मध्य प्रदेश

दशरमन में मां महादेवी का प्राचीन धाम, 25 फीट ऊंची शिला के रूप में होती है पूजा-अर्चना

ब्रिटिश शासनकाल में बनी मढ़िया से जुड़ी हैं कई लोकमान्यताएं, नवरात्र में दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान*।  घने जंगलों, कल-कल बहती दतला नदी और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित मां महादेवी का प्राचीन धाम श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है ।  ढीमरखेड़ा तहसील के दशरमन गांव में स्थित इस धार्मिक स्थल की सबसे बड़ी विशेषता यहां विराजमान विशाल शिला है, जिसे भक्त मां महादेवी का स्वरूप मानकर पूजा-अर्चना करते हैं। शारदीय नवरात्र के अवसर पर यहां दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी है ।
*25 फीट ऊंची शिला है आस्था का केंद्र*
मां महादेवी के इस धाम में लगभग 25 फीट ऊंची विशाल शिला विराजमान है। स्थानीय ग्रामीणों की मान्यता है कि इस शिला का आकार हर साल बढ़ रहा है । ग्रामीणों के अनुसार, पहले यह शिला करीब पांच से छह फीट ऊंची दिखाई देती थी, लेकिन समय के साथ इसकी ऊंचाई बढ़ने की लोकमान्यता प्रचलित हो गई ।  श्रद्धालु इस विशाल शिला को मां का साक्षात स्वरूप मानते हुए श्रद्धाभाव से पूजा करते हैं ।
*ब्रिटिश शासनकाल में बनी थी छोटी मढ़िया*
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मां महादेवी का यह धार्मिक स्थल करीब 200 वर्ष पुराना है ।  बताया जाता है कि ब्रिटिश शासनकाल में यहां एक छोटी-सी मढ़िया का निर्माण कराया गया था ।  मंदिर से जुड़ी जनश्रुति के अनुसार, मढ़िया के निर्माण के दौरान वहां से दूध और खून की धारा निकलने लगी थी ।  इस घटना के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया ।  यह प्रसंग आज भी क्षेत्र में प्रचलित है और स्थानीय लोककथाओं के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाया जाता है।
*प्राकृतिक सौंदर्य के बीच विराजमान हैं मां*
दतला नदी के किनारे और घने जंगलों के बीच स्थित मां महादेवी का धाम धार्मिक आस्था के साथ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है ।  शांत वातावरण और प्राचीन शिला श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है ।  शारदीय नवरात्र में दूर-दराज के क्षेत्रों से भक्त यहां पहुंचकर माता के दर्शन करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं ।  लोकमान्यताओं और प्राकृतिक परिवेश के कारण दशरमन स्थित यह प्राचीन धाम क्षेत्र की धार्मिक पहचान बना हुआ है ।

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