भाई की कलाई में प्यार बांधा, रेशम की डोरी से संसार बांधा
धूमधाम से मनाया गया रक्षाबंधन का पर्व, बहनों ने बांधी राखी तो भाइयों ने दिए उपहार
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पावन पर्व रक्षाबंधन स्लीमनाबाद क्षेत्र में शुक्रवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ धूमधाम से मनाया गया । सुबह से ही घरों में पर्व को लेकर विशेष तैयारियां देखने को मिलीं । बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुखी, स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की, वहीं भाइयों ने भी बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हुए उन्हें उपहार भेंट किए ।
रक्षाबंधन के पावन अवसर पर हर ओर भाई-बहन के प्रेम की अनूठी मिसाल देखने को मिली। मानो—
*भाई की कलाई में प्यार बांधा है*,
*रेशम की डोरी से संसार बांधा है*।”
बहनों ने पूजा-अर्चना कर भाइयों की आरती उतारी और उनकी कलाई पर राखी बांधी । मिठाइयों से एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया गया । बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में पर्व को लेकर विशेष उत्साह नजर आया ।
इस अवसर पर संत शिरोमणि ब्रह्मानंद दास जी महाराज ने रक्षाबंधन पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, सुरक्षा और पारिवारिक संस्कारों का प्रतीक है । यह पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और अधिक मजबूत बनाता है तथा समाज में प्रेम और एकता का संदेश देता है ।
महाराज जी ने भद्रा के संबंध में भी जानकारी साझा करते हुए कहा कि हिंदू धर्म में रक्षाबंधन पर भद्रा काल का विशेष महत्व माना जाता है । परंपराओं के अनुसार भद्रा काल में शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है और भद्रा समाप्त होने के बाद ही शुभ मुहूर्त में राखी बांधना श्रेष्ठ माना जाता है । इसलिए लोगों ने पंचांग और शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हुए रक्षाबंधन का पर्व श्रद्धा एवं विधि-विधान से मनाया ।
स्लीमनाबाद क्षेत्र में रक्षाबंधन के अवसर पर बाजारों में भी रौनक देखने को मिली । राखी, मिठाई और उपहारों की दुकानों पर दिनभर लोगों की भीड़ रही । पर्व के दौरान बहनों ने भाई की कलाई में राखी बांधी और भाइयों ने बहनों को उपहार देकर उनके प्रति अपना स्नेह व्यक्त किया।
इस तरह प्रेम, अपनत्व और भाई-बहन के अटूट रिश्ते का यह पावन पर्व स्लीमनाबाद में पूरे उत्साह, उमंग और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया।



