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Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 16 मई 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦•••  *_जय श्री हरि_*  •••✦
🧾 *_आज का पंचाग_* 🧾       
*शनिवार 16 मई  2026_*
*_शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।_*
☄️ *_दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
*_शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
*_शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
*_शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
*_शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी_*
🌐 *_रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,_*
✡️ *_शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र_*
☮️ *_गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल_*
☸️ *_काली सम्वत् 5127_*
🕉️ *_संवत्सर (बृहस्पति) पराभव_*
☣️ *_आयन –  उत्तरायण_*
☂️ *_ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु_*
☀️ *_मास – ज्यैष्ठ मास_*
🌚 *_पक्ष – कृष्ण पक्ष_*
📆 *_तिथि – शनिवार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि 01:30 AM तक उपरांत प्रतिपदा_*
🖍️ *_तिथि स्वामी – अमावस्या तिथि के देवता हैं अर्यमा जो पितरों के प्रमुख हैं। अमावास्या में पितृगणों की पूजा करने से वे सदैव प्रसन्न होकर प्रजावृद्धि, धन-रक्षा, आयु तथा बल-शक्ति प्रदान करते हैं।_*
💫 *_नक्षत्र- नक्षत्र भरणी 05:30 PM तक उपरांत कृत्तिका_*
🪐 *_नक्षत्र स्वामी – भरणी नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह है। भरणी नक्षत्र के अधिदेवता यमराज (यम) हैं, जो मृत्यु, धर्म और न्याय के देवता माने जाते हैं।_*
⚜️ *_योग – सौभाग्य योग 10:25 AM तक, उसके बाद शोभन योग_*
⚡ *_प्रथम करण : चतुष्पद 03:23 PM तक_*
✨ *_द्वितीय करण : नाग 01:31 AM तक, बाद किस्तुघन_*
🔥 *_गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक_*
⚜️ *_दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ_*
🤖 *_राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए_*
🌞 *_सूर्योदयः – प्रातः 05:29:05_*
🌅 *_सूर्यास्तः – सायं 19:05:29_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः काल 04:07 ए एम से 04:48 ए एम_*
🌆 *_प्रातः सन्ध्या : प्रातः काल 04:27 ए एम से 05:30 ए एम_*
🌟 *_अभिजित मुहूर्त : सुबह 11:50 ए एम से 12:45 पी एम_*
🔯 *_विजय मुहूर्त : दोपहर 02:34 पी एम से 03:28 पी एम_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त : सायं काल 07:04 पी एम से 07:25 पी एम_*
🎆 *_सायाह्न सन्ध्या : सायं काल 07:05 पी एम से 08:08 पी एम_*
💧 *_अमृत काल : दोपहर 01:15 पी एम से 02:40 पी एम_*
🗣️ *_निशिता मुहूर्त : सुबह 11:57 पी एम से 12:38 ए एम, मई 17_*
🚓 *_यात्रा शकुन- शनिवार को शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।_*
👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।_*
🤷🏻‍♀️ *_आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।_*
🪵 *_वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – वट सावित्री व्रत/ शनि जयन्ती/ मासिक कार्तिगाई/ दर्श अमावस्या/ अन्वाधान/ वैशाख अमावस्या/ आडल योग/ भारतीय सैनिक कर्नल धर्मवीर सिंह स्मृति दिवस, भारतीय गेंदबाज राजेंद्र सिंह जडेजा स्मृति दिवस, भारतीय राजनेता नटवर सिंह जन्म दिवस, सिक्किम स्थापना दिवस, राष्ट्रीय डेंगू दिवस, राष्ट्रीय बारबेक्यू दिवस, राष्ट्रीय मिमोसा दिवस, राष्ट्रीय पियर्सिंग दिवस, राष्ट्रीय नदी सफाई दिवस, राष्ट्रीय समुद्री बंदर दिवस, अंतरराष्ट्रीय पंक रॉक दिवस, शांति से एक साथ रहने का अंतर्राष्ट्रीय दिवस, अंतर्राष्ट्रीय प्रकाश दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है। अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है। अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं। यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।    
