29 जनवरी 2024 : सकट चौथ व्रत कथा, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 29 जनवरी 2024 : सकट चौथ व्रत कथा, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
⭕ HIGHLIGHTS
♦️ यदि माताएं संपूर्ण विधि-विधान के सा व्रत रखती है तो संतान हमेशा स्वस्थ्य रहती है और दीर्घायु होती है।
♦️ सकट चतुर्थी व्रत के दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
♦️ आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, इस बार सकट चतुर्थी व्रत 29 जनवरी को रखा जाएगा।
🌧️ माघ माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन यदि माताएं संपूर्ण विधि-विधान के सा व्रत रखती है तो संतान हमेशा स्वस्थ्य रहती है और दीर्घायु होती है। सकट चतुर्थी व्रत के दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार सकट चतुर्थी व्रत 29 जनवरी को रखा जाएगा। व्रती महिलाएं इस तिथि को निर्जला व्रत रखती है और रात में चंद्रोदय के बाद अर्घ्य देकर व्रत को पूरा करती है।
⚛️ सकट चतुर्थी 2024 शुभ मुहूर्त और तिथि
इस साल सकट चतुर्थी का व्रत 29 जनवरी 2024 को रखा जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 29 जनवरी 2024 को सुबह 06 बजकर 10 मिनट होगी और समाप्त 30 जनवरी 2024 को सुबह 08 बजकर 54 मिनट पर होगा। वहीं सकट चतुर्थी के दिन चंद्रोदय 29 जनवरी 2024 को रात 8 बजकर 48 मिनट पर होगा।
📆 सकट चौथ 2024 तिथि
पंचांग के अनुसार माघ माह के कृष्ण पक्ष की सकट चतुर्थी तिथि की शुरुआत 29 जनवरी 2024 को सुबह 06 बजकर 10 मिनट होगी। अगले दिन इसका समापन 30 जनवरी 2024 को सुबह 08 बजकर 54 मिनट पर होगा। ऐसे में इस साल सकट चौथ का व्रत 29 जनवरी 2024 को रखा जाएगा।
🌙 चन्द्रमा और गणेश होते हैं प्रसन्न
मन के स्वामी चंद्रमा और बुद्धि के स्वामी गणेश जी के संयोग के परिणामस्वरुप इस चतुर्थी व्रत के करने से मानसिक शांति, कार्य सफलता, प्रतिष्ठा में बुद्धि और घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर करने में सहायक सिद्ध होती है। इस दिन किया गया व्रत और पूजा पाठ वर्ष पर्यंत सुख शान्ति और पारिवारिक विकास में सहायक सिद्ध होता है। यह उत्तर भारतीयों का प्रमुख पर्व है। शास्त्र परंपरा के अनुसार इस दिन गुड और तिल का पिंड बनाकर उसे पर्वत रूप समझकर दान किया जाता है। गुड़ से गौ की मूर्ति बनाकर जिसे गुड़-धेनु कहा जाता है का दान रात्रि में चंद्रमा और गणेश की पूजा के उपरांत अगले दिन प्रासदस्वरुप दान करना चाहिए।
🤷🏻♀️ सकट चौथ का महत्व
चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है। इस दिन व्रत और पूजा-पाठ से भगवान गणेश जीवन में सभी तरह बाधाएं को दूर करते हैं। माघ महीने की सकट चौथ व्रत मुख्य रूप से महिलाएं संतान की लंबी आयु की कामना के लिए किया जाता है। ऐसी मान्यता है इस दिन व्रत रखने से सभी तरह के संकट खत्म हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। ऐसे मान्यता है भगवान गणेश ने माता पार्वती और भगवान शिव की परिक्रमा सकट चौथ के ही दिन की थी जिस कारण से इस व्रत का विशेष महत्व होता है।
🍱 सकट चौथ पूजा विधि
गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप नैवेद्य, ऋतु फल आदि से गणेश जी का षोडशोपचार बिधि से पूजन करें और चंद्रमा को अर्घ्य भी दें। चंद्रमा को अर्घ्य देते समय ॐ चन्द्राय नमः। ॐ सोमाय नमः। मंत्र का उच्चारण करते रहना चाहिए। व्रती को इस दिन चन्द्रमा के उदय की विशेष प्रतीक्षा रहती है। व्रत करने वालों के लिए यदि संभव हो तो दस महादान जिनमें अन्नदान, नमक का दान, गुड का दान, स्वर्ण दान, तिल का दान, वस्त्र का दान, गौघृत का दान, रत्नों का दान, चांदी का दान और दसवां शक्कर का दान करें। ऐसा करके प्राणी दुःख-दारिद्रता, कर्ज, रोग और अपमान के विष से मुक्ति पा सकता है।
यदि यह सभी दान संभव न भी तो भी तिल और गुड से बना पिंड (पर्वत) का ही दान करके ईष्ट कार्य की प्राप्ति और संकट हरण भगवान गणेश की कृपा का पात्र बन सकते है। इसदिन गौ और हाथी को गुड खिलाने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। विद्यार्थी वर्ग गणेश चतुर्थी के दिन ॐ गं गणपतये नमः का 108बार जप करके प्रखर बुद्धि और विद्या प्राप्त कर सकते हैं। ॐ एक दन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धी महि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात। का जप जीवन के सभी संकटों और कार्य बाधाओं को दूर करेगा।
💁🏻♀️ ऐसे करें सकट चतुर्थी व्रत की पूजा
सकट चौथ के दिन महिलाओं को सुबह घर की सफाई के बाद जल्द स्नान करना चाहिए।भगवान गणेश का ध्यान कर सकट चतुर्थी व्रत पर निर्जला व्रत का संकल्प लें। महिलाएं यदि चाहे तो खिचड़ी मूंगफली और फलाहार कर सकती है।विधि-विधान के साथ भगवान गणेश की आराधना करें। भगवान गणेश को काले तिल और गुड़ से बना भोग लगाएं। गणेश पूजा के बाद आखिर में आरती उतारकर प्रसाद वितरण करें।
📖 सकट चौथ व्रत कथा
कुछ इस प्रकार है कि एक बार एक नगर में साहूकार और साहुकारनी रहा करती थी। दोनों को धार्मिक कार्यों, दान पुण्य या सामाजिक कार्यों में कोई दिलचस्पी नहीं थी। वे निःसंतान थे यही उनकी सबसे बड़ी चिंता थी। एक बार सकट चौथ के दिन उनकी पड़ोसन पूजा अर्चना कर रही थी। साहुकारनी ने पड़ोसन को पूजा करते देखा तो पूछने लगी कि आखिर तुम यह क्या कर रही हो? पड़ोसन ने कहा कि आज सकट चौथ है और मैं इसकी पूजा कर रही हूं। फिर साहुकारनी ने पूछा कैसे सकट चतुर्थी का व्रत और पूजा से क्या लाभ होता है?
