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सिद्धेश्वर धाम : घने जंगलों के बीच बसा — एक ऐसा पावन स्थल

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । बेगमगंज के घने जंगलों के बीच बसा — एक ऐसा पावन स्थल जहां आज भी शिव का वास है!
जी हां, हम बात कर रहे हैं — मंवई के सिद्धेश्वर धाम की — जो वन परिक्षेत्र बेगमगंज की बीट मबई के क्रमांक 86 के अंतर्गत आता है।
यहां का नज़ारा किसी स्वर्ग से कम नहीं… चारों ओर हरियाली, बीच में पत्थरों के बीच से फूटता निर्मल जल — जो 12 महीनों तक लगातार बहता रहता है।
भीषण गर्मी हो या सूखा — सिद्धेश्वर धाम का जलकुंड कभी नहीं सूखता!
यही कारण है कि यहां के आसपास के जंगली जीव और पक्षी हमेशा स्वस्थ रहते हैं।उक्त स्थल को ईकोपर्यटन के रूप में विकसित और पहचान दिलाने में रायसेन वनमण्डल की डीएफओ श्री मति प्रतिभा शुक्ला के मार्गदर्शन में रेंजर अरविंद अहिरवार के विशेष प्रयासों से यहां यज्ञशाला का निर्माण, पहुंच मार्ग का विकास, और स्थानीय रोजगार के अवसरों का सृजन किया गया है।
वन जीवन की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में ग्रामीण भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
कहा जाता है कि यह शिवधाम लगभग 500 साल पुराना है… और इस पवित्र स्थल के जल में इतनी दिव्यता है कि यहां की 2500 की आबादी वाले मंवई गांव में कभी किसी को गंभीर बीमारी नहीं हुई — न टीवी, न कैंसर।
ग्रामीणों का विश्वास है — यह चमत्कार सिद्धेश्वर धाम के जल का ही है।
हर साल यहां भव्य मेले का आयोजन होता है, जहां दूर-दूर से भक्त उमड़ते हैं — जल का आशीर्वाद लेने और बाबा सिद्धेश्वर के दर्शन करने।
घने जंगलों के बीच से निकलती यह कहानी — न केवल आस्था की, बल्कि हरियाली और पर्यावरण संरक्षण की भी मिसाल है।

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