मध्य प्रदेश

अभाविप ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के विरोध में एसडीएम के नाम सौपा ज्ञापन

सिलवानी । अखिल भारतीय वि‌द्यार्थी परिषद इकाई-सिलवानी द्वारा दिन शनिवार को प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के चलते सौपा ज्ञापन जिसमे परिषद ने प्रशासन का ध्यान क्षेत्र के निजी स्कूलों में चल रही गंभीर अनियमितताओं और छात्रों के हो रहे खुले शोषण की ओर आकर्षित किया ज्ञापन में उल्लेख है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 (क) के अंतर्गत ‘शिक्षा का अधिकार’ (RTE) एक मौलिक अधिकार है, परंतु सिलवानी क्षेत्र के निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा इसका सरेआम उल्लंघन किया जा रहा है।
ज्ञापन के मुख्य बिंदुओ में
आर.टी.ई. (RTE) के छात्रों से अवैध वसूलीः नियमानुसार शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत RTE एडमिशन के छात्रों को निशुल्क पुस्तकें और निशुल्क यूनिफॉर्म (ड्रेस) प्रदान करने का प्रावधान है, जिसके लिए सरकार द्वारा स्कूलों को राशि भी आवंटित की जाती है। इसके बावजूद, सिलवानी के निजी स्कूलों ‌द्वारा इन छात्रों को अपने स्वयं के पैसों से पुस्तकें और ड्रेस खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो कि पूरी तरह अवैध है।
NCERT पुस्तकों के नियमों का उल्लंघनः शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि कक्षा5 से लेकर 12कक्षा तक सभी विद्यालयों में एनसीईआरटी (NCERT) की पुस्तकों से ही अध्यापन कराया जाए। परंतु, क्षेत्र के निजी स्कूलों ने मोटी कमीशनखोरी के चक्कर में अत्यधिक महंगी पुस्तके लागू कर रखी हैं। स्कूलों द्वारा चुनिंदा पुस्तकें और विशेष ड्रेस केवल उनके द्वारा निर्धारित की गई एक या दो ही दुकान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। छात्र चाहकर भी इन सामग्रियों को खुले बाजार में किसी अन्य दुकान से कम दामों पर नहीं खरीद सकते। इस कृत्रिम एकाधिकार के कारण छात्रों से मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर छात्रों और उनके परिवारों का आर्थिक शोषण है।
अधिकांश स्कूलों के निजी वाहन संचालित है परंतु उनमें से कई वाहन सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करते जिससे छात्रो की सुरक्षा के साथ खुलेआम खिलवाड़ चल रहा हैं।
निजी स्कूल अपने सूचना पटल पर न ही फीस का चस्पा प्रदर्शित करते और न ही पाठक्रमों का जिसके कारण अभिभावकों को भ्रमित कर मोटी फीस वसूली जाती। सभी निजी स्कूल अपने सूचना पटल पर पाठक्रमों एवं फीस की सूचना चस्पा करे।जिससे अभिभावकों को गुमराह नहीं किया जा सके। अखिल भारतीय विधार्थी परिषद यह मॉग करता है हुए। सात दिवस के अदर जॉच कर सुधारात्मक कार्रवाई की माँग की है। विद्यार्थी परिषद ने स्पष्ट तौर पर कहा है की छात्रों के अधिकारों से खिलवाड़ नहीं चलेगा अगर संवैधानिक कार्यवाही नहीं की गई तो विद्यार्थी परिषद आंदोलन एवं प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन व प्रशासन की रहेगी।

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