कृषिमध्य प्रदेश

प्रशासन की रोक के बावजूद कुम्हारी क्षेत्र में धड़ल्ले से जल रही नरवाई, बढ़ा खतरा

ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह। जिले के कुम्हारी क्षेत्र में प्रशासन द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद खेतों में नरवाई जलाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। फसलों की कटाई के बाद बची नरवाई में किसान लगातार आग लगा रहे हैं, जिससे आसपास के क्षेत्रों में खतरे की स्थिति बनती जा रही है।
रात के समय कई स्थानों पर खेतों से उठती आग की लपटें साफ देखी जा सकती हैं। यह आग हवा के साथ फैलकर न केवल अन्य खेतों को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि खड़ी फसलों के लिए भी गंभीर खतरा बन रही है। चिंगारियां दूर तक उड़कर आगजनी की घटनाओं को न्योता दे रही हैं।
ग्राम कुलुवा में हाल ही में नरवाई की आग की चपेट में आने से 8 से 10 मवेशियों के झुलसने की जानकारी सामने आई है, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। वहीं, आग से निकलने वाला धुआं और कालिख आसपास के घरों तक पहुंचकर लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी परेशानी का कारण बन रहा है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे भूमि के पोषक तत्व और लाभकारी जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। यदि नरवाई को खेत में मिलाया जाए, तो यह प्राकृतिक खाद का काम करती है और भूमि की गुणवत्ता को बेहतर बनाती है।
इसके बावजूद कई किसान समय और श्रम बचाने के उद्देश्य से नरवाई में आग लगा रहे हैं, ताकि जल्द ग्रीष्मकालीन फसलों की बोवनी की जा सके। कुम्हारी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।
भूसे का भी गहराया संकट
हार्वेस्टर से कटाई बढ़ने के कारण पशुओं के लिए भूसे की कमी पहले ही महसूस की जा रही है। ऐसे में बची नरवाई को भी जला देने से पशुओं के चारे का संकट और गहरा गया है, जिससे पशुपालकों की चिंता बढ़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सख्ती बरतने और नरवाई जलाने पर रोक सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि पर्यावरण और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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