मध्य प्रदेश

IPS अभिजीत कुमार रंजन के खिलाफ विभागीय जांच लंबित रखने का आरोप, आठ अधिकारियों को भेजा स्मरण पत्र

मुख्यमंत्री की मंजूरी के बावजूद जांच शुरू नहीं होने का दावा, अधिवक्ता देवेंद्र शर्मा ने की अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान।  मध्य प्रदेश कैडर के वर्ष 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी अभिजीत कुमार रंजन के विरुद्ध प्रस्तावित विभागीय जांच लंबित रहने का मामला सामने आया है ।  इस संबंध में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर के अधिवक्ता देवेंद्र शर्मा ने 17 अक्टूबर 2026 को स्मरण आवेदन पत्र जारी कर प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री सहित आठ वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया है ।  आवेदन में विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने पर सवाल उठाते हुए संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई है ।
*मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद भी जांच लंबित होने का दावा*
अधिवक्ता देवेंद्र शर्मा द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, आईपीएस अधिकारी अभिजीत कुमार रंजन, जो वर्तमान में भोपाल स्थित पीटीआरआई, जहांगीराबाद में पदस्थ हैं, के विरुद्ध विभागीय जांच के लिए मुख्यमंत्री स्तर से प्रशासकीय अनुमोदन दिए जाने का दावा किया गया है ।  आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा विभागीय जांच की अनुशंसा गृह विभाग को भेजी जा चुकी है ।  इसके बावजूद जांच की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने पर अधिवक्ता ने आपत्ति जताई है ।
*गृह विभाग में फाइल लंबित रखने का आरोप*
स्मरण पत्र में आरोप लगाया गया है कि संबंधित विभागीय जांच की फाइल गृह विभाग के वरिष्ठ मुख्य सचिव स्तर पर ई-फाइलिंग प्रणाली में कई महीनों से लंबित है ।  आवेदनकर्ता ने आशंका जताई है कि अधिकारी के प्रभाव के कारण जांच की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है ।
*अन्य अधिकारी की जांच का भी किया उल्लेख*
आवेदन में हरदा कांड से जुड़े प्रमोटी आईपीएस अधिकारी संजीव कुमार कंचन के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू किए जाने का उल्लेख करते हुए दोनों मामलों में कार्रवाई की गति को लेकर सवाल उठाए गए हैं ।  अधिवक्ता ने आरोप लगाया है कि एक मामले में जांच तत्काल शुरू कर दी गई, जबकि अभिजीत कुमार रंजन के मामले में प्रक्रिया लंबित बनी हुई है ।
*लोकायुक्त शिकायत और एसीआर का भी उल्लेख*
स्मरण पत्र में अभिजीत कुमार रंजन के विरुद्ध मध्य प्रदेश लोकायुक्त में शिकायत दर्ज होने और पद के कथित दुरुपयोग एवं भ्रष्टाचार से संबंधित जांच शुरू होने का दावा भी किया गया है ।  इसके अतिरिक्त, आवेदन में उनकी गोपनीय चरित्रावली यानी एसीआर में कम अंक दिए जाने तथा पूर्व डीजीपी विवेक जौहरी द्वारा फील्ड पोस्टिंग के लिए उपयुक्त नहीं बताए जाने का उल्लेख किया गया है । इन बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि के लिए संबंधित अभिलेखों और विभागीय पक्ष की जानकारी आवश्यक होगी ।
*आठ वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा आवेदन*
अधिवक्ता देवेंद्र शर्मा ने यह स्मरण आवेदन मध्य प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री, केंद्रीय गृह सचिव, मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशासन तथा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक गुप्तवार्ता को संबोधित किया है ।
आवेदन के अंत में उन्होंने मांग की है कि मुख्यमंत्री के कथित प्रशासकीय अनुमोदन के बावजूद विभागीय जांच लंबित रहने के मामले की जांच कराई जाए और यदि लापरवाही या जानबूझकर फाइल रोकने की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए ।

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