हर दिन अपना आत्म निरीक्षण जरूर करें : कमलेश कृष्ण शास्त्री
रिपोर्टर : शिवकुमार साहू
सियरमऊ । ग्राम सियरमऊ में चल रही श्री गणेश महापुराण कथा के प्रथम दिवस में पं.कमलेश कृष्ण शास्त्री जी महाराज बेगमगंज वालों ने व्यासपीठ पर बैठकर कहा कि जीवन में आध्यात्मिक गुणवत्ता जरूरी है। अतः स्वयं करें, स्वयं का उद्धार। आत्म-संयम के कठिन रास्ते पर चलने वालों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। हर दिन अपना आत्म-निरीक्षण करते रहना चाहिए। अपने दोष, बुराइयों को जान बूझकर छिपाना या उस पर पर्दा नहीं डालना चाहिए। अपनी बुराइयों को सहर्ष स्वीकार करना चाहिए। सुधारना है तो स्वयं को सुधारें। आत्म-निरीक्षण करने के साथ ही सुधार की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। संसार में कोई भी नियम ऐसा नहीं है, बिना आत्म-संयम के जिसका कि पालन किया जा सके। अपनी बुराइयों को सहर्ष स्वीकार करना चाहिए। उन्हें दूर करने के लिए निरन्तर प्रयास करते रहना चाहिए। संयम के लिए नैतिक बल की आवश्यकता होती है। संयम साधना में संगति और स्थान का काफी प्रभाव पड़ता है। खराब चरित्र एवं दुर्विचार वाले व्यक्तियों से दूर रहना चाहिए। जहाँ असंयम का वातावरण होता है, वहाँ संयम साधना में सफलता नहीं मिलती है। वहीं, अच्छे लोगों की संगत करके एवं अच्छे वातावरण में रह कर इसे प्राप्त किया जा सकता है। जीवन के उत्कर्ष के लिए संत-महापुरुषों का अनुसरण आवश्यक है। अध्यात्म आत्म-उत्कर्ष, जीवन-सिद्धि, अखण्ड-आनन्द एवं परम-शान्ति का मार्ग है। गीताकार ने अर्जुन को और उनके माध्यम से मानव को प्रेरणा दी है कि अपना उद्धार स्वयं करें। अपनी समृद्धि के लिए स्वयं तत्पर एवं उद्यत हों। अपने उत्थान और पतन का दायित्व स्वयं वहन करें। यदि जीवन में हमें ऊँचा उठना है, तो हमें स्वयं ही पुरुषार्थ करना होगा। शक्तियों का स्रोत हमारे भीतर है। ईश्वर हमारी सहायता तभी करते हैं, जब हम इसके पात्र होते हैं।



