ब्यौहारी से लंबा एवं मंगलमय विहार कर ससंघ खितौला पहुंचीं वंदनीय आर्यिका माँ सूत्रमति माताजी

श्रद्धालुओं ने किया भव्य स्वागत
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान। परम पूज्य आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महाराज की शिष्या एवं आचार्य गुरुवर श्री समय सागर जी महाराज की आज्ञानुवर्ती शिष्या वंदनीय आर्यिका माँ सूत्रमति माताजी ससंघ चातुर्मास हेतु ब्यौहारी से लंबा, कठिन एवं मंगलमय विहार करते हुए रविवार को खितौला पधारीं । उनके पावन आगमन से संपूर्ण खितौला क्षेत्र धर्म, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो उठा। जैन समाज सहित नगरवासियों ने श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ उनका भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया ।
नगर प्रवेश के दौरान श्रद्धालुओं ने जयघोष, मंगल गीत, धर्मध्वज और पुष्पवर्षा के साथ आर्यिका संघ की अगवानी की। जैन महिला मंडल द्वारा आकर्षक बैंड की मधुर एवं मनमोहक प्रस्तुति के साथ माताजी का स्वागत किया गया । ढोल-नगाड़ों, गाजे-बाजे और भक्ति गीतों के बीच निकली भव्य स्वागत यात्रा में बड़ी संख्या में समाजजन, महिलाएं, युवा एवं बच्चे शामिल हुए। पूरा नगर “जय जिनेन्द्र” और धर्ममय उद्घोषों से गुंजायमान हो उठा ।
आर्यिका माँ सूत्रमति माताजी के नगर भ्रमण के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं ने अपने घरों के बाहर रंगोली सजाकर, पुष्पवर्षा कर एवं आरती उतारकर उनका भावभीना स्वागत किया । अनेक स्थानों पर श्रद्धालुओं ने विनयपूर्वक आहार अर्पित किया तथा माताजी के चरणों में वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया । नगरवासियों की श्रद्धा और भक्ति देखते ही बन रही थी ।
ब्यौहारी से लंबे विहार के पश्चात वंदनीय आर्यिका माँ सूत्रमति माताजी का ससंघ खितौला आगमन श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत सौभाग्य एवं पुण्य का अवसर माना जा रहा है । समाजजनों ने कहा कि माताजी के पावन सान्निध्य से पूरे क्षेत्र में धार्मिक चेतना, आत्मिक शांति एवं संस्कारों का वातावरण और अधिक सुदृढ़ होगा ।
चातुर्मास के दौरान वंदनीय आर्यिका माँ सूत्रमति माताजी के सान्निध्य में प्रतिदिन धर्मसभा, प्रवचन, स्वाध्याय, तप, साधना, जिनपूजन एवं विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों का लाभ खितौला सहित आसपास के अनेक नगरों एवं गांवों से आने वाले श्रद्धालु प्राप्त करेंगे।
आर्यिका माँ सूत्रमति माताजी के मंगलमय आगमन से पूरे खितौला क्षेत्र में हर्ष, उत्साह और श्रद्धा का वातावरण व्याप्त है । समाजजन चातुर्मास को लेकर विशेष उत्साहित हैं और इसे अपने जीवन का परम सौभाग्य मानते हुए अधिकाधिक संख्या में धार्मिक आयोजनों में सहभागिता का संकल्प ले रहे हैं।