🗺️ *_Vastu tips_* 🗽
अक्सर बहुत से लोग बेड के सामने ही आईना लगा देते हैं या रख देते हैं। वास्तु शास्त्र में बेडरूम के सामना आईना लगाना अशुभ माना गया है। वास्तु के अनुसार, सोते समय पति-पत्नी का प्रतिबिंब आईने में नहीं दिखना चाहिए। कहा जाता है कि इससे वैवाहिक जीवन में समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। अगर आईना हटाना संभव नहीं है तो सोते समय उसे किसी कपड़े से ढक दें।
*_बेडरूम में कभी भी ताजमहल या अन्य प्रकार के मकबरा को न रखें। इसके अलावा बेडरूम में पूर्वजों की तस्वीरें भी कभी नहीं रखनी चाहिए। इसके नकारात्मक असर पड़ता है। दीवारों पर महाभारत के युद्ध, जंगली जानवरों के शिकार या रोते हुए बच्चे की तस्वीरें भी न लगाएं। ऐसी तस्वीरें रखने से दंपति के बीच छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होने लगते हैं।
*_पति-पत्नी के बेडरूम में मंदिर या देवी-देवताओं की तस्वीरें कभी नहीं लगानी चाहिए। वास्तु शास्त्र में ऐसा करना सही नहीं माना गया है। बेडरूम में भगवान की मूर्ति रखने से वैवाहिक जीवन में कई तरह की परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं।     
♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
*_कैसे गलत पॉश्चर पहुंचा रहा है शरीर को नुकसान गलत पॉश्चर का असर तुरंत नहीं दिखता, लेकिन समय के साथ यह गंभीर रूप ले सकता है। जब हम कुर्सी पर झुककर बैठते हैं, बिना बैक सपोर्ट के काम करते हैं या गर्दन नीचे झुकाकर मोबाइल देखते रहते हैं, तो रीढ़ की हड्डी अपनी प्राकृतिक संरचना से हटने लगती है। इससे मांसपेशियों में खिंचाव, जकड़न और दर्द पैदा होता है। धीरे-धीरे यह दर्द कमर से लेकर गर्दन और कंधों तक फैल सकता है।
*_इसके अलावा, खड़े होने और चलने के दौरान शरीर का संतुलन सही न रखना भी समस्या को बढ़ाता है। जैसे एक पैर पर ज्यादा वजन डालकर खड़ा रहना या आगे की ओर झुककर चलना, कमर पर अतिरिक्त दबाव डालता है। आजकल ‘टेक्स्ट नेक’ जैसी समस्या भी तेजी से बढ़ रही है, जिसमें लोग घंटों तक मोबाइल स्क्रीन देखते हुए गर्दन झुकाए रखते हैं। इसका असर सिर्फ गर्दन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी रीढ़ और कमर पर भी पड़ता है।          
🍶 *आरोग्य संजीवनी* 🩸
क्या खाने से नजर तेज होती है आप रात में सोने से पहले 1 गिलास दूध में करीब 1-2 चम्मच ये पाउडर घोल लें। अच्छी तरह से मिक्स कर लें और दूध को धीरे-धीरे सिप करके पीएं। आप चाहें तो पाउडर को ऐसे ही खा लें और ऊपर से गुनगुना दूध पी लें। बच्चों को खिला रहे हैं तो उनके दूध में 1 चम्मच पाउडर ही मिलाएं। रोजाना 3-6 महीने तक इस चूर्ण का सेवन करें।
*_आंखों के लिए सौंफ, काली मिर्च, बादाम और मिश्री के फायदे सौंफ में विटामिन ए होता है जो आंखों की सेल्स को रिपेयर करता है। सौंफ में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो ऑक्सीटोसिन स्ट्रेस को कम करते हैं। सौंफ को पेट के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है। बादाम में विटामिन ई और ओमेगा-3 फैटी एसिड्स होते हैं, इससे आंखों की नर्व्स में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। इससे आंखों के साथ दिमाग को भी पोषण मिलता है। मिश्री का कूलिंग इफेक्ट आंखों को ठंडक देता है। इससे आंखों को लाल होने और पानी आने की समस्या कम होती है। पेट को भी मिश्री ठंडा करती है। काली मिर्च पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करती है। सफेद मिर्च कम तीखी होती है। इसलिए बच्चे इसे आसानी से खा सकते हैं। ये चूर्ण न सिर्फ आंखों को मजबूत करता है बल्कि साथ ही अच्छी नींद और बेहतर गट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद है। अगर आप इस चूर्ण के साथ आंखों की एक्सरसाइज भी करते हैं तो असर और भी जल्दी और अच्छा होगा।      
