धर्म, पुण्य करना हैं, तो जीते जी करें, अंत समय तो कर्मो का हिसाब होगा- पंडित रामकृपालु शर्मा
रिपोर्टर : राजकुमार रघुवंशी
सिलवानी। तहसील के ग्राम साईखेड़ा के श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर पर चल रही सप्तदिवसिय मार्कण्डेय पुराण एवं वायु पुराण कथा के चतुर्थ दिवस कथा व्यास वेदाचार्य पंडित रामकृपालु शर्मा ने देवी भक्ति की महिमा बताते हुए कहा कि मानव को जितने धर्म, पुण्य करना है। वो इस ही संसार और इस ही जीव आत्मा शरीर से कर ले, क्योंकि यही का हिसाब परमात्मा के पास जायेगा, प्रभुकृपा और पूर्व जन्मों में किए हुऐ पुण्य जब एकत्रित होते है। तो जीव को सत्संग की प्राप्ति होती है। क्योंकि सत्संग के बिना ज्ञान की प्राप्ति असंभव है भगवान से सदैव सत्संग मांगना चाहिए सत्संग देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। सत्संग से ज्ञान रूपी मोतियों को एकत्रित कर जीव अपने जीवन को सफल कर सकता है। मृत्युलोक में किया गया हरेक कार्य फलदाई होता है। मनुष्य लोक एवं मनुष्य जन्म के बिना किसी भी लोक अथवा शरीर में किए गए कर्मो का फल प्राप्त नही होता है। क्योंकि अन्य सभी शरीर भोग योनियों व अन्य लोक भोग लोक है वहाँ पर जीव केवल अपने द्वारा किए गए कर्म ही भोगता है।


