हनुमान बाग मंदिर में कलश यात्रा के साथ श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा का प्रारंभ

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । नवरात्रि के परम पुनीत अवसर पर राम बाबा की पुण्य स्मरण में हनुमान बाग मंदिर में चल रही देवी महापुराण कथा के प्रथम दिवस में कलश यात्रा हनुमान बाग मंदिर से शुरू होकर शिवालय चौक होते हुए पुनः हनुमान बाग मंदिर आई तथा कथा प्रारंभ हुई और पुराण मनीषी पं. कमलेश कृष्ण शास्त्री ने कहा आदिशक्ति दुर्गा की पूजा, आराधना, साधना और उनमे समर्पण का पर्व नवरात्रे कहलाता है जिसमे माँ के 9 रूपों का 9 दिन तक गुणगान और भक्ति की जाती है |
इन नवरात्रों को आदि शक्ति को समर्पण करते हुए जो भी भक्त इनमे साधना करता है वह दसो महाविद्याओं की प्राप्ति कर सकता है | माँ उसका पग पग पर कल्याण करती है | भगवती के आशीष से कर्म, ज्ञान और भक्ति के पथ पर आनंद की प्राप्ति करता है | इनकी कृपा और आराधना से मनुष्यों को स्वर्ग और अपुनरावर्ती मोक्ष प्रदान होता है |
इस जगत में माँ की महिमा अपरम्पार है , माँ के प्यार की ,त्याग की कोई तुलना नहीं की जा सकती और जब इस अनमोल रूप में दैविक शक्ति का वाश हो जाये ममता के साथ साथ आशीष स्नेह प्राप्त करके मनुष्य का जीवन सार्थक हो जाता है | अत: हिन्दू धर्म में सभी देवी माँ अपने भक्तो के लिए करुणामई और सुखो का संचार करने वाली है |
नवरात्र चैत्र और आश्विन में ही क्यों होता है? इसका वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से कारण है़ ऋतु विज्ञान के अनुसार ये दोनों ही महीने सर्दी या गर्मी की संधि के महत्वपूर्ण मास हैं | इसलिए हमारे स्वास्थ्य पर इनका विशेष प्रभाव पड़ता है़ | चैत्र में गर्मी का प्रारंभ होते ही पिछले कई महीनों से जमा हुआ हमारे शरीर का रक्त उबलना आरंभ हो जाता है़ इसी के साथ-साथ शरीर के वात, पित्त और कफ भी उफनने लगते हैं | यही कारण है कि रोगी इन दोनों मासों में या तो शीघ्र अच्छे हो जाते हैं या मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं |
इसीलिए वेदों में ‘जीवेम शरद: शतम्’ प्रार्थना करते हुए सौ शरदकाल- पर्यंत जीने की प्रार्थना की गयी है, न कि वर्षाकाल पर्यंत. इसमें भी बसंत ऋतु की अपेक्षा शरद ऋतु का प्रकोप अधिक भयावह होता है़ | यदि शरदकाल कुशलता से बीत जाऊ तो फिर वर्ष भर सकुशल रहने की आशा हो जाती है़ | इसी कारण से वर्ष का अपर या दूसरा नाम ‘शरत्’ पड़ गया़ आयोजक राजकुमार जैन, छोटू जैन,मुख्य यजमान शशांक दुबे, संजू नेमा, मनोज साहू है।



