श्रीकृष्ण रूक्मिणी विवाह के प्रसंग पर श्रद्धालुओं ने बरसाए फूल

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । समीपस्थ ग्राम बरौदा में महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर श्रीरूद्र महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत महापुराण के छठे दिन श्री कृष्ण और रुक्मणि का विवाह बड़े ही धूमधाम से मनाया गया । विवाह उत्सव के दौरान प्रस्तुत किए गए भजनों के दौरान श्रद्धालु अपने आप को रोक नहीं पाए और जमकर नाचे । कथा व्यास श्री आकर्षण महाराज ने कहा कि रुक्मणि भगवान की माया के समान थीं, रुक्मणि ने मन ही मन यह निश्चित कर लिया था कि भगवान श्री कृष्ण ही मेरे लिए योग्य पति हैं लेकिन रुक्मिणी का भाई रूकमी श्रीकृष्ण से द्वेष रखता था इससे उसने उस विवाह को रोक कर, शिशुपाल को रुक्मिणी का पति बनाने का निश्चय किया इससे रुक्मिणी को दुःख हुआ। उन्होंने अपने एक विश्वासपात्र को भगवान श्रीकृष्ण के पास भेजा साथ ही अपने आने का प्रयोजन बताया । इसके बाद श्री कृष्ण जी विदर्भ जा पहुंचे । उधर रुक्मणी का शिशुपाल के साथ विवाह की तैयारी हो रही थी । परंतु उनकी प्रार्थना का असर हुआ और श्री कृष्ण का विवाह रुक्मणी के साथ हुआ । कथा सुनने आए सैकड़ों श्रद्धालुओं भगवान श्रीकृष्ण व रुक्मणी जी की झांकी के दर्शन किये कथा में श्रद्धालुओं की भीड़ रही । आयोजन समिति के जमुना प्रसाद तिवारी, कुलदीप तिवारी, कमोद तिवारी ने समस्त क्षेत्र वासियों से भंडारा में पहुँच कर प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ अर्जित करे।