पड़ोसन ने कहा कि इस व्रत से धन, वैभव, सुहाग की दीर्घायु और संतान की प्राप्ति होती है। पड़ोसन की बात सुनकर सहुकारनी बोली कि अगर मेरी संतान हुई तो जरूर सकट चतुर्थी का व्रत रखूंगी और सवा सेर तिलकुट करूंगी। साहुकारनी के मुख से निकले उन वचनों पर तो मानो देवी सरस्वती विराजमान थीं। भगवान गणेश ने साहुकारनी की मनोकामना सुन ली और वह गर्भवती हो गई।
गर्भवती होने पर साहुकारनी बोली कि अगर मेरे पुत्र हुआ तो मैं ढाई सेर तिलकुट करूंगी। इसके बाद साहुकारनी के पुत्र हुआ। अब साहुकारनी ने कहा कि मेरे पुत्र का विवाह भली प्रकार तय हो जाए तो मैं पांच सेर तिलकुट करूंगी। इसपर भगवान गणेश ने यह मुराद भी सुनी और अब पुत्र का विवाह भी तय हो गया। साहुकारनी ने जो भी मुराद मांगी थी वह सब पूर्ण हुई पर उसने तिलकुट नहीं किया। इससे सकट अत्यधिक नाराज हो गए और उन्होंने क्रोध दिखाना शुरू किया।
जब साहुकारनी का पुत्र विवाह में फेरे ले रहा था तब उसे फेरे के बीच में से उठाकर पीपल के पेड़ पर बिठा दिया। सब लोग वर को इधर – उधर ढूंढने लगे। जब वर नहीं मिला तो सब लोग निराश होकर घर की ओर चले गए। जिस कन्या से साहूकारनी के बेटे का विवाह होने वाला था वह एक दिन सहेलियों संग गणगौर पूजा के लिए जंगल में दूब लेने के उद्देश्य से गई। तब उसने वहां पीपल के पेड़ से आवाज सुनी कि ओ मेरी अर्धब्याही…… उस कन्या ने जैसे ही यह सुना वह काफी डर गई और वहां से भागते हुए अपने घर पहुंची।
घर पहुंचकर उस लड़की ने सारी बात अपनी मां को बताई। तब मां अपनी बेटी की बात सुनकर पीपल के पेड़ के निकट पहुंची। लड़की की मां देखती है कि पीपल के पेड़ पर वह लड़का बैठा है जिससे उसकी बेटी का विवाह होने वाला था। लड़की की मां जमाई से बोली कि मेरी बेटी को अर्धब्याहा कर यहां क्यों बैठे हो? अब क्या चाहते हो हमसे ? इस पर साहूकारनी का पुत्र बोला कि मेरी मां ने चौथ का तिलकुट बोला रखा था, जिसे उन्होंने अभी तक नहीं किया।
मां की वजह से सकट देवता काफी नाराज हुए और उन्होंने मुझे यहां पीपल के पेड़ पर बैठा दिया। ये बात सुनकर लड़की की मां दौड़ी – दौड़ी साहूकारनी के घर पहुंची और उससे सकट चौथ के बारे में पूछा। इसपर साहूकारनी बोली हां मैंने पांच सेर तिलकुट बोला रखा था। एक बार फिर साहूकारनी ने कहा हे सकट चौथ महाराज ! अगर मेरा बेटा सही सलामत घर वापस आ जाए, तो मैं अब पांच सेर नहीं बल्कि ढाई मन का तिलकुट करूंगी। अबकी बार फिर भगवान गणेश ने उसे मौका दिया और उसके बेटे को सही सलामत घर वापस भेज दिया। बेटे के घर लौटने के बाद उसका धूमधाम से विवाह रचाया गया।
जब साहूकारनी के बेटे और बहू घर आ गए तब साहूकारनी ने अपने कहे अनुसार ढाई मन तिलकुट किया और बोली है सकट महाराज! आपकी कृपा से मेरे बेटे पर आया संकट दूर हुआ, उसका विवाह संपन्न हुआ और बेटा व बहू सकुशल घर पर भी आ गए हैं। मैं आपकी महिमा को भली भांति समझ चुकी हूं। अब से मैं हमेशा तिलकुट करके सकट चौथ का व्रत का पालन करूंगी। सकट चौथ की कहानी यह बताती है कि जो भी सच्चे मन से भगवान गणेश का व्रत तथा पूजन करता है और का पाठ करता है, उसकी मनोकामना अवश्य ही पूर्ण होती है।
☪️ सकट चतुर्थी का व्रत कब किया जाता है?
संकट चतुर्थी का व्रत माघ मास में कृष्णा पक्ष की तिथि को रखा जाता है। बताते चलें कि माघ मास की कृष्ण पक्ष तिथि को आने वाली चतुर्थी का अपना अलग महत्व है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से कार्यों और मार्गों में आने वाले सभी विघ्न दूर हो जाते हैं।
👉🏽 सकट चौथ के व्रत में क्या खाना चाहिए?
दिनभर अन्न ग्रहण न कर केवल फलाहार ही करना चाहिए और एक ही बार सात्विक भोजन ग्रहण करें। व्रत के खाने में सिंघाड़े का आटा, कुटु का आटा, साबूदाना आदि शामिल किया जा सकता है।



