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Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 22 फरवरी 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 22 फरवरी 2026
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
*इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है। *रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
*रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352_

☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
⛈️ मास – फाल्गुन मास
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – रविवार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि 11:10 AM तक उपरांत षष्ठी
📝 तिथी स्वामी – पंचमी के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है। यह लक्ष्मीप्रदा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र अश्विनी 05:54 PM तक उपरांत भरणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – अश्विनी नक्षत्र का स्वामी केतु होता है। इसके देवता ‘अश्विनी कुमार’ (देवताओं के वैद्य) हैं और राशि स्वामी मंगल है।
⚜️ योग : शुक्ल योग 01:08 PM तक, उसके बाद ब्रह्म योग
प्रथम करण : बालव 11:10 AM तक
द्वितीय करण : कौलव 10:11 PM तक, बाद तैतिल
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:36:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:55:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : शाम को 29:12 मिनट से शाम 30:03 बजे तक
🌇 प्रातः सन्ध्या : शाम को 29:38 बजे से 06:53 बजे तक
🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर को 12:12 मिनट से दोपहर 12:58 बजे तक
✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर को 14:29 मिनट से दोपहर 15:14 तक
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम को 18:14 मिनट से शाम 18:39 तक
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : शाम को 18:16 मिनट से शाम 19:32 तक
💧 अमृत काल : दोपहर 11:04 मिनट से दोपहर 12:35 तक
🗣️ निशिता मुहूर्त : शाम को 24:09 मिनट से शाम 24:59 तक
☀️ सर्वार्थ सिद्धि योग : सुबह 06:53 मिनट से शाम 17:54 तक
❄️ रवि योग : शाम को 17:54 मिनट से शाम 30:52 तक
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारम्भ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पिताम्बर चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – स्कन्द षष्ठी/ गण्ड मूल/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ रवि योग/ विडाल योग/ हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भगवत दयाल शर्मा स्मृति दिवस, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर एच. वी. आर. आयंगर पुण्य तिथि, स्वतंत्रता सेनानी नरसिम्हा रेड्डी स्मृति दिवस, मुग़ल सम्राट नसीरुद्दीन हुमायूँ पुण्य तिथि, महेश चंद्र न्यायरत्न भट्टाचार्य जयन्ती, महाराजा चामराजेंद्र वाडियार एक्स जन्म दिवस, इंदुलाल कनैयालाल याग्निक जयन्ती, स्वतंत्रता सेनानी मौलाना अबुल कलाम आज़ाद स्मृति दिवस, सुखबीर पुण्य तिथि, महात्मा गांधी की पत्नी कस्तूरबा गाँधी स्मृति दिवस, राष्ट्रीय कैलिफ़ोर्निया दिवस, रविदास जयन्ती, विश्व स्काउट दिवस, यदुवंश गौरव श्री Katamaraju जयन्ती, विश्व चिंतन दिवस
✍🏼 *तिथि विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है। 🌷 *_Vastu tips* 🌸
शुभ- अशुभ प्रभाव कैसे जानें
*महिलाओं की दाईं आंख का फड़कना अशुभ माना जाता है। यह मानसिक तनाव, स्वास्थ्य संबंधी परेशानी या आने वाली कठिनाई का संकेत हो सकता है। *महिलाओं की बाईं आंख का फड़कना शुभ संकेत माना जाता है, जैसे जल्द ही कोई अच्छी खबर सुनने या कार्य में सफलता मिलने की संभावना।
*पुरुषों की दाईं आंख फड़कना शुभ शगुन होता है। यह संकेत देता है कि आपके जीवन में कुछ सकारात्मक घटनाएं हो सकती हैं। *पुरुषों की बाईं आंख का फड़कना बहुत ही ज्यादा अशुभ, जिस आने वाले समय में परेशानी या संघर्ष का संकेत माना जाता है।
*महिलाओं की दाईं भौंह फड़कना अशुभ संकेत जैसी कि आर्थिक नुकसान या किसी परेशानी का इशारा करती है। *महिलाओं की बाईं भौंह फड़कने को शुभ माना जाता है, जिसे धन लाभ और घर-परिवार से जुड़ी अच्छी खबर मिलने का संकेत माना जाता है।
*पुरुषों की दाईं भौंह फड़कना शुभ होता है, जैसे धन लाभ, मान-सम्मान में वृद्धि और अच्छे समाचार का संकेत। *पुरुषों की बाईं भौंह का फड़कना अशुभ संकेत जैसे धन संबंधी परेशानियों की संभावना मानी जाती है।
*दाईं हथेली में खुजली होना शुभ, जल्दी धन लाभ होने और अप्रत्याशित लाभ प्राप्त होने का संकेत है। *बाईं हथेली में खुजली होना अशुभ, खर्चों में वृद्धि या वित्तीय समस्याओं का संकेत मानी जाती है।
