मध्य प्रदेश

डाक विभाग के निजीकरण के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान

20 जुलाई से काली पट्टी बांध कर करेंगे विरोध, 5 अगस्त को प्रदेशव्यापी हड़ताल, मांगें पूरी न होने पर 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन आंदोलन
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान।  भारतीय डाक विभाग कर्मचारी संघ ने डाक विभाग के निजीकरण, कर्मचारियों के कथित शोषण एवं विभिन्न लंबित मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा की है । संघ के जबलपुर संभागीय सचिव अनिल सिंह बागरी ने पत्र जारी कर बताया कि विदेशी कंपनी मैकेंजी के सुझावों के आधार पर डाक विभाग का निजीकरण किया जा रहा है, जिसका कर्मचारी संगठन विरोध कर रहा है ।
उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग में “टारगेट” के नाम पर कर्मचारियों पर लगातार मानसिक दबाव बनाया जा रहा है ।  ग्रामीण डाक सेवकों एवं विभागीय कर्मचारियों से अपने वेतन से खाते खुलवाकर लक्ष्य पूरे कराए जा रहे हैं, जिसे संघ आर्थिक एवं मानसिक शोषण मानता है ।
संघ ने यह भी मांग की है कि एक शहर से दूसरे शहर तक डाक भेजने के लिए संचालित RTN (रोड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क) व्यवस्था को बंद कर रेल डाक सेवा (Rail Mail Service) के अनुभागों को पुनः शुरू किया जाए, ताकि सरकारी धन निजी ठेकेदारों के बजाय भारतीय रेलवे को प्राप्त हो और डाक परिवहन व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सके ।
आंदोलन की रूपरेखा (जबलपुर संभाग)
20 से 27 जुलाई 2026 तक सभी डाकघरों में कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे ।
28 जुलाई 2026 को लंच अवकाश के दौरान मंडलीय कार्यालयों में विशाल प्रदर्शन किया जाएगा ।
5 अगस्त 2026 को पूरे मध्यप्रदेश में एक दिवसीय हड़ताल होगी ।
18 अगस्त 2026 तक मांगें पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी ।
*संघ की प्रमुख मांगें*
टारगेट के नाम पर कर्मचारियों का शोषण बंद किया जाए ।
RTN सेवा समाप्त कर रेल डाक सेवा को पुनः शुरू किया जाए ।
मेल मोटर विभाग सहित सभी रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की जाए ।
डाक विभाग में बढ़ रहे भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं पर कठोर कार्रवाई हो ।
पोस्टल अकाउंट के विकेंद्रीकरण एवं कैडर रिव्यू पर रोक लगाई जाए ।
भूतपूर्व सैनिक कोटे से भर्ती कर्मचारियों की वेतन विसंगतियां दूर की जाएं ।
वर्तमान NDC/IDC डिलीवरी प्रणाली समाप्त कर पुरानी डाक वितरण व्यवस्था बहाल की जाए ।
17 दिसंबर को आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय श्रम दिवस घोषित किया जाए ।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय-सीमा में मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार एवं डाक विभाग के प्रशासन की होगी ।

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