📚 *गुरु भक्ति योग_* 🕯️
       सनातन धर्म ग्रंथों में मृत्यु के बाद की प्रक्रियाओं और आत्मा की यात्रा का विस्तार से वर्णन मिलता है। खासतौर पर गरुड़ पुराण में आत्मा की स्थिति, कर्मों का प्रभाव और अंतिम संस्कार से जुड़े कई नियम बताए गए हैं। इन्हीं में एक महत्वपूर्ण परंपरा है कि शव को कभी भी अकेला नहीं छोड़ा जाता। तो क्या आपके मन में कभी यह सवाल उठा है कि आखिर क्यों हर हाल में इस परंपरा का निर्वाह किया जाता है। चलिए जानते हैं मरने के बाद व्यक्ति की मृत देह को अकेले न छोड़ने का इतना कड़ा नियम क्यों है। गरुड़ पुराण में इसके पीछे क्या रहस्य बताया गया है।
        *_जन्म-मरण की निरंतर प्रक्रिया गरुड़ पुराण में कहा गया है कि जिस किसी ने भी इस संसार में जन्म लिया है, उसकी मृत्यु निश्चित है। व्यक्ति अपने कर्मों और चेतना के आधार पर अलग-अलग योनियों में जन्म लेता है और यह चक्र तब तक चलता रहता है, जब तक उस आत्मा को मोक्ष नहीं मिल जाता और ग्रंथों में मोक्ष प्राप्ति के लिए जीते जी मनुष्य को अच्छे कर्म करने पर विशेष जोर दिया गया है।
       *_शव की सुरक्षा का कारण मृत शरीर को अकेला न छोड़ने के पीछे प्रमुख व्यावहारिक कारण है। अगर शव लंबे समय तक बिना निगरानी के रहे तो उसके आसपास चींटियां, कीड़े या अन्य जीव आ सकते हैं, जिससे शरीर को नुकसान होता है। ऐसे में परिवार में से कोई व्यक्ति वहां मौजूद रहता है।
        *_बुरी शक्तियों से बचाव की मान्यता आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, रात के समय बुरी शक्तियां अधिक सक्रिय होती हैं। कहते हैं कि अगर मृत देह को अकेला छोड़ दिया जाए, तो भटकती आत्माएं या नकारात्मक ऊर्जा उस शरीर में प्रवेश कर सकती हैं। इससे परिवार पर भी विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका मानी जाती है।
       अन्य प्रमुख कारण आत्मा का शरीर से जुड़ाव गरुड़ पुराण में उल्लेख मिलता है कि अंतिम संस्कार होने तक आत्मा का अपने शरीर से मोह बना रहता है। वह अपने परिजनों और आसपास की गतिविधियों को महसूस करती है। ऐसे में शव को अकेला छोड़ना आत्मा को दुख पहुंचाने जैसा माना जाता है। यही कारण है कि परिवारजन मृतक के पास बैठकर प्रार्थना और स्मरण करते हैं।
        *_दीपक और धूप जलाने का महत्व मृत शरीर के पास धूप, अगरबत्ती और दीपक जलाने की परंपरा भी प्राचीन समय से चली आ रही है। इसके पीछे धार्मिक मान्यता के साथ-साथ वातावरण को शुद्ध रखने का उद्देश्य भी होता है। माना जाता है कि प्रकाश और सुगंध नकारात्मकता को दूर रखने में सहायक होते हैं।
       *_अधोगति से बचाने की मान्यता धार्मिक कथाओं में यह भी कहा गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा की गति उसके कर्मों पर निर्भर करती है। इसी कारण शव के आसपास साफ-सफाई और उजाले का विशेष ध्यान रखा जाता है। महाभारत में भीष्म पितामह द्वारा उत्तरायण का इंतजार करने का प्रसंग इसी आध्यात्मिक मान्यता से जुड़ा माना जाता है।
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⚜️ अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है। किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है। जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है।
*_ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये। आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है। अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये। घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं।।

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