा जी ने पहना और सत्ता का सुख शिवराज ले रहे हैं।
    उमा जी अपनी व्यथा-कथा कैसे और किस से कहें। उन्हें उनकी ही राजनैतिक विरासत मध्यप्रदेश से षड्यंत्र पूर्वक दूर किया गया। उनके सपनों पर अपनों ने वज्रपात किया और सत्ता की रोटी को षडयंत्र पूर्वक छीन लिया गया । सुदामा पाण्डेय की काव्य रचना याद आती है…
एक आदमी
रोटी बेलता है ।
एक आदमी रोटी खाता है।
एक तीसरा आदमी भी है
जो ना रोटी बेलता है ना रोटी खाता है।
वह सिर्फ रोटी से खेलता है
मैं पूछता हूँ ।
‘यह तीसरा आदमी कौन है ?
मध्यप्रदेश में उमा भारती ने बंटाधार को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए संघर्ष किया अर्थात् रोटी बेली। उनके द्वारा बेली  गई रोटी को मध्य प्रदेश में भाजपा  खूब खा रही है और तीसरे आदमी शिवराज हैं जो रोटी से खेल रहे हैं। नियति कैसे कैसे खेल रचाती है कोई नहीं  जानता। अगले पल क्या हो सब अज्ञात है। उमा जी सोचती कुछ हैं, हो कुछ और ही जाता है। इससे विदित होता कि उनके भाग्य की डोर  शिव के हाथों में है। उमा जी कितना भी प्रयास कर लें उन्हें सफलता तब ही मिलेगी जब शिवराज की इच्छा होगी।
   उमा भारती के व्यक्तित्व का चित्रण करना, आकलन करना आसान नहीं होता। वह कभी सहज हो जाती हैं, कभी विकराल। उनकी सोमेश्वर धाम मुक्ति से ज्यादा रुचि  शिवराज मुक्ति में है। जबकि शिवराज की मुक्ति अभी असंभव दिख रही है।

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