कानून से ऊपर कार्यपालन यंत्री, भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, मंत्री नहीं करा पाए कार्रवाई

सत्ताधारी नेताओं के संरक्षण में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के कार्यपालन यंत्री गंभीर आरोप, सीएम हेल्पलाइन जांच आवेदनों की अनदेखी का मामला उजागर
ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह । जिले में कानून और नियमों की धज्जियाँ उड़ाने का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग में पदस्थ कार्यपालन यंत्री मनोज गुप्ता पर नियम विरुद्ध नियुक्ति, भ्रष्टाचार और शिकायतकर्ताओं को प्रताड़ित करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि उन्हें सत्ताधारी पार्टी के प्रभावशाली नेताओं के दबाव में उनके ही गृह जिले दमोह में पदस्थ कराया गया, जो नियमों के प्रतिकूल है।
सूत्रों के अनुसार, यह नियुक्ति इसलिए कराई गई ताकि सत्ताधारी नेताओं द्वारा कराए गए अधूरे और संदिग्ध निर्माण कार्यों का भुगतान बिना रोक-टोक होता रहे। इस पूरे मामले को लेकर शिकायतकर्ता द्वारा प्रभारी मंत्री दमोह इंदर सिंह परमार को दस्तावेजों सहित अवगत कराया गया था।
प्रभारी मंत्री ने सार्वजनिक मंच से यह घोषणा भी की थी कि मनोज गुप्ता की नियुक्ति नियम विरुद्ध है और उन्हें पद से हटाया जाएगा। लेकिन बाद में जब यह सामने आया कि मनोज गुप्ता को सत्ताधारी दल के एक वरिष्ठ नेता का संरक्षण प्राप्त है, तो प्रभारी मंत्री ने अपनी ही पार्टी के भीतर टकराव मोल लेना उचित नहीं समझा।
हालाँकि प्रभारी मंत्री द्वारा जिला कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर को दस्तावेज सौंपते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आज दिनांक तक न तो मंत्री स्तर पर और न ही प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई हो सकी है। इस निष्क्रियता के चलते कार्यपालन यंत्री मनोज गुप्ता स्वयं को कानून से ऊपर समझने लगे हैं, ऐसा आरोप लगाया जा रहा है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उनके द्वारा विभाग में भ्रष्टाचार की जांच को लेकर वर्ष 2022 से 2025 तक दर्जनों आवेदन दिए गए, लेकिन एक भी आवेदन पर आज तक जांच नहीं की गई। इतना ही नहीं, आरटीआई के माध्यम से पूछे गए सवालों में यह भी सामने आया कि विभाग के पास इन आवेदनों का कोई रिकॉर्ड तक उपलब्ध नहीं है।
आरोप यह भी है कि मनोज गुप्ता द्वारा सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का झूठा और भ्रामक निराकरण किया जाता है तथा शिकायतकर्ता को “आदतन शिकायतकर्ता” बताकर मामलों को दबाया जाता है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और कुछ नेताओं व ठेकेदारों के माध्यम से धमकियाँ भी दिलवाई जा रही हैं।
विभाग में पदस्थ बाबू राजीव लोचन चौबे पर भी करीब 44 लाख रुपये के गबन के आरोप हैं, जिसकी शिकायत जिला कलेक्टर, सागर संभाग आयुक्त, मुख्यमंत्री कार्यालय भोपाल और प्रभारी मंत्री तक की जा चुकी है। इसके बावजूद आज तक न कार्यपालन यंत्री मनोज गुप्ता पर और न ही बाबू राजीव लोचन चौबे पर कोई कार्रवाई होना, पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
गौरतलब है कि जिले के कई पत्रकारों द्वारा इस नियम विरुद्ध नियुक्ति और कथित भ्रष्टाचार को लेकर लगातार सवाल उठाए गए, लेकिन प्रशासन और शासन की चुप्पी ने पूरे मामले को और संदेहास्पद बना दिया है।
अब देखना यह होगा कि खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन और मध्यप्रदेश शासन ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग में पदस्थ कार्यपालन यंत्री मनोज गुप्ता पर कोई ठोस कार्रवाई करता है या एक बार फिर इस गंभीर मामले को नज़रअंदाज़ कर दिया जाएगा।



