महावीर स्वामी के सिद्धांतों से ही भारत का उद्धार- आर्यिका उपशांतमति

रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । भगवान महावीर जी की जयंती गौरझामर गुगवारा मे धूमधाम से मनाई गई गुरुवार को महावीर स्वामी के जन्मोत्सव जन्म कल्याण की धूम रही जिसमें गौरझामर में परम पूज्य समाधिस्थ आचार्य विद्यासागर जी की शिष्या आर्यिका उपशांतमति ससंघ सानिध्य के साथ आज यह उत्सव बड़े हर्षोल्लास से मनाया गया माताजी की ग्रीष्मकालीन वाचना नगर में चल रही है आज के कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 6:00 से अतिशयकारी बड़े जैन मंदिर मैं वीर प्रभु की प्रतिमा का अभिषेक पूजन करने उपरांत विमान में विराजमान कर सभी श्रावकों के व्यवस्थित पहनावे के साथ अनुशासन में पूरे नगर में विहार किया गया सबसे आगे उदघोष वाहन, धर्म ध्वजा, भगवान जी के विमान के पीछे आर्यिका मां, मंदिर पूजन ड्रेस में श्रावक, बालिका मंडल, बहु मंडल, महिला मंडल, पुरुष श्रावक व्यवस्थित रूप से विहार की भव्यता को और विशेष रूप दे रहे थे जुलूस में व्यवस्था हेतु पुलिस प्रशासन के साथ नवयुवक, सेवादल के साथी भी अपनी भूमिका निभाई पूज्य माताजी द्वारा महावीर जिनालय मंदिर नयापुरा में आज के कार्यक्रम आयोजित था वहां धर्मसभा को संबोधित किया जिसमें उन्होंने भगवान महावीर स्वामी जी को प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव जो क्षत्रिय कुल से थे उन्हीं के परिजन होने के बाद उन्होंने अपनी सिद्धातों से क्षत्रिय कुल और वीर का कर्तव्य, जो अहिंसा परमो धर्मा, जियो और जीने दो, सत्य, ब्रह्मचर्य, क्षमा जो वीरों को मुक्ति प्रदाता है उनकी शिक्षाएं पर हम भी उनके आदर्शों को पालने का आचरण रखे इस पार प्रकाश डाला कार्यक्रम में सायं में आरती और दोपहर में प्रसाद वितरण किया गया।



