धार्मिकमध्य प्रदेश

माँ वीरासन देवी के दर्शन को बड़ी संख्या में पहुंच रहे भक्त

शारदेय नवरात्र में हो रही मां वीरासन देवी की विशेष पूजा अर्चना
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान l सिलौडी से सात किलोमीटर दूर जंगलों के बीच स्थित प्रसिद्ध देवी स्थल मां वीरासन देवी (कचनारी) में शारदेय नवरात्रि में माता के दर्शन को भक्त बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। माता के भक्त दूर दराज से सुबह से ही माता की पूजा अर्चना कर दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। प्रांगण में भक्तों द्वारा प्रसाद वितरण कर पुण्य लाभ ले रहे है।
घने जंगलों के बीचों बीच स्थापित है जगत जननी माँ वीरासन देवी का मनोकामना पूर्ण करने वाला मन्दिर इस स्थान का मुख्य रूप है यहाँ पर विराजमान माँ वीरासन देवी की प्रतिमा। माता की प्रतिमा प्राचीन काल की बनी हुई हैl माँ वीरासन देवी की प्रतिमा घनघोर जंगल के बीच में स्थापित हैं, और अपने भक्तों की मनोकामनाओ को पूरा करती हैं। माता रानी के दर्शन करने के लिए हर वर्ष माता के भक्त बड़ी संख्या में पहुंचते रहे है।
मंदिर प्रांगण में हर वर्ष की दोनों नवरात्र में 10 दिनों के मेले का आयोजन किया किया जाता है । स्थानीय लोगों ने बताया कि मंदिर के आसपास खुदाई के दौरान और भी कई प्राचीन अवशेष मिले हैं। मंदिर से कुछ ही दूरी पर खेत में खुदाई करने के दौरान एक कुआं भी मिला था, जो कि देखने में बहुत ही पुराना है प्रतीत होता है, यह मंदिर गवर्नमेंट के अधीनस्थ ट्रस्ट पर हैं। माँ विरासन माता के दर्शन कर भक्त पुन्य लाभ अर्जित कर माता से जगत कल्याण हेतु प्रार्थना कर मनोकामना मांग रहे है।
माँ वीरासन देवी से 3 कि.मी. की दूरी पर घूघरा स्थित जलप्रपात है जंहा नदी के बीच एक चट्टान हांथी का रूप धारण किये हुए है हांथी नुमा चट्टान में आँख कान सूंड पूंछ सब अंग स्पष्ट दिखाई देते है हांथी के पिंछे वाली चट्टानों में विभिन्न प्रकार के पैरो की आक्रतिया ( घोड़े आदि की ) स्पष्ट दिखाई देती है, यंहा रंग बिरंगे छोटे छोटे पत्थर के टुकड़े मिलते है, बहुत से लोग चट्टानों पर अपना नाम भी इन्ही रंग बिरंगे पत्थरो से लिख कर सजाते है,
यहां की प्राचीन कहानी है बुजुर्गो के अनुसार अनंत काल में घूघरा नदी से बारात निकल रही थी जो यंहा समा गई थी जिसके ये निशान है जो अभी भी दिखाई देते है, इन्हीं पत्थरों के ऊपर चढ़कर लोग कुण्ड में कूदकर स्नान करते है। जो दर्शनिक केंद्र बना हुआ है।
शारदेय नवरात्र में सिलौडी कस्बा समेत क्षेत्र के सभी ग्रामों पर माता जगत जननी की आराधना से सारा वातावरण भक्तिमय है ।
माँ विरासन माता की रोज सुबह और शाम में पूजन आरती से माँ की आराधना की जा रही है । अनेक भक्तो द्वारा 9 दिन का उपवास किया जा रहा है। ग्राम के पुजारी, पुरोहित एवं भक्त गण दिन भर एवं रात्रि पर माँ के पूजन आरती में लीन है। गाँव के देवालयों में छोटी मढ़िया, बड़ी मढ़िया, खेर माता, देसाई माता आदि देवी स्थलों पर सुबह से ही भक्त जल अर्पित एवं दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। सारा वातावरण माता की भक्ति में भक्तिमय है।

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