सैनिक छावनी की 2.72 हेक्टेयर शासकीय जमीन पर कथित अवैध कब्जे का मामला गरमाया

ग्राम पंचायत स्लीमनाबाद की सरपंच संगीता महोबिया ने जनसुनवाई में कलेक्टर को सौंपा शिकायत पत्र
न्यायालयों के आदेशों का हवाला देकर तत्काल अतिक्रमण हटाने की मांग
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान। तहसील स्लीमनाबाद अंतर्गत सैनिक छावनी के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज शासकीय भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला अब जिला प्रशासन की जनसुनवाई तक पहुंच गया है । ग्राम पंचायत स्लीमनाबाद की सरपंच संगीता महोबिया ने मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत की । उन्होंने ग्राम हरदुआ स्थित खसरा नंबर 54 की 2.72 हेक्टेयर शासकीय भूमि को कथित अतिक्रमण से मुक्त कराने तथा मामले में तत्काल प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है । सरपंच ने अपने आवेदन में भूमि के स्वामित्व संबंधी राजस्व अभिलेखों, पूर्व में हुई न्यायालयीन कार्रवाई और तहसीलदार द्वारा जारी नोटिस का उल्लेख करते हुए प्रशासन से नियमानुसार कार्रवाई करने का आग्रह किया है ।
*सैनिक छावनी के नाम दर्ज है भूमि*
कलेक्टर को सौंपे गए शिकायत आवेदन के अनुसार, संबंधित भूमि ग्राम हरदुआ, पटवारी हल्का नंबर 14, राजस्व निरीक्षक मंडल स्लीमनाबाद, तहसील स्लीमनाबाद, जिला कटनी के अंतर्गत स्थित है। भूमि का खसरा नंबर 54 तथा रकबा 2.72 हेक्टेयर बताया गया है । सरपंच के अनुसार, उक्त भूमि राजस्व अभिलेखों में सैनिक छावनी के नाम से मध्य प्रदेश शासन की शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है ।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उक्त भूमि पर कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से कब्जा किया गया है । सरपंच ने प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित कराते हुए कहा है कि शासकीय भूमि से संबंधित राजस्व अभिलेखों और न्यायालयीन आदेशों के आधार पर मामले की जांच कर नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जानी चाहिए ।
*पहले भी विभिन्न न्यायालयों तक पहुंच चुका है मामला*
सरपंच द्वारा दिए गए आवेदन में उल्लेख किया गया है कि संबंधित भूमि को लेकर पूर्व में भी कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई थी । मामले को तहसीलदार, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), सिविल कोर्ट तथा अन्य न्यायालयों के समक्ष प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख शिकायत में किया गया है । आवेदन के मुताबिक, संबंधित पक्षों के बीच चले न्यायालयीन प्रकरणों में याचिकाएं खारिज होने के बाद भी भूमि को लेकर विवाद समाप्त नहीं हुआ ।
शिकायत में हाईकोर्ट में जनहित याचिका प्रस्तुत किए जाने और उसके खारिज होने का भी उल्लेख किया गया है । सरपंच ने इन घटनाक्रमों का हवाला देते हुए प्रशासन से मांग की है कि भूमि के संबंध में उपलब्ध राजस्व दस्तावेजों और न्यायालयों के आदेशों का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाए ।
*15 सितंबर को पंचायत और ग्रामीणों ने दिया था आवेदन*
शिकायत के अनुसार, ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर 15 सितंबर 2026 को तहसीलदार स्लीमनाबाद के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था । आवेदन में कथित कब्जे को हटाने तथा शासकीय भूमि को सुरक्षित कराने की मांग की गई थी । इसके बाद तहसीलदार कार्यालय द्वारा संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी भी शिकायत में दी गई है ।
सरपंच ने जनसुनवाई में प्रस्तुत आवेदन के माध्यम से बताया कि ग्राम पंचायत स्तर पर मामला उठाए जाने के बाद भी भूमि से कथित कब्जा नहीं हटाया गया। इसी के चलते अब जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर हस्तक्षेप की मांग की गई है।
*तहसीलदार ने सात दिन में कब्जा हटाने के लिए जारी किया था नोटिस*
शिकायत आवेदन में उल्लेख है कि तहसीलदार स्लीमनाबाद ने 16 सितंबर 2026 को कार्यालयीन पत्र क्रमांक 376/2026 के माध्यम से संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया था । नोटिस में सात दिनों के भीतर स्वयं कब्जा हटाने के निर्देश दिए जाने की बात कही गई है।
सरपंच का आरोप है कि निर्धारित समयावधि बीतने के बाद भी कथित अतिक्रमण नहीं हटाया गया । आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि 26 सितंबर 2026 को सिविल कोर्ट में संबंधित प्रकरण खारिज हुआ था । इसके विरुद्ध 28 सितंबर 2026 को सिविल अपील न्यायालय में अपील प्रस्तुत की गई, जिसे शिकायत के अनुसार 14 अक्टूबर 2026 को खारिज कर दिया गया ।
इन घटनाक्रमों का हवाला देते हुए सरपंच ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित न्यायालयीन आदेशों और राजस्व रिकॉर्ड का परीक्षण कर शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं । हालांकि, इन आदेशों की वास्तविक विषयवस्तु और उनके प्रभाव की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित न्यायालयीन दस्तावेजों से किया जाना आवश्यक है ।
*गांव में विवाद की आशंका जताई, समय रहते कार्रवाई की मांग*
सरपंच संगीता महोबिया ने शिकायत में आशंका जताई है कि यदि कथित कब्जे के मामले का समय रहते निराकरण नहीं किया गया, तो गांव में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है । उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित भूमि की स्थिति का परीक्षण कराया जाए और नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि किसी भी प्रकार के तनाव या अप्रिय स्थिति से बचा जा सके ।
शिकायत में ग्रामीणों में नाराजगी होने का भी उल्लेख किया गया है । सरपंच ने प्रशासन को आगाह करते हुए कहा है कि मामले की जानकारी पहले भी संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखी जा चुकी है । ऐसे में अब आवश्यक है कि शिकायत पर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट की जाए और भूमि से जुड़े विवाद का विधिसम्मत समाधान निकाला जाए ।
*अब जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें*
सैनिक छावनी के नाम दर्ज बताई जा रही 2.72 हेक्टेयर भूमि को लेकर ग्राम पंचायत की ओर से जनसुनवाई में शिकायत किए जाने के बाद अब जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर निगाहें टिकी हुई हैं । सरपंच ने कलेक्टर से मांग की है कि भूमि के राजस्व रिकॉर्ड, संबंधित न्यायालयों के आदेशों तथा तहसीलदार द्वारा जारी नोटिस की जांच कराकर नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन शिकायत के आधार पर संबंधित अधिकारियों से क्या प्रतिवेदन प्राप्त करता है और भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के बाद आगे क्या कदम उठाए जाते हैं ।



