मध्य प्रदेश

उमरियापान में त्योहारों के दौरान पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल

नवमी के जवारा से लेकर दशहरा चल समारोह और प्रतिमा विसर्जन तक अव्यवस्थाओं के आरोप, क्यूली तालाब के घाटों पर नहीं थी विद्युत व्यवस्था
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान।  शारदीय नवरात्रि की नवमी और दशहरा पर्व के दौरान उमरियापान सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े । सोमवार को नवमी तिथि पर जवारा देखने के लिए नगर में भारी जनसमूह पहुंचा, वहीं मंगलवार को दशहरा चल समारोह में भी हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही ।  इसके बावजूद त्योहारों के दौरान पुलिस प्रशासन की व्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय लोगों ने असंतोष जताया है ।  लोगों का आरोप है कि भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और प्रतिमा विसर्जन स्थलों पर जरूरी व्यवस्थाओं की कमी दिखाई दी ।
*चल समारोह के दौरान यातायात व्यवस्था पर सवाल*
दशहरा के दूसरे दिन ग्रामीण क्षेत्रों में भी दुर्गा प्रतिमाओं के चल समारोह निकाले गए ।  पचपेड़ी और पकरिया में मुख्य मार्ग से दुर्गा प्रतिमाएं निकाली गईं, लेकिन इस दौरान वाहनों की आवाजाही लगातार जारी रही ।  स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रतिमाओं के निकलने के दौरान यातायात को व्यवस्थित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आए ।  इससे श्रद्धालुओं और वाहन चालकों को परेशानी होने की आशंका बनी रही । लोगों का कहना है कि ऐसे आयोजनों के दौरान पुलिस की तैनाती और यातायात नियंत्रण की विशेष व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति निर्मित न हो ।
*क्यूली तालाब में विसर्जन के दौरान विद्युत व्यवस्था नहीं होने का आरोप*
मंगलवार को सबसे अधिक दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन क्यूली तालाब में किया गया ।  स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि विसर्जन घाटों पर पर्याप्त विद्युत व्यवस्था नहीं थी ।  ऐसे में रात के समय प्रतिमा विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हुए ।  लोगों का कहना है कि विसर्जन स्थलों पर रोशनी, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए ।  यदि किसी प्रकार की दुर्घटना हो जाती, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती, यह भी लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा ।
स्थानीय लोगों के मुताबिक पूर्व में बकादा सहित अन्य घाटों पर विद्युत व्यवस्था की जाती रही है, लेकिन इस बार व्यवस्थाओं में कमी महसूस की गई ।
*थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली को लेकर भी नाराजगी*
स्थानीय नागरिकों ने थाना प्रभारी महेंद्र जायसवाल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं ।  लोगों का कहना है कि त्योहारों के दौरान केवल वाहन से गश्त करने के बजाय संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती, पैदल गश्त और फ्लैग मार्च जैसे कदम उठाए जाने चाहिए, जिससे आम नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा बना रहे ।  भीड़भाड़ वाले मार्गों, प्रतिमा विसर्जन स्थलों और चल समारोह के रास्तों पर विशेष निगरानी की जरूरत बताई गई ।
*शांति समिति की बैठक में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति पर सवाल*
स्थानीय लोगों ने यह आरोप भी लगाया कि शांति समिति की बैठकों में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को पर्याप्त रूप से आमंत्रित नहीं किया जा रहा है ।  उनका कहना है कि बैठकों में महज 10 से 15 लोगों की उपस्थिति से क्षेत्र की समस्याओं और सुझावों पर व्यापक चर्चा नहीं हो पाती ।  शांति समिति की बैठक का उद्देश्य त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था, यातायात, सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं को लेकर सामूहिक रूप से योजना बनाना होता है ।  ऐसे में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी जरूरी मानी जाती है ।
*व्यवस्थाओं की समीक्षा की उठी मांग*
नवमी के जवारा, दशहरा चल समारोह और प्रतिमा विसर्जन जैसे बड़े आयोजनों में हजारों लोगों की मौजूदी में सुरक्षा, यातायात नियंत्रण, घाटों में पर्याप्त रोशनी और पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के पर्व मना सकें ।

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