देश विदेश

मैं न किसी का समर्थक हूँ…न किसी का विरोधी…

दिव्य चिंतन : हरीश मिश्र, लेखक ( स्वतंत्र पत्रकार)
मैं एक कलमकार हूँ, एक चिंतक हूँ। मेरा प्रयास केवल वर्तमान को नहीं, बल्कि आने वाले समय की संभावनाओं को भी समझना है।
मुझे किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि देश और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की चिंता है। आशंका इस बात की है कि यदि हठधर्मिता, गलत निर्णय, अहंकार और बढ़ता भ्रष्टाचार समय रहते नहीं रुके, तो कहीं देश ऐसे हाथों में न चला जाए, जिसकी कीमत आने वाली पीढ़ियों को चुकानी पड़े।
आज जो परिस्थितियाँ बन रही हैं, उनमें मुझे एक बड़ी राजनीतिक और सामाजिक सुनामी की आहट दिखाई दे रही है।
इतिहास संयोगों से भरा है…13 दिन की सरकार…13 महीने की सरकार… और अब 13 वर्ष का पड़ाव। यह भविष्यवाणी नहीं, बल्कि इतिहास से सीख लेने का संकेत है।
वक्त हमेशा संकेत देता है। समय रहते संभल जाना ही बुद्धिमानी है। सत्ता में बैठे लोगों को आत्ममंथन करना चाहिए और जनता की भावनाओं, युवाओं की अपेक्षाओं, किसानों के दर्द तथा देश के भविष्य से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से समझना चाहिए।
लोकतंत्र में जनता ही अंतिम निर्णायक होती है। वही जनता, जो किसी को शिखर पर पहुँचाती है, आवश्यकता पड़ने पर उसे नीचे भी उतार देती है।
इसलिए जनता की आवाज़ को समय रहते सुन लेना ही सबसे बड़ी राजनीतिक समझदारी है।

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