शिक्षकों की पदोन्नति में देरी पर उठे सवाल, समय-सीमा तय करने की मांग
स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर सभी पात्र संवर्गों की पदोन्नति प्रक्रिया पूरी कराने की मांग, सेवानिवृत्ति के करीब शिक्षकों को प्राथमिकता देने पर जोर
भोपाल। मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे शिक्षकों का मामला एक बार फिर उठने लगा है। अध्यापक शिक्षक संगठन ने स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर वरिष्ठ अध्यापक, माध्यमिक शिक्षक और प्राथमिक शिक्षक सहित सभी पात्र संवर्गों की पदोन्नति प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी कर आदेश जारी करने की मांग की है। संगठन ने सवाल उठाया है कि जब जुलाई में ही पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए थे, तो अब तक आदेश जारी क्यों नहीं हुए और कार्यवाही किस स्तर पर लंबित है। संगठन ने अपने पत्र में मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 का हवाला देते हुए कहा है कि लंबे समय से पदोन्नति की राह देख रहे अनेक शिक्षक अब सेवा के अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं। ऐसे में पदोन्नति में देरी से उनके सेवाकाल की प्रगति, वरिष्ठता और सम्मानजनक उपलब्धि प्रभावित हो सकती है। संगठन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी अधिकारी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि लंबित प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट कराकर पात्र शिक्षकों को उनके अधिकार का लाभ दिलाना है।
जुलाई में दिए गए थे समय-सीमा में कार्यवाही के निर्देश
पत्र के अनुसार, संयुक्त संचालक लोक शिक्षण, भोपाल संभाग ने 6 जुलाई 2026 को जारी पत्र के बाद 10 और 15 जुलाई को स्मरण-पत्र जारी कर पदोन्नति संबंधी कार्यवाही शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए थे। इन पत्रों में जिला शिक्षा अधिकारियों से वरिष्ठता सूची, वर्ष 2019 से 2025 तक के गोपनीय प्रतिवेदन, सतर्कता संबंधी जानकारी और सीआर की ग्रेडिंग उपलब्ध कराने को कहा गया था। 15 जुलाई के स्मरण-पत्र में 16 जुलाई तक जानकारी उपलब्ध कराने और 17 जुलाई तक कार्यवाही पूरी करने के निर्देशों का उल्लेख है। इसके बावजूद पदोन्नति आदेश जारी नहीं होने पर संगठन ने प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है। संगठन ने मंत्री से मांग की है कि सभी शिक्षक संवर्गों की पदोन्नति की वर्तमान स्थिति की समीक्षा कर जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर लोक शिक्षण संचालनालय तक लंबित चरणों की पहचान की जाए। साथ ही रिक्त पदों और पात्र शिक्षकों की संख्या सार्वजनिक करने, वरिष्ठता सूची और गोपनीय प्रतिवेदन की स्थिति स्पष्ट करने तथा लंबित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठकें तत्काल आयोजित कराने की मांग की गई है। पत्र में पदोन्नति के लिए निश्चित समय-सीमा तय करने और चयन सूची के साथ आदेश जारी करने पर भी जोर दिया गया है। विशेष रूप से आगामी महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों के मामलों को प्राथमिकता देने की मांग की गई है, ताकि प्रशासनिक विलंब के कारण उनका पदोन्नति का अवसर प्रभावित न हो। संगठन ने यह भी कहा है कि यदि किसी स्तर पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है तो संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाए, लेकिन उसका खामियाजा पात्र शिक्षकों को नहीं भुगतना पड़े।
संवैधानिक अधिकारों का दिया हवाला
संगठन ने अपने पत्र में सर्वोच्च न्यायालय के यूनियन ऑफ इंडिया बनाम हेमराज सिंह चौहान मामले का उल्लेख करते हुए कहा है कि पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति के लिए निष्पक्ष रूप से विचार किए जाने का अधिकार संवैधानिक समानता और सार्वजनिक रोजगार में अवसर से जुड़ा है। संगठन ने नियमसम्मत, पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया के साथ सभी संवर्गों के लिए विशेष पदोन्नति अभियान चलाने का आग्रह किया है। संगठन ने मंत्री से स्पष्ट निर्देश जारी कर यह जानकारी प्राप्त करने की मांग की है कि पदोन्नति की प्रक्रिया किस स्तर पर रुकी हुई है और पात्र शिक्षकों के आदेश कब तक जारी किए जाएंगे।