*हाथ से चीज गिरने या टूटने का संकेत शकुन आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, अगर हाथ से कांच या कोई चीज टूट जाए तो यह शुभ संकेत माना जाता है। इसका मतलब है कि भविष्य में किसी बड़े संकट या परेशानी से बचाव हो गया है। हालांकि टूटे हुए कांच को तुरंत घर से बाहर कर देना चाहिए, क्योंकि घर में रखना अशुभ माना जाता है। ❇️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ बड़ी इलायची को पीसकर मस्तिष्क पर लेप करने से एवं बीजों को पीसकर सूंघने से सिर का दर्द ठीक हो जाता है *बड़ी इलायची को पीसकर शहद में मिलाकर छालों पर लगाने से छाले ठीक हो जाते हैं |
*यदि दांत में दर्द हो रहा हो तो बड़ी इलायची और लौंग के तेल को बराबर-बराबर मात्रा में लेकर पीड़ायुक्त दांत पर लगाएं ,दर्द में शांति मिलेगी | *यदि अधिक थूक या लार आती हो तो बड़ी इलायची और सुपारी को बराबर-बराबर पीसकर ,2-3 ग्राम की मात्रा में लेकर चूसते रहने से यह कष्ट दूर हो जाता है
*पांच से दस बूँद बड़ी इलायची तेल में मिश्री मिलाकर नियमित सेवन करने से दमा में लाभ होता है दो ग्राम सौंफ के साथ बड़ी इलायची के 8-10 बीजों का सेवन करने से पाचन शक्ति बढ़ती है एक ग्राम बड़ी इलायची बीज चूर्ण को दस ग्राम बेलगिरी के साथ मिलाकर प्रातः सायं सेवन करने से दस्तों में लाभ होता है
*पिसी हुई राई के साथ बड़ी इलायची चूर्ण मिलाकर 2-3 ग्राम की मात्रा में नियमित सेवन करने से लीवर सम्बंधित रोगों में लाभ होता है | 🩸 *आरोग्य संजीवनी* 💊 अलसी के फायदे — *भूरे-काले रंग के यह छोटे छोटे बीज, हृदय रोगों से आपकी रक्षा करते हैं। इसमें उपस्थित घुलनशील फाइबर्स, प्राकृतिक रूप से आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने का काम करता है। इससे हृदय की धमनियों में जमा कोलेस्ट्रॉल घटने लगता है, और रक्त प्रवाह बेहतर होता है, नतीजतन हार्ट अटैक की संभावना नहीं के बराबर होती है ।
*अलसी में ओमेगा-3 भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो रक्त प्रवाह को बेहतर कर, खून के जमने या थक्का बनने से रोकता है, जो हार्ट-अटैक का कारण बनता है। यह रक्त में मौजूद कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी सहायक है। *यह शरीर के अतिरिक्त वसा को भी कम करती है, जिसे आपका वजन कम होने में सहायता मिलती है।
*अलसी में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स और फाइटोकैमिकल्स, बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करती है, जिससे त्वचा पर झुर्रियां नहीं होती और कसाव बना रहता है। इससे त्वचा स्वस्थ व चमकदार बनती है। *अलसी में अल्फा लाइनोइक एसिड पाया जाता है, जो ऑथ्राईटिस, अस्थमा, डाइबिटीज और कैंसर से लड़ने में मदद करता है। खास तौर से कोलोन कैंसर से लड़ने में यह सहायक होता है।
*सीमित मात्रा में अलसी का सेवन, खून में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है। इससे शरीर के आंतरिक भाग स्वस्थ रहते हैं, और बेहतर कार्य करते हैं। *इसमें उपस्थित लाइगन नामक तत्व, आंतों में सक्रिय होकर, ऐसे तत्व का निर्माण करता है, जो फीमेल हार्मोन्स के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️
( हरिनाम जप जरूर करें )
बिच्छू की मृत्यु बहुत ही दु:खदायी रूप में होती है।
*मादा बिच्छु जब बच्चो को जन्म देती है तब, ये सभी बच्चे जन्म लेते ही अपनी मांँ की पीठ पर बैठ जाते हैं। *और अपनी भूख मिटाने हेतु तुरंत ही अपनी माँ के शरीर को ही खाना प्रारम्भ कर देते हैं, और तब तक खाते हैं, जब तक कि उसकी केवल अस्थियां ही शेष ना रह जाए।
*वो तड़पती है, कराहती है, लेकिन ये पीछा नहीं छोड़ते और ये उसे पलभर में नहीं मार देते बल्कि कई दिनों तक यह मौत से बदतर असहनीय पीड़ा को झेलती हुई दम तोड़ती है। *मादा बिच्छु की मौत होने के पश्चात् ही ये सभी उसकी पीठ से नीचे उतरते हैं!
*लख चौरासी के कुचक्र में ऐसी असंख्य योनियां हैं, जिनकी स्थितियां अज्ञात हैं, कदाचित् इसीलिए भवसागर को अगम और अपार कहा गया है। *संतमत के मुताबिक यह भी मनुष्य योनि में किए गये कर्मों का ही भुगतान है।
*अर्थात्, इन्सान इस मनुष्य जीवन में जो कर्म करेगा, नाना प्रकार की असंख्य योनियों में इन कर्मों के आधार से ही उसे दुःख सुख मिलते रहेंगे। यह तय है! *मनुष्य जन्म बड़ी मुश्किल से मिला है, ये जो गलियों में आवारा जानवर घूम रहे हैं न! इन्हें भी कभी मनुष्य जन्म मिला था…
*इनमें से कोई डॉक्टर था, कोई इंजीनियर, कोई कुछ और.. *इनके गुरु भी इन्हें नाम का भजन करने को कहते थे तो हँस कर जवाब देते थे कि अभी हमारे पास समय नहीं है!
*वो मनुष्य जन्म हार गए, भगवान का भजन व धन्यवाद नहीं किया, पशु योनि में आ गए। *अब देखो समय ही समय है, बेचारे गली-गली आवारा घूमते हैं, कोई धुत्कारता है.. कोई फटकारता है।
*कर्म बहुत रूला डालते हैं, किसी को नहीं छोड़ते अब नहीं समझेंगे तो कब समझेंगे…? *हरिनाम का भजन कर्मफलों को भी धो डालता
*_🌷जय श्री हरि🌷
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⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।।

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