धार्मिकमध्य प्रदेश

गिले-शिकवे भूले, एक-दूसरे को भुजरिया देकर मनाया सौहार्द का पर्व

सिलवानी में धूमधाम से मनाया गया भुजरिया पर्व, चांचड़-लेंहगी का हुआ आयोजन

सिलवानी। भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के प्रतीक रक्षाबंधन के दूसरे दिन मनाया जाने वाला भुजरिया पर्व (जिसे कजारिया पर्व भी कहा जाता है) शनिवार को सिलवानी क्षेत्र में उत्साहपूर्वक मनाया गया। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने अपने सिर पर टोकरी में भुजरिया रखकर मंगल गीत गाते हुए नदी पर पहुंची।
पर्व के दौरान नगर में चांचड़ लेंहगी का आयोजन हुआ, जिसमें महिलाओं और युवाओं ने पारंपरिक लोक नृत्य प्रस्तुत किया। यह आयोजन शाम
तक चला, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे।
इसके पश्चात काली चौक माता मंदिर से ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें भुजरिया को विसर्जन हेतु राम मंदिर नदी ले जाया गया। नदी तट पर पहले भुजरिया विसर्जन करने की होड़ देखी गई, जो उत्साह का केंद्र रही।
विसर्जन उपरांत देवी-देवताओं को भुजरिया अर्पित कर श्रद्धालुओं ने माथा टेककर सुख-समृद्धि की कामना की। इस पर्व ने लोगों को आपसी मतभेद भुलाकर भाईचारे और सौहार्द की डोर में बांधने का संदेश दिया।

